सक्ती के स्कूल में 5वीं की छात्रा की शिकायत, शिक्षक पर अनुचित स्पर्श का आरोप; जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
सक्ती। जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5वीं की छात्रा की ओर से शिक्षक पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आ गया है। छात्रा ने शिकायत में दावा किया है कि कॉपी दिखाने के दौरान शिक्षक ने उसे गलत तरीके से छुआ। उसने यह भी आरोप लगाया कि पढ़ाने के लिए कहने पर बच्चों को डांट दिया जाता है और शिक्षक स्कूल के समय में मोबाइल का इस्तेमाल करते रहते हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल मामले को शिकायत और आरोप के स्तर पर ही देखा जा रहा है। शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित शिक्षक के खिलाफ क्या कार्रवाई बनती है।
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बच्ची की शिकायत ने उठाए सुरक्षा से जुड़े सवाल
छोटी बच्ची की ओर से लगाए गए ऐसे आरोपों को केवल अनुशासन या पढ़ाई से जुड़ी शिकायत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्कूल में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षक और संस्था दोनों की होती है। इसलिए किसी भी बच्चे द्वारा अनुचित स्पर्श या असहज व्यवहार की शिकायत सामने आने पर संवेदनशील और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
छात्रा के अनुसार, वह शिक्षक के पास कॉपी जांच कराने जाती थी और इसी दौरान कथित रूप से अनुचित तरीके से छुआ गया। उसने यह भी कहा कि शिक्षक बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाने पर ध्यान नहीं देते। इन दावों की पुष्टि जांच में संबंधित विद्यार्थियों, स्कूल स्टाफ और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर की जानी होगी।
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रसोइया ने भी पढ़ाई को लेकर लगाए आरोप
स्कूल में काम करने वाली रसोइया चंद्राबाई चौहान ने भी शिक्षक के कामकाज को लेकर शिकायतें होने की बात कही है। उनके अनुसार, बच्चे शिक्षक से पढ़ाने के लिए कहते हैं तो उन्हें डांट दिए जाने की बात बताते हैं। उन्होंने शिक्षक के स्कूल समय में मोबाइल इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया है।
रसोइया ने शिक्षक और स्कूल में काम करने वाली एक अन्य महिला कर्मचारी के साथ बैठने को लेकर भी बच्चों द्वारा बातें बताए जाने का दावा किया है। हालांकि, इस हिस्से से जुड़े आरोपों को भी जांच के बाद ही तथ्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
पुराने स्कूल को लेकर भी ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि संबंधित शिक्षक पहले डोमनपुर के शासकीय प्राथमिक स्कूल में पदस्थ थे और वहां भी उनके व्यवहार को लेकर शिकायतें हुई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान मामले की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी जांच के रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी। किसी पुराने स्थान पर शिकायत होना अपने आप में वर्तमान आरोप को साबित नहीं करता।
शिक्षा विभाग की जांच अब महत्वपूर्ण
जिला शिक्षा अधिकारी कुमुदिनी द्विवेदी के अनुसार, बच्चों से अभद्रता की शिकायत मिली है और मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्रा की शिकायत के समर्थन में क्या तथ्य सामने आते हैं, स्कूल के अन्य बच्चों और कर्मचारियों के बयान क्या हैं तथा संबंधित शिक्षक के आचरण और स्कूल में उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कोई पूर्व आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।
इस मामले में सबसे जरूरी है कि बच्ची की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसकी सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जाए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी घोषित न किया जाए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो तथ्य भी स्पष्ट रूप से सामने आने चाहिए।



