NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
नई दिल्ली। NEET परीक्षा में बार-बार सामने आई सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अब केवल कागजी दावों पर निर्भर रहने के बजाय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के सिस्टम को जमीन पर जांचने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने 18 सितंबर 2026 की सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों न्यायाधीश NTA के नए अपग्रेड किए गए कार्यालय का दौरा करना चाहेंगे और यह देखेंगे कि वहां बनाई गई व्यवस्था वास्तव में काम कर रही है या नहीं।
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि NEET-UG देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर की सुरक्षा चूक लाखों छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य को प्रभावित कर सकती है। NTA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 2026 में 3 मई की मूल परीक्षा और 21 जून की पुनर्परीक्षा के लिए अलग-अलग परीक्षा व्यवस्थाएं दर्ज की गईं।
अदालत की नजर अब ‘स्थायी सिस्टम’ पर
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ संकेत दिया कि केवल तत्काल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। पीठ ने स्थायी ढांचे, स्थायी कर्मचारियों और स्थायी कार्यक्षेत्र की जरूरत पर जोर दिया। अदालत के अनुसार बहुत अधिक कर्मचारियों को दूसरे विभागों से deputation पर रखने के बजाय संस्थागत विशेषज्ञता NTA के भीतर विकसित होनी चाहिए।
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि परीक्षा सुरक्षा केवल प्रश्नपत्र छपने और परीक्षा केंद्र पहुंचने तक सीमित नहीं रहती। प्रश्न तैयार करने, डेटा सुरक्षित रखने, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, परिवहन, परीक्षा केंद्र पर वितरण, CCTV निगरानी और परीक्षा के बाद उत्तर रिकॉर्ड की सुरक्षा—पूरी श्रृंखला में कई स्तर होते हैं।
NTA की अपनी आधिकारिक वेबसाइट भी परीक्षा संचालन में तकनीक, साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं को महत्वपूर्ण बताती है। उसके मौजूदा टेंडर रिकॉर्ड में NEET के लिए CCTV, फेस ऑथेंटिकेशन, frisking और परीक्षा निगरानी से जुड़े प्रावधान भी दर्ज हैं।
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Nandan Nilekani पैनल से भी मांगी प्रगति रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि Nandan Nilekani की अध्यक्षता वाली High-Powered Task Force ने परीक्षा सुधारों पर व्यापक विचार-विमर्श किया है और उसकी पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। अदालत ने DoPT के संबंधित Joint Secretary से अब तक की प्रगति पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
यह पैनल केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में गठित किया था। आधिकारिक PIB के मुताबिक इसका दायरा सिर्फ NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा, डिजाइन, संचालन, तकनीक, बुनियादी ढांचे और governance में व्यापक सुधार सुझाना है।
सिर्फ नया कार्यालय बनाने से समस्या हल नहीं होगी
सुनवाई में केंद्र की ओर से बताया गया कि NTA के लिए नया और upgraded system तैयार किया गया है, हालांकि मानव संसाधन का इंतजाम अभी पूरी तरह नहीं हुआ है। यही वह बिंदु है जिस पर अदालत का जोर दिखाई दिया—इमारत या तकनीक से ज्यादा महत्वपूर्ण उसे चलाने वाली स्थायी विशेषज्ञ टीम है।
इसका प्रभाव आने वाले वर्षों की प्रवेश परीक्षाओं पर पड़ सकता है। NTA ने पहले ही अदालत को बताया था कि NEET-UG को 2027 से Computer-Based Test (CBT) प्रणाली में ले जाने की योजना है। इसका मतलब है कि भविष्य की परीक्षा सुरक्षा में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा की भूमिका और बढ़ेगी।
छात्रों के लिए असली सवाल भरोसे का है
NEET जैसी परीक्षा में तकनीकी सुधार का अंतिम लक्ष्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं है। छात्रों को यह भरोसा चाहिए कि देश के हर हिस्से में परीक्षा समान सुरक्षा मानकों के तहत आयोजित होगी और उनकी मेहनत किसी प्रशासनिक चूक से प्रभावित नहीं होगी।
अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और Nilekani समिति की रिपोर्ट के बाद अगली नजर इस पर रहेगी कि सुझावों को स्थायी संस्थागत व्यवस्था में कितनी जल्दी बदला जाता है। अदालत का NTA परिसर का संभावित निरीक्षण इसी बात की परीक्षा होगा कि कागज पर तैयार सुधार वास्तव में जमीन पर कितने प्रभावी हैं।



