नीरज चोपड़ा हुए भावुक, बोले- एशियन गेम्स से दूर रहना मुश्किल, अभी मैं ठीक नहीं हूं
नई दिल्ली। एशियन गेम्स शुरू हो चुके हैं, लेकिन इस बार भारतीय एथलेटिक्स का सबसे चर्चित चेहरा नीरज चोपड़ा मैदान पर नहीं, बल्कि बाहर से अपने साथियों का हौसला बढ़ा रहा है। टखने की लिगामेंट चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर हुए नीरज ने अब LinkedIn पर एक भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने माना कि भारत का प्रतिनिधित्व न कर पाना उनके लिए बेहद मुश्किल है और इस समय वह भावनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में नहीं हैं।
नीरज के लिए एशियन गेम्स महज एक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं रहा है। 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता था। पांच साल बाद 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी उन्होंने 88.88 मीटर के प्रदर्शन के साथ अपना खिताब बरकरार रखा। ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के रिकॉर्ड में दोनों उपलब्धियां दर्ज हैं।
इसी वजह से 2026 में उनके लिए तीसरे लगातार एशियन गेम्स गोल्ड की दौड़ से बाहर होना सिर्फ एक प्रतियोगिता छूटना नहीं है। नीरज ने अपने संदेश में याद किया कि 2018 में 20 साल की उम्र में भारत के ध्वजवाहक के रूप में उतरना और फिर पोडियम के शीर्ष पर खड़ा होना उनके करियर के सबसे खास अनुभवों में रहा। इस बार चोट ने उन्हें उसी मंच से दूर कर दिया।
नीरज की चोट अगस्त में सामने आई थी। Lausanne Diamond League में 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट प्रदर्शन करने के बाद ट्रेनिंग के दौरान उनके टखने में लिगामेंट चोट हुई। चिकित्सकों और टीम से चर्चा के बाद उन्होंने 2026 का बाकी सीजन छोड़ने का फैसला किया था। इसका मतलब एशियन गेम्स के साथ डायमंड लीग फाइनल से भी उनकी अनुपस्थिति रही।
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नीरज ने चोट से ज्यादा उसके मानसिक असर और आसपास के लोगों की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि खेल में चोट हमेशा खिलाड़ी के नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन उससे प्रतिक्रिया कैसे देनी है, यह उसके हाथ में रहता है। उनके मुताबिक ऐसे समय में ऐसे लोगों का साथ महत्वपूर्ण होता है जो लगातार चोट, वापसी और प्रदर्शन की चर्चा करने के बजाय सामान्य बातचीत करें।
उन्होंने बताया कि कुछ दोस्त जानते हैं कि वह इस समय अच्छी स्थिति में नहीं हैं, फिर भी फोन पर उनकी चोट के बारे में सवाल नहीं करते। वे सामान्य बातें करते हैं, हंसते हैं और पुरानी यादें साझा करते हैं। नीरज के मुताबिक इससे उन्हें यह याद रहता है कि जीवन केवल अगली प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है।
खेल के नजरिए से देखें तो यह संदेश नीरज के लिए फिलहाल प्रतिस्पर्धा से ज्यादा रिकवरी और मानसिक संतुलन के चरण की ओर इशारा करता है। टखने की लिगामेंट चोट में वापसी का समय चोट की गंभीरता और चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करता है, इसलिए उनकी अगली प्रतिस्पर्धा की तारीख को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
एशियन गेम्स से दूर रहने के बावजूद नीरज ने भारतीय दल के लिए अपना समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि वह नागोया में भारतीय खिलाड़ियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को मिस करेंगे, लेकिन बाहर से उनका समर्थन करते रहेंगे। उनके लिए इस बार एशियन गेम्स की कहानी मैदान पर प्रदर्शन की नहीं, बल्कि एक कठिन दौर से गुजरते हुए वापसी की तैयारी की कहानी बन गई है।



