अफगानिस्तान का ‘वन किडनी विलेज’: जब गरीबी ने लोगों को किडनी बेचने पर मजबूर किया
हेरात, अफगानिस्तान। दुनिया में ऐसे गांव की कल्पना करना भी मुश्किल है जहां एक बड़ी संख्या में लोगों के शरीर पर किडनी निकालने के ऑपरेशन के निशान हों। लेकिन अफगानिस्तान के हेरात प्रांत का Sayshanba Bazaar इलाका कई वर्षों से ऐसी ही त्रासदी के लिए चर्चा में रहा है। स्थानीय लोगों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इसे “वन किडनी विलेज” कहा गया, क्योंकि यहां आर्थिक तंगी से जूझ रहे कई लोगों द्वारा किडनी बेचने की घटनाएं सामने आई थीं।
यह कहानी सिर्फ अंगों की बिक्री की नहीं है। इसके पीछे बेरोजगारी, कर्ज, विस्थापन, भोजन की कमी और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था जैसी समस्याओं की एक लंबी श्रृंखला दिखाई देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2026 के आकलन के मुताबिक अफगानिस्तान में 1.44 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है। संगठन ने आर्थिक संकट, खाद्य असुरक्षा, विस्थापन और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को गंभीर चुनौती बताया है।
हेरात में किडनी बेचने की घटनाएं खास तौर पर 2021-22 के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आई थीं। उस समय प्रकाशित फील्ड रिपोर्टों में Sayshanba Bazaar के ऐसे परिवारों का जिक्र था, जिन्होंने भोजन, कर्ज या परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी किडनी बेच दी। कुछ मामलों में एक ही परिवार के कई सदस्यों द्वारा ऐसा करने की बात सामने आई थी। हालांकि इन रिपोर्टों में बताए गए आंकड़ों को आज के आधिकारिक सरकारी आंकड़े के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
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सवाल सिर्फ एक किडनी पर जिंदगी का नहीं
चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी के साथ जीवन जी सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अंग निकालने की प्रक्रिया जोखिम-मुक्त है। ऑपरेशन के बाद व्यक्ति को लंबे समय तक स्वास्थ्य निगरानी की जरूरत हो सकती है। खासकर तब समस्या बढ़ सकती है जब ऑपरेशन के बाद पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, पोषण और नियमित जांच उपलब्ध न हो।
यही इस कहानी का सबसे गंभीर पहलू है। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए अंगदान करता है और अगर कोई व्यक्ति भूख, कर्ज या परिवार को बचाने की मजबूरी में अपना अंग बेचता है, तो दोनों परिस्थितियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के अनुसार, आर्थिक असुरक्षा और कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर अंग निकालना मानव तस्करी का हिस्सा बन सकता है। UNODC ने विशेष रूप से बताया है कि किडनी अंग-निकासी से जुड़ी तस्करी में सबसे अधिक प्रभावित अंगों में शामिल है और ऐसे मामलों में पीड़ितों को लंबे समय तक शारीरिक तथा मानसिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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अफगानिस्तान के संबंध में UNODC के कानूनी रिकॉर्ड में भी मानव तस्करी और अंग निकालने को शोषण के रूप में शामिल किया गया है। कानून में अंगों या ऊतकों को हटाने से जुड़े अपराधों के लिए दंड का प्रावधान दर्ज है।
गरीबी कम हुए बिना समस्या खत्म करना मुश्किल
“वन किडनी विलेज” की कहानी को केवल एक अजीबोगरीब घटना मानना इस संकट की असली वजह को नजरअंदाज करना होगा। जब किसी परिवार के सामने भोजन, इलाज और कर्ज चुकाने के लिए कोई व्यवहारिक विकल्प नहीं बचता, तब शरीर का अंग भी आर्थिक संसाधन की तरह देखा जाने लगता है।
यही कारण है कि इस समस्या का समाधान केवल अस्पतालों की निगरानी या अंगों की अवैध खरीद-बिक्री रोकने तक सीमित नहीं हो सकता। रोजगार, खाद्य सुरक्षा, सामाजिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और विस्थापित परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा—इन सभी मोर्चों पर सुधार जरूरी है।
हेरात की यह कहानी आज भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि जब आर्थिक संकट बेहद गहरा हो जाता है, तो उसका असर इंसान के शरीर तक पहुंच सकता है। “वन किडनी विलेज” कोई सामान्य गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस स्थिति का प्रतीक है जहां गरीबी ने लोगों के सामने अपनी ही सेहत को आर्थिक विकल्प में बदल देने जैसी मजबूरी खड़ी कर दी।



