Dhamtari Patwari Strike: हड़ताल पर प्रशासन का सख्त एक्शन, 2 पटवारी सस्पेंड; राजस्व सेवाओं पर बढ़ा संकट
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब कर्मचारियों और प्रशासन के बीच टकराव का रूप लेती दिख रही है। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे करीब 148 पटवारियों के बीच प्रशासन ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। पांच क्षेत्रों के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। कार्रवाई के विरोध में पटवारी संगठन ने निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर नाराजगी जताई।
इस घटनाक्रम का असर केवल सरकारी कर्मचारियों के आंदोलन तक सीमित नहीं है। पटवारी राजस्व व्यवस्था की जमीनी कड़ी होते हैं। जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, सीमांकन, नामांतरण, फसल संबंधी जानकारी और विभिन्न राजस्व प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में लंबे समय तक कामकाज प्रभावित रहने पर किसानों और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
13 अक्टूबर से आंदोलन, जिले के 148 पटवारी शामिल
राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले धमतरी जिले के लगभग 148 पटवारी 13 अक्टूबर से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। धमतरी, नगरी, कुरूद सहित जिले के कई क्षेत्रों में आंदोलन जारी है।
हड़ताल के बीच नगरी एसडीएम ने हल्का पांवद्वार में पदस्थ पटवारी चिम्मन लाल ध्रुव को निलंबित किया। प्रशासनिक आदेश के अनुसार, वे समीक्षा बैठक में उपस्थित नहीं हुए थे। उन्हें पहले कारण बताओ नोटिस दिया गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई।
इसी तरह मगरलोड तहसीलदार ने मुख्यालय बेलोरा में पदस्थ पटवारी चैतन्य नेताम को निलंबित किया है। दोनों कार्रवाइयों के बाद आंदोलनकारी पटवारियों में नाराजगी बढ़ गई।
पांच क्षेत्रों के कर्मचारियों से 48 घंटे में जवाब मांगा
प्रशासन ने धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुकरेल क्षेत्र के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में 48 घंटे के भीतर उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के अनुसार, कुछ पटवारियों के खिलाफ काम में लापरवाही के कारण कार्रवाई की गई है। प्रशासन का पक्ष है कि सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, पटवारी संगठन ने कार्रवाई को आंदोलन के संदर्भ में देखा है। संगठन के प्रांतीय संयोजक और अन्य प्रदर्शनकारियों ने निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। उनका कहना है कि वे किसानों के हित में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ लगातार नोटिस और निलंबन की कार्रवाई की जा रही है।
विवाद के बीच सबसे बड़ी चिंता किसानों और आम नागरिकों की
पटवारी हड़ताल का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्हें रोजमर्रा के राजस्व कार्यों के लिए पटवारी कार्यालय या संबंधित हल्के में संपर्क करना पड़ता है। जमीन के दस्तावेजों में सुधार, नामांतरण, सीमांकन, आय और निवास प्रमाणपत्रों से जुड़ी प्रक्रियाओं तथा फसल संबंधी सत्यापन जैसे कामों में देरी होने की आशंका रहती है।
किसानों के लिए भी राजस्व रिकॉर्ड का समय पर अपडेट होना जरूरी है। फसल नुकसान, मुआवजा, सरकारी योजनाओं और भूमि संबंधी विवादों में दस्तावेजी जानकारी की अहम भूमिका होती है। इसलिए आंदोलन लंबा खिंचने पर आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
हालांकि, हर सेवा पर कितना असर पड़ा है, इसका आकलन संबंधित विभाग के वास्तविक कामकाज और लंबित प्रकरणों के आंकड़ों से ही किया जा सकता है।
प्रशासनिक अनुशासन और कर्मचारियों की मांग—दोनों पर स्पष्टता जरूरी
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। प्रशासन सरकारी कामकाज और बैठकों में उपस्थिति को अपनी जिम्मेदारी का हिस्सा मान रहा है, जबकि कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को उचित बता रहा है।
ऐसी स्थिति में जरूरी है कि निलंबन और नोटिस से जुड़े मामलों में प्रत्येक कर्मचारी की स्थिति, जारी निर्देशों और जवाब का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए। साथ ही, पटवारी संघ की मांगों पर बातचीत के लिए स्पष्ट समयसीमा और संवाद की व्यवस्था भी बनाई जाए।
सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई से लंबे आंदोलन का समाधान निकलना मुश्किल हो सकता है। वहीं, आंदोलन के कारण आम नागरिकों की सेवाएं लगातार प्रभावित होती रहें, यह भी स्वीकार्य स्थिति नहीं है।
समाधान में देरी का असर पूरे राजस्व तंत्र पर पड़ सकता है
धमतरी में जारी गतिरोध का अगला रास्ता प्रशासन और पटवारी संगठन के बीच बातचीत से ही निकल सकता है। यदि मांगों और प्रशासनिक आपत्तियों पर सहमति नहीं बनती, तो हड़ताल और कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। इससे लंबित राजस्व मामलों का बोझ बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल दो निलंबन, पांच क्षेत्रों में नोटिस और 148 पटवारियों की हड़ताल ने जिले की राजस्व व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। इस विवाद का निष्पक्ष समाधान जरूरी है, ताकि कर्मचारियों की शिकायतों पर सुनवाई हो और किसानों तथा आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार न करना पड़े।




