कोरबा में खाद की उपलब्धता पर सवाल
कोरबा। खरीफ सीजन में फसल की शुरुआती जरूरतों के बीच कोरबा में रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता एक बार फिर चर्चा में है। जिला पंचायत की सामान्य सभा में कृषि विभाग की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के लिए तय लक्ष्य की तुलना में NPK और DAP का भंडारण अपेक्षित स्तर से कम बताया गया है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर किसानों की समय पर पोषक तत्व उपलब्ध कराने की क्षमता पर पड़ सकता है।
बताए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में खरीफ 2026 के लिए 1,500 मीट्रिक टन NPK का लक्ष्य रखा गया था, जबकि करीब 877 मीट्रिक टन किसानों तक पहुंचने की जानकारी है। इसी तरह DAP के लिए 3,500 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 2,084 मीट्रिक टन भंडारण और करीब 1,951 मीट्रिक टन वितरण बताया गया है। इन आंकड़ों की ताजा आधिकारिक तालिका सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण इन्हें जिला स्तर पर प्रस्तुत स्थिति के तौर पर देखना उचित होगा।
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खाद की कमी का मतलब सिर्फ बोरी कम होना नहीं
किसानों के लिए समस्या केवल इतनी नहीं होती कि किसी दुकान या समिति में खाद उपलब्ध है या नहीं। असली सवाल यह है कि फसल की जरूरत के सही समय पर सही पोषक तत्व मिल पा रहे हैं या नहीं।
DAP और NPK मुख्य रूप से फसल को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं। खासकर शुरुआती विकास अवस्था में फास्फोरस जड़ विकास और पौधे की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर फसल में DAP ही अनिवार्य है। मिट्टी की स्थिति, फसल, पहले से उपलब्ध पोषक तत्व और कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर वैकल्पिक उर्वरक संयोजन भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ शासन के कृषि संबंधी निर्देशों में भी किसानों को DAP के विकल्प के रूप में SSP, TSP और NPK जैसे मिश्रित उर्वरकों के उपयोग तथा मृदा और फसल के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रबंधन की सलाह दी गई है।
प्रशासन पहले से कर रहा है निगरानी
कोरबा प्रशासन ने खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही उर्वरक की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाई थी। मई में जिला प्रशासन ने सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के साथ बैठक कर निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने, स्टॉक में पारदर्शिता रखने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
जुलाई में कलेक्टर ने सहकारी समिति का निरीक्षण कर खाद-बीज की उपलब्धता की जानकारी भी ली थी। इससे स्पष्ट है कि खाद आपूर्ति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी चल रही है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी है समय पर उपलब्धता
अगर किसी क्षेत्र में मांग बढ़ने के समय DAP या NPK की आपूर्ति कमजोर पड़ती है, तो किसानों को निजी बाजार का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। छोटे और सीमांत किसानों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर, जरूरत से ज्यादा उर्वरक खरीदना या अनुशंसा से अधिक मात्रा में इस्तेमाल करना भी समाधान नहीं है। कृषि विभाग ने किसानों को अनावश्यक खरीद से बचने और फसल तथा रकबे के अनुसार अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरक लेने की सलाह दी है।
अब कोरबा में महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जिला स्तर पर बताए गए भंडारण आंकड़े वर्तमान स्थिति में कितने बदले हैं और आने वाले दिनों में मांग के मुकाबले कितनी अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचेगी। यदि आपूर्ति समय पर बढ़ती है तो स्थिति संभाली जा सकती है। लेकिन खरीफ की महत्वपूर्ण अवस्था में स्थानीय स्तर पर लगातार कमी रहती है, तो किसानों की लागत और फसल प्रबंधन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।



