TMC के दोनों गुटों को मिला नया नाम-निशान
नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक लड़ाई अब चुनावी पहचान के नए दौर में पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह तय कर दिए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम के साथ ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह मिला है। वहीं अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ और ‘Envelope’ चिन्ह आवंटित किया गया है। भारतीय एक्सप्रेस और अन्य ताजा रिपोर्टों ने आयोग के आदेश के आधार पर इन आवंटनों की पुष्टि की है।
यह फैसला फिलहाल चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों पक्ष पहले से खुद को मूल All India Trinamool Congress (AITC) के प्रतिनिधि के रूप में पेश कर रहे थे। 17 सितंबर के अंतरिम आदेश में आयोग ने दोनों पक्षों को मूल पार्टी का नाम और उसका आरक्षित ‘Flowers and Grass’ चिन्ह इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग ने कहा था कि दोनों गुट पार्टी पर दावा कर रहे हैं और इस विवाद का विस्तृत निर्धारण Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत किया जाना बाकी है।
नाम बदल गया, लेकिन मूल विवाद अभी खत्म नहीं
शुक्रवार का आवंटन यह तय नहीं करता कि भविष्य में मूल TMC की संगठनात्मक पहचान किस गुट के पास रहेगी। यह फिलहाल आगामी चुनावों के लिए अंतरिम चुनावी व्यवस्था है। आयोग ने दोनों पक्षों को वैकल्पिक नाम और मुक्त चुनाव चिन्हों की प्राथमिकता देने को कहा था, जिसके बाद उपलब्ध विकल्पों में से नाम और प्रतीक आवंटित किए गए।
अरूप राय पक्ष की ओर से तीन नामों—Nationalist Trinamool Congress, Democratic Trinamool Congress और West Bengal Trinamool—को विकल्प के रूप में दिया गया था। चिन्हों में ब्लैकबोर्ड, लिफाफा और मशाल शामिल थे। दूसरी तरफ ममता गुट ने अपने नाम में “Mamata” और “Trinamool Congress” से जुड़े विकल्प दिए थे और खेल से जुड़े चिन्हों को प्राथमिकता दी थी। अंततः आयोग ने ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और दूसरे पक्ष को लिफाफा चिन्ह दिया।
उपचुनावों ने बढ़ाई जल्दबाजी
इस फैसले की तत्काल जरूरत नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के कारण बनी। दोनों सीटों पर अलग-अलग गुटों के समर्थन वाले उम्मीदवारों ने TMC प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था और Form-B भी दोनों पक्षों की ओर से जारी किए गए थे। आयोग ने माना कि ऐसी स्थिति में एक ही नाम और चिन्ह के इस्तेमाल से चुनावी प्रक्रिया में भ्रम पैदा हो सकता है। उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
मामले की जड़ संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर जून में उभरे मतभेदों में है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी समूह ने 22 जून को नई National Working Committee गठित करने का दावा किया और अरूप राय को उसका चेयरपर्सन चुना। इस पक्ष ने TMC के संगठनात्मक ढांचे और पार्टी संविधान को लेकर सवाल उठाए। ममता गुट ने इस प्रक्रिया की वैधता पर आपत्ति जताई और कहा कि निर्धारित बहुस्तरीय संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
इसलिए मौजूदा तस्वीर को सिर्फ “नई पार्टी बन गई” के रूप में देखना सही नहीं होगा। फिलहाल दोनों पक्ष अलग चुनावी पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे, जबकि मूल TMC के नाम और ‘Flowers and Grass’ चिन्ह पर अंतिम अधिकार का सवाल अभी चुनाव आयोग के सामने लंबित है।
आने वाले उपचुनाव इस विवाद के राजनीतिक और संगठनात्मक असर का पहला बड़ा परीक्षण होंगे। इसके बाद आयोग की विस्तृत कार्यवाही यह तय करने में अहम होगी कि पार्टी के संविधान, संगठनात्मक समर्थन और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर अंतिम तस्वीर क्या बनती है।



