भारत इनोवेशन कॉन्क्लेव 2.0 में आठ क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को भारत इनोवेशन अवार्ड
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित भारत इनोवेशन कॉन्क्लेव 2.0-2026 का दो दिवसीय आयोजन 19 सितंबर को संपन्न हुआ। 18 और 19 सितंबर को स्वतंत्रता भवन में आयोजित इस कॉन्क्लेव में स्टार्टअप, उद्योग, अकादमिक जगत और सरकारी तंत्र से जुड़े विशेषज्ञ एक मंच पर आए। आयोजन का फोकस केवल नए विचार दिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें बाजार, उद्योग और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर रहा।
कॉन्क्लेव की खासियत इसकी सेक्टर आधारित संरचना रही। दूसरे दिन मेडिकल टेक्नोलॉजी, सोशल एंटरप्रेन्योरशिप, लीन टेक, एडटेक, एग्रीटेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूरिज्म एंड कल्चर तथा इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एंड साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप पिच और विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। यानी मंच पर किसी एक तरह के तकनीकी कारोबार के बजाय स्वास्थ्य, खेती, शिक्षा, डिजिटल सुरक्षा और संस्कृति तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे नवाचारों को जगह मिली।
इन्हीं आठ क्षेत्रीय ट्रैक्स में चुने गए विजेता स्टार्टअप्स को ‘भारत इनोवेशन अवार्ड’ प्रदान किए गए। इस तरह पुरस्कार केवल किसी प्रस्तुति की सराहना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में समस्या-समाधान आधारित उद्यमिता को पहचान देने का माध्यम बना।
उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच दूरी कम करने पर जोर
कॉन्क्लेव में उद्योग-अकादमिक सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। CII-काशी जोन के चेयरमैन उमंग कुमार साह ने ‘Industry-Academia Collaboration for Innovation-Led Growth’ विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया। वहीं उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से जुड़े सलाहकार रवि शंकर पांडेय ने स्टार्टअप विकास में सरकार और उद्योग के तालमेल पर चर्चा की। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार इन सत्रों का उद्देश्य नवाचार को संस्थागत समर्थन और व्यावसायिक अवसरों से जोड़ना था।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्वविद्यालयों में विकसित तकनीक या शोध अक्सर प्रयोगशाला से आगे नहीं बढ़ पाता। दूसरी तरफ स्टार्टअप को बाजार की समझ, पूंजी, मेंटरशिप, तकनीकी विशेषज्ञता और शुरुआती ग्राहक की जरूरत होती है। ऐसे मंच दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाने का अवसर देते हैं।
एग्रीटेक से साइबर सिक्योरिटी तक व्यापक फोकस
कॉन्क्लेव में एग्रीटेक के लिए अलग पिच सत्र रखा गया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स तथा साइबर सिक्योरिटी के लिए भी विशेषज्ञों के साथ प्रस्तुतियां हुईं। आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक साइबर सिक्योरिटी सत्र का फोकस सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के लिए नवाचार पर रहा।
यह सेक्टर विविधता बताती है कि आज स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल ऐप या डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है। कृषि उत्पादन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल सुरक्षा जैसी वास्तविक अर्थव्यवस्था की जरूरतें भी नए उद्यमों के लिए अवसर पैदा कर रही हैं।
कॉन्क्लेव में स्टार्टअप्स को अपने उत्पाद और विचार प्रदर्शित करने के साथ उद्योग, निवेशकों, शोधकर्ताओं और नीति से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाने का अवसर भी दिया गया। आधिकारिक आयोजन विवरण के अनुसार इसका व्यापक उद्देश्य इनोवेशन, कमर्शियलाइजेशन और टिकाऊ उद्यमिता को गति देना है।
आने वाले समय में ऐसे आयोजनों की सफलता केवल पुरस्कार पाने वाले स्टार्टअप्स की संख्या से नहीं मापी जाएगी। असली असर तब दिखाई देगा जब कॉन्क्लेव में प्रस्तुत विचारों को निवेश, मेंटरशिप, उद्योग साझेदारी और बाजार तक पहुंच मिले। BHU जैसे बड़े विश्वविद्यालय से जुड़े इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म के लिए यही अगली बड़ी चुनौती और अवसर दोनों हैं।



