तेल अवीव की सुरक्षा पर बड़ा सवाल: बैन के बावजूद पहुंचे ओमानी पायलट, फ्लाईदुबई घटना ने खोली चौंकाने वाली खामी
तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में कथित तौर पर को-पायलट द्वारा विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश के बाद मामला केवल कॉकपिट तक सीमित नहीं रह गया है। इस घटना ने इजरायल की विमानन सुरक्षा व्यवस्था में विदेशी फ्लाइट क्रू की जांच और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल और ओमान के बीच राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद हाल के वर्षों में कई ओमानी पायलट विदेशी एयरलाइंस के साथ तेल अवीव पहुंच चुके हैं। ऐसे में अब जांच का केंद्र यह बन गया है कि सुरक्षा नियम मौजूद होने के बावजूद उनकी प्रभावी निगरानी कैसे नहीं हो सकी।
एक घटना ने पूरी व्यवस्था की कमजोर कड़ी सामने ला दी
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय पायलट स्मित मच्छर के साथ ओमान के हमम अल-हम्मामी को को-पायलट बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, को-पायलट ने विमान को क्रैश कराने का प्रयास किया, जिसे भारतीय पायलट ने विफल कर दिया। विमान में सवार 174 यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद गंभीर है।
लेकिन घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल विमान के भीतर हुई कथित कोशिश से आगे निकल गया—इतनी संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद संबंधित पायलट इजरायल आने वाली उड़ान के क्रू का हिस्सा कैसे बना?
यही सवाल अब इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों और विमानन प्रशासन के सामने है।
नियम था, लेकिन निगरानी किस स्तर पर हुई?
चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के अब्राहम समझौतों के बाद इजरायल ने उन देशों के पायलटों को लेकर प्रतिबंधात्मक व्यवस्था बनाई थी जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिन बेट ने फ्लाईदुबई के पायलटों की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की अलग से जांच करने के बजाय एयरलाइन को ऐसे देशों के पायलटों का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए थे।
यहीं सुरक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कमजोरी सामने आती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के नजरिए से किसी एयरलाइन को नियमों का पालन करने के लिए कहना और उसके अनुपालन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। संवेदनशील हवाई अड्डों पर केवल एयरलाइन के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था छोड़ना जोखिम पैदा कर सकता है, खासकर तब जब क्रू सदस्य अलग-अलग देशों से आते हों।
12 से ज्यादा ओमानी पायलटों का मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में 12 से ज्यादा ओमानी पायलट विदेशी एयरलाइंस के साथ इजरायल पहुंच चुके हैं। यदि यह जानकारी आधिकारिक जांच में पुष्ट होती है, तो सवाल केवल एक पायलट की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा।
तब जांच को यह पता लगाना होगा कि—
- विदेशी एयरलाइंस के क्रू की राष्ट्रीयता की जांच किस स्तर पर होती है?
- सुरक्षा मंजूरी देने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है?
- एयरलाइंस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी का स्वतंत्र सत्यापन होता है या नहीं?
- पुराने क्रू सदस्यों की सुरक्षा समीक्षा कितनी नियमित है?
- नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होती है?
इन सवालों के जवाब भविष्य की विमानन सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब परिवहन मंत्रालय भी जांच के दायरे में
घटना के बाद इजरायली अधिकारियों ने विदेशी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू के प्रवेश की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा शुरू करने की बात सामने आई है। जांच में परिवहन मंत्रालय और उसके Center for Aviation Security Operations की भूमिका भी देखी जाएगी।
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि किसी अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सुरक्षा केवल विमान और पायलट तक सीमित नहीं होती। क्रू की पहचान, सुरक्षा मंजूरी, प्रवेश अनुमति और एयरलाइन की जवाबदेही—ये सभी एक ही सुरक्षा श्रृंखला की अलग-अलग कड़ियां हैं।
यदि इनमें से किसी एक स्तर पर जानकारी का आदान-प्रदान कमजोर हो, तो बाकी सुरक्षा परतें भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं।
आगे क्या बदल सकता है?
इस घटना के बाद विदेशी एयरलाइंस के क्रू के लिए सुरक्षा जांच और अधिक सख्त किए जाने की संभावना पर चर्चा बढ़ सकती है। खासकर ऐसे देशों के नागरिकों के मामले में जिनके इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
संभावित रूप से सुरक्षा व्यवस्था में नियमित बैकग्राउंड वेरिफिकेशन, क्रू की राष्ट्रीयता का स्वतंत्र सत्यापन और एयरलाइंस से मिलने वाली जानकारी की दोबारा जांच जैसे उपायों पर जोर बढ़ सकता है।
हालांकि, किसी सुरक्षा नियम की प्रभावशीलता केवल उसकी कठोरता से तय नहीं होती। वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नियम कागज पर मौजूद होने के साथ-साथ हर उड़ान पर लगातार लागू भी हों।
विमानन सुरक्षा के लिए बड़ा सबक
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि आधुनिक विमानन सुरक्षा कई संस्थाओं के बीच समन्वय पर निर्भर करती है। एयरलाइन, विमानन प्राधिकरण, सुरक्षा एजेंसियां और सीमा नियंत्रण व्यवस्था—सभी को एक-दूसरे से मिली जानकारी पर भरोसा करने के साथ उसकी पुष्टि भी करनी होती है।
फ्लाईदुबई की घटना में कथित कॉकपिट संकट को भारतीय पायलट द्वारा रोक दिया जाना एक अलग सुरक्षा पहलू है, लेकिन उसके बाद सामने आया क्रू-स्क्रीनिंग का सवाल व्यवस्था की दूसरी परत की ओर इशारा करता है।
अब जांच का वास्तविक महत्व इस बात में होगा कि क्या इससे केवल एक घटना की जिम्मेदारी तय होगी या विदेशी फ्लाइट क्रू की सुरक्षा मंजूरी और निगरानी की पूरी प्रक्रिया में स्थायी सुधार किए जाएंगे।



