School Controversy: आवासीय विद्यालय में गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप, प्राचार्य पर छेड़छाड़ का केस दर्ज; जांच में खुलेगी सच्चाई
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में दर्ज एक शिकायत ने संस्थान के कामकाज और वहां कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में नर्स के पद पर काम कर चुकी एक युवती ने प्राचार्य ओम नारायण सिन्हा पर छेड़छाड़ और अश्लील व्यवहार करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राचार्य के खिलाफ छह धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ता ने नौकरी पर असर पड़ने की आशंका के कारण पहले चुप रहने की बात कही है। उसके अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान दो अलग-अलग मौकों पर प्राचार्य ने उसे अकेले में पाकर आपत्तिजनक बातें कहीं और संबंध बनाने का दबाव डाला। युवती का कहना है कि पद से हटाए जाने के बाद उसने पुलिस से संपर्क किया।
यह आरोप केवल एक कर्मचारी और अधिकारी के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। कार्यस्थल पर पद और अधिकारों का असमान संतुलन किसी भी कर्मचारी के लिए शिकायत दर्ज कराने को कठिन बना सकता है। खासकर तब, जब संबंधित व्यक्ति की नौकरी, भविष्य और रोजमर्रा का कामकाज उसी अधिकारी के प्रशासनिक नियंत्रण में हो। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को बिना दबाव के अपनी बात रखने का अवसर मिलना और आरोपी को निष्पक्ष जांच का अधिकार मिलना—दोनों जरूरी हैं।
पहले भी सवालों के घेरे में आया था विद्यालय का प्रबंधन
बतौली के शिवपुर स्थित इस आवासीय विद्यालय का नाम इससे पहले छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा में आया था। कुछ समय पहले करीब 40 छात्राओं ने भोजन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर अंबिकापुर पहुंचकर प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी थी। छात्राओं ने भोजन में कीड़े मिलने, खराब खाना परोसे जाने और छात्रावास में बिजली की समस्या जैसी बातें उठाई थीं। इसके बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित की थी।
छात्राओं की शिकायतें और नर्स की ओर से लगाए गए आरोप दो अलग-अलग विषय हैं। इनके बीच किसी संबंध या मिलीभगत का निष्कर्ष बिना प्रमाण के निकालना उचित नहीं होगा। फिर भी, दोनों घटनाएं इस बात की जरूरत रेखांकित करती हैं कि आवासीय विद्यालयों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि भोजन, सुरक्षा, कर्मचारियों का व्यवहार और प्रशासनिक जवाबदेही भी नियमित निगरानी के दायरे में होनी चाहिए।
छह धाराओं में मामला दर्ज, जांच के निष्कर्ष पर टिकी आगे की कार्रवाई
पुलिस ने शिकायत और युवती के बयान के आधार पर प्राचार्य के खिलाफ छह धाराओं में मामला दर्ज किया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 74 और 75(2) के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(w) भी शामिल बताई गई है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच सीतापुर एसडीओपी कर रहे हैं।
कुछ धाराओं में गैर-जमानती प्रावधान होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुका है। गिरफ्तारी, जमानत और आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होती है। जांच में शिकायत के समय, परिस्थितियों, उपलब्ध दस्तावेजों, संभावित गवाहों और दोनों पक्षों के बयानों की अहम भूमिका होगी।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया गलत, जांच में सहयोग की बात कही
दूसरी ओर, प्राचार्य ओम नारायण सिन्हा ने आरोपों को गलत बताया है। उनका दावा है कि विद्यालय में व्यवस्था सुधारने के बाद पहले से चल रही कथित अनियमितताओं पर रोक लगी थी और इसी वजह से उनके खिलाफ शिकायत की गई है। उन्होंने पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही है।
प्राचार्य का यह पक्ष भी जांच का हिस्सा होना चाहिए। हालांकि, विद्यालय में राशन या अन्य सामग्री के कथित दुरुपयोग को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यदि ऐसी कोई अनियमितता है, तो उसकी जांच अलग से दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, खरीद रिकॉर्ड और वितरण व्यवस्था के आधार पर की जानी चाहिए। किसी एक पक्ष के आरोप को दूसरे आरोप का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आवासीय विद्यालयों में जवाबदेही की जरूरत
एकलव्य आवासीय विद्यालयों में बच्चे लंबे समय तक परिसर में रहते हैं। ऐसे संस्थानों में भोजन की गुणवत्ता, छात्रावास की सुविधाएं, कर्मचारियों का आचरण और शिकायत निवारण व्यवस्था सीधे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े हैं। इसलिए यहां प्रशासनिक निगरानी केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
इस मामले में निष्पक्ष जांच के साथ यह भी जरूरी है कि शिकायतकर्ता को किसी तरह के दबाव या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। वहीं, आरोपी को भी बिना जांच के दोषी घोषित नहीं किया जाना चाहिए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो कानून और सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यदि जांच में शिकायत के तथ्य सही नहीं पाए जाते, तो उस स्थिति में भी कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित निर्णय लिया जा सकता है।
बतौली आवासीय विद्यालय विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं रह गया है। यह संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों की सुरक्षा और छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों के हितों से जुड़ा मामला है। जांच की निष्पक्षता और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई ही तय करेगी कि सच्चाई क्या है।




