यमन में हूतियों की बढ़ती ताकत
लंदन/सना। यमन के हूती आंदोलन को लंबे समय तक एक स्थानीय पहाड़ी मिलिशिया के तौर पर देखा जाता था, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में यह समूह ऐसी सैन्य और राजनीतिक शक्ति में बदल गया है, जिसका असर अब यमन की सीमाओं से बहुत आगे तक दिखाई देता है। सितंबर 2026 में पश्चिमी तट पर हूती बढ़त और बाब अल-मंदब के आसपास उनकी सैन्य मौजूदगी ने इस बदलाव को फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता के केंद्र में ला दिया है। संयुक्त राष्ट्र के 15 सितंबर के बयान के मुताबिक हूती सेनाएं बाब अल-मंदब की दिशा में आगे बढ़ीं और दक्षिणी लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जे की खबरें सामने आईं।
रॉयटर्स की 17 सितंबर की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार हूतियों ने दक्षिणी तिहामा क्षेत्र में तेज बढ़त बनाते हुए मोखा बंदरगाह और उसके बाद लाल सागर के तटीय इलाकों तथा द्वीपों पर नियंत्रण हासिल किया, जिससे बाब अल-मंदब के पूरे तट पर उनकी सैन्य पहुंच बढ़ गई।
स्थानीय विद्रोह से क्षेत्रीय शक्ति तक का सफर
हूतियों की जड़ें 1990 के दशक के आखिर में उत्तरी यमन के जायद़ी शिया धार्मिक पुनरुत्थान आंदोलन में थीं। 2011 के अरब स्प्रिंग के दौरान यमन की केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई तो हूतियों ने अपना प्रभाव बढ़ाया। 2014 में उन्होंने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व में सैन्य हस्तक्षेप हुआ और यमन लंबे गृहयुद्ध में फंस गया। 2022 में संघर्षविराम के बाद लड़ाई की तीव्रता कम हुई, लेकिन राजनीतिक समाधान स्थायी नहीं बन सका।
यही लंबा युद्ध हूतियों के सैन्य संगठन को बदलने वाला दौर भी बना। स्थानीय लड़ाकों के साथ मिसाइल, ड्रोन, समुद्री हमले और आधुनिक संचार तकनीक के इस्तेमाल ने उन्हें पारंपरिक गुरिल्ला ताकत से कहीं अधिक सक्षम बनाया।
असली ताकत मिसाइल और ड्रोन क्षमता
आज हूती खतरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी दूर तक हमला करने की क्षमता है। रॉयटर्स के अनुसार उनके बैलिस्टिक मिसाइल इजरायल तक, करीब 1,800 किलोमीटर की दूरी पर, पहुंच चुके हैं। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस समूह की क्षमता को वैश्विक स्तर पर उजागर किया है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी IMO भी लाल सागर में जहाजों पर लगातार हमलों को गंभीर सुरक्षा चुनौती मानता है। संगठन के मुताबिक इन हमलों से नाविकों, जहाजों और वैश्विक सप्लाई चेन की सुरक्षा प्रभावित होती है। अगस्त 2026 में अल-मोखा के पास एक मालवाहक जहाज पर हमले में कई नाविकों की मौत की पुष्टि भी IMO ने की थी।
हथियार कहां से आते हैं?
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की रिपोर्टों में हूतियों तक हथियार और सैन्य सामग्री पहुंचने के लिए समुद्री और जमीनी तस्करी के रास्तों की जानकारी दी गई है। जब्त सामग्री में ड्रोन से जुड़े उपकरण, इंजन और मिसाइल के हिस्से शामिल रहे हैं।
IISS के 2025 आकलन के अनुसार हूतियों ने स्थानीय स्तर पर कुछ ड्रोन और कम दूरी की मिसाइल तकनीक विकसित की है, लेकिन अधिक उन्नत मिसाइल और क्रूज मिसाइल क्षमताओं के लिए उनकी ईरान पर निर्भरता बनी हुई है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए हूतियों को हथियार देने के आरोपों से इनकार किया है।
बाब अल-मंदब क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बाब अल-मंदब दुनिया की महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक है। IMO इसे यूरोप और एशिया के बीच रणनीतिक व्यापार मार्ग का हिस्सा बताता है। यहां अस्थिरता बढ़ने पर जहाजों की सुरक्षा, बीमा लागत, यात्रा मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
यमन के भीतर भी इसका मानवीय असर गहरा है। सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र और IOM ने पश्चिमी तट पर संघर्ष के कारण 85,818 लोगों के विस्थापित होने की सूचना दी थी।
इसलिए हूतियों का बढ़ता प्रभाव सिर्फ एक सैन्य कहानी नहीं है। यह यमन के गृहयुद्ध, क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन, वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा—चारों को एक साथ प्रभावित करने वाला संकट है। आने वाले दिनों में बाब अल-मंदब के आसपास नियंत्रण और समुद्री यातायात की स्थिति यह तय करेगी कि मौजूदा escalation सीमित रहती है या पूरे क्षेत्र में एक और बड़ा संघर्ष खोलती है।



