दुर्ग फाइनेंस फ्रॉड में दो और गिरफ्तार
दुर्ग। कर्ज और ईएमआई का लालच देकर लोगों को फाइनेंस के जाल में फंसाने वाले एक कथित नेटवर्क के खिलाफ पद्मनाभपुर पुलिस की जांच आगे बढ़ी है। पुलिस ने इस मामले में दो और आरोपियों मिहिर रंजन रॉय (25) और शेखर देशमुख (27) को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। इस कार्रवाई के साथ मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या पांच हो गई है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम और पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अलग-अलग फाइनेंस कंपनियों से मोबाइल, एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदे जाते थे। सामान फाइनेंस होने के बाद उसे उस व्यक्ति तक पहुंचाने के बजाय सेकंड हैंड बाजार में बेचने का आरोप है। दूसरी ओर, फाइनेंस की किस्तें संबंधित व्यक्ति के नाम पर बनी रहती थीं। यानी जिस व्यक्ति ने सामान इस्तेमाल तक नहीं किया, उसके सामने ईएमआई चुकाने की जिम्मेदारी आ जाती थी।
‘कम EMI’ और CIBIL स्कोर के नाम पर बनाया जाता था भरोसा
पुलिस जांच से जुड़े पुराने मामलों में सामने आया है कि लोगों को आसान कमाई, कमीशन और CIBIL स्कोर सुधारने जैसे फायदे बताए गए थे। अगस्त में दर्ज एक शिकायत में भी आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता के दस्तावेजों के आधार पर उसके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया गया और बाद में ईएमआई का बोझ उसी पर आ गया। उस प्रकरण में ऋषभ शर्मा, शेखर देशमुख और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ BNS की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
यही तरीका इस मामले को सामान्य उधारी विवाद से अलग बनाता है। फाइनेंस कंपनी के रिकॉर्ड में ग्राहक वही व्यक्ति रहता है जिसके दस्तावेज इस्तेमाल हुए, जबकि सामान और उससे होने वाला कथित लाभ किसी दूसरे के पास चला जाता है। इससे पीड़ित के सामने आर्थिक नुकसान के साथ क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित होने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
जांच में पहले ही तीन गिरफ्तारियां हो चुकी थीं
मामले में पुलिस ने पहले ऋषभ शर्मा, दीपेश जोशी और दुर्गेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। बाद की विवेचना में मिले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मिहिर रंजन रॉय और शेखर देशमुख की भूमिका सामने आने की बात पुलिस ने कही है। नए आरोपियों से सैमसंग मोबाइल, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
ऋषभ शर्मा ने 24 जुलाई 2026 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। बाद में पुलिस पूछताछ के दौरान बैंक पासबुक, चेकबुक और मोबाइल खरीद से जुड़े दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अब सामान और पैसों की पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस
जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर किन लोगों के नाम पर कितने फाइनेंस हुए, सामान किन दुकानों या कंपनियों से निकला, बाद में उसे किसे बेचा गया और उससे जुड़े पैसों का प्रवाह कहां तक गया। पुलिस ने भी कहा है कि अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले से एक सीधी सावधानी भी सामने आती है—सिर्फ CIBIL स्कोर बढ़ाने, आसान कमीशन या कम ईएमआई के लालच में अपना आधार, पैन, बैंक विवरण या OTP किसी दूसरे को देना जोखिम भरा हो सकता है। दस्तावेजों के दुरुपयोग से बनी फाइनेंस देनदारी बाद में उसी व्यक्ति के नाम पर रह सकती है, जिसके कागजात इस्तेमाल हुए थे। दुर्ग पुलिस ने भी नागरिकों से ऐसे वित्तीय लेनदेन में अपने दस्तावेज और बैंक संबंधी जानकारी दूसरे लोगों को उपलब्ध न कराने की अपील की है।
मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।



