Raipur Crime News: पारिवारिक विवाद में मासूम से छीनी मां की गोद, ढाई घंटे में सुरक्षित मिला एक साल का बच्चा; थाने में मना जन्मदिन
रायपुर में पारिवारिक विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पति-पत्नी के बीच चल रहे तनाव का असर एक साल के मासूम बच्चे पर पड़ गया। जिस उम्र में बच्चे को परिवार के प्यार, सुरक्षा और देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र में उसे माता-पिता के विवाद के बीच असुरक्षा का सामना करना पड़ा। राहत की बात यह रही कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बच्चा कुछ ही घंटों में सुरक्षित मिल गया और उसे उसकी मां के पास पहुंचा दिया गया।
इस घटना का भावुक पहलू यह भी रहा कि बच्चे के मां से बिछड़ने वाले दिन ही उसका पहला जन्मदिन था। बच्चे की सुरक्षित वापसी के बाद पंडरी थाने में पुलिसकर्मियों ने केक काटकर उसका जन्मदिन मनाया। हालांकि इस घटना के पीछे छिपा पारिवारिक विवाद और बच्चे की सुरक्षा का सवाल कहीं अधिक गंभीर है।
पति-पत्नी के विवाद के बीच मासूम बना सबसे बड़ा प्रभावित
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर निवासी 26 वर्षीय प्रिया पांडेय की शादी वर्ष 2022 में लाकेश सिंह बंजारे से हुई थी। दोनों के बीच पिछले कई महीनों से पारिवारिक विवाद चल रहा था और वे करीब सात से आठ महीने से अलग रह रहे थे।
मंगलवार को दोनों के बीच एक बार फिर विवाद हुआ। आरोप है कि इस दौरान पति ने पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। मामला तब और गंभीर हो गया जब बच्चे को लेकर भी विवाद शुरू हो गया।
परिवार के बीच चल रहे मतभेद का सबसे संवेदनशील पक्ष यह था कि बच्चा अभी इतना छोटा है कि वह अपनी जरूरतों और भावनाओं को शब्दों में व्यक्त भी नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा और देखभाल को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो जाता है।
मां शिकायत लेकर थाने पहुंची, पीछे से बच्चे को ले गया पिता
घटना के दौरान बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए पड़ोस में रहने वाली रूबी प्रिया मानिकपुरी ने उसे अपने घर पर रखा था। इसके बाद मां शिकायत दर्ज कराने पंडरी थाने पहुंची।
इसी बीच शाम करीब छह बजे लाकेश वहां पहुंचा और आरोप है कि वह एक साल के बेटे के साथ पत्नी का मोबाइल फोन भी लेकर चला गया। मां ने बच्चे को वापस देने की मांग की, लेकिन उसे बच्चे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
बच्चे की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए मां ने पुलिस से तत्काल मदद मांगी। इसके बाद पंडरी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्चे की तलाश शुरू कर दी।
ढाई घंटे की तलाश के बाद सुरक्षित मिला मासूम
बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। डीसीपी नॉर्थ दीपमाला कश्यप के मार्गदर्शन और एडीसीपी आदित्य पांडेय तथा एसीपी कृष्ण कुमार चंद्राकर के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी निरीक्षक परेश पांडेय की टीम ने तलाश शुरू की।
पुलिस के प्रयासों से करीब ढाई घंटे के भीतर बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया गया। इसके बाद उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।
इस त्वरित कार्रवाई से मां को बड़ी राहत मिली। बच्चे की सुरक्षित वापसी ने यह भी दिखाया कि परिवार से जुड़े संवेदनशील मामलों में शुरुआती शिकायत को गंभीरता से लेना और समय पर कदम उठाना कितना महत्वपूर्ण है।
थाने में केक काटकर मनाया बच्चे का पहला जन्मदिन
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब पुलिसकर्मियों को पता चला कि जिस दिन बच्चा अपनी मां से अलग हुआ, उसी दिन उसका पहला जन्मदिन भी था।
बच्चे के सुरक्षित मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने थाने में ही केक काटकर उसका जन्मदिन मनाया। पुलिसकर्मियों ने बच्चे के साथ खुशियां साझा कीं। तनाव और चिंता से गुजरी मां के लिए यह पल राहत और भावनात्मक सहारे का अवसर बना।
हालांकि यह खुशी उस परेशानी को कम नहीं करती, जिससे बच्चा और उसकी मां गुजरे, लेकिन पुलिसकर्मियों की इस पहल ने संवेदनशील पुलिसिंग का एक मानवीय पक्ष जरूर सामने रखा।
पिता के खिलाफ दर्ज हुआ मामला, कानूनी कार्रवाई जारी
मां प्रिया की शिकायत पर पुलिस ने लाकेश सिंह बंजारे, उम्र 28 वर्ष, निवासी गोबरा नवापारा के खिलाफ अपराध क्रमांक 380/2026 दर्ज किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और 115(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इस मामले में पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। दर्ज आरोपों और उनके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
पारिवारिक विवाद में बच्चों को माध्यम बनाना क्यों है गंभीर?
इस घटना ने एक बार फिर उस समस्या की ओर ध्यान खींचा है, जिसमें पति-पत्नी के आपसी मतभेद का असर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति पर पड़ता है। छोटे बच्चे भले ही विवाद की वजह न समझ पाएं, लेकिन असुरक्षित माहौल, माता-पिता से अचानक दूरी और लगातार तनाव उनके भावनात्मक विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
कानूनी और सामाजिक दृष्टि से भी ऐसे मामलों में बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। माता-पिता के बीच विवाद होने पर बच्चे को दबाव बनाने या बदले का माध्यम बनाना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर परिवार परामर्श, कानूनी सहायता और बाल कल्याण से जुड़ी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है।
रायपुर की इस घटना में मासूम की सुरक्षित वापसी राहत की बात है, लेकिन असली जरूरत ऐसे पारिवारिक विवादों को समय रहते सुलझाने की है, ताकि किसी बच्चे को अपने ही परिवार के तनाव की कीमत न चुकानी पड़े।




