Andhra Pradesh Pharma Blast: खौफनाक हादसे में 4 की मौत, 12 घायल; श्री सिटी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में शनिवार की सुबह एक औद्योगिक हादसे ने श्री सिटी के तेज औद्योगिक विकास के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। श्री सिटी स्थित फार्मास्युटिकल यूनिट Till Healthcare में बॉयलर फटने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 12 लोग घायल हुए हैं।
हादसे की भयावहता का अंदाजा घटनास्थल की तस्वीरों से लगाया जा सकता है, जहां विस्फोट के बाद कंक्रीट के टुकड़े और मलबा बिखरा दिखाई दिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दो कर्मचारियों की मौत मौके पर हुई, जबकि दो अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
शिफ्ट बदलने के वक्त हुआ विस्फोट, बढ़ी चिंता
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, घटना सुबह उस समय हुई जब दिन की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी परिसर में प्रवेश कर रहे थे और रात की शिफ्ट पूरी करने वाले कर्मचारी बाहर निकल रहे थे।
अगर शिफ्ट बदलने का यह समय आधिकारिक जांच में पुष्ट होता है, तो यह पहलू हादसे के प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण होगा। औद्योगिक संयंत्रों में शिफ्ट परिवर्तन के दौरान कर्मचारियों की आवाजाही अधिक रहती है और किसी भी आपात स्थिति में निकासी व्यवस्था की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बॉयलर में विस्फोट किस तकनीकी कारण से हुआ।
चार मौतों ने बढ़ाई हादसे की गंभीरता
राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में चार लोगों की जान गई है। मृतकों में चेरिवी गांव, सत्यवेडु मंडल के 45 वर्षीय चिन्ना मस्तान और तमिलनाडु के मदरापक्कम निवासी 45 वर्षीय रमेश की पहचान हुई है। दो अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी थी।
घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सरकार की ओर से अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
श्री सिटी में हादसा क्यों बड़ी चिंता है?
श्री सिटी राष्ट्रीय राजमार्ग-16 के पास विकसित एक बड़ा मल्टी-प्रोडक्ट स्पेशल इकोनॉमिक जोन है, जहां सैकड़ों कंपनियां औद्योगिक गतिविधियां संचालित करती हैं। यहां फार्मास्युटिकल समेत कई क्षेत्रों की विनिर्माण इकाइयां मौजूद हैं।
यही वजह है कि एक यूनिट में हुआ बॉयलर विस्फोट केवल उस कंपनी तक सीमित सुरक्षा सवाल नहीं उठाता। यह पूरे औद्योगिक क्षेत्र में बॉयलर, प्रेशर सिस्टम, आपातकालीन निकासी और अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की जरूरत की ओर ध्यान खींचता है।
फार्मा उद्योग में तापमान, दबाव और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता है। ऐसे संयंत्रों में उपकरणों की नियमित जांच और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस केवल उत्पादन बनाए रखने का विषय नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा का मूल हिस्सा है।
जांच से सामने आएगा असली कारण
फिलहाल विस्फोट की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। तकनीकी जांच में बॉयलर की स्थिति, ऑपरेटिंग प्रेशर, रखरखाव रिकॉर्ड, सेफ्टी वाल्व, निरीक्षण रिपोर्ट, ऑपरेशनल प्रोटोकॉल और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे कई पहलुओं की जांच की जा सकती है।
जांच का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे यह पता चल सकता है कि हादसा किसी तकनीकी खराबी, रखरखाव की कमी, संचालन संबंधी समस्या या किसी अन्य कारण से जुड़ा था।
हाल का एक और बॉयलर हादसा भी बना चिंता का विषय
आंध्र प्रदेश में औद्योगिक विस्फोट का यह मामला अलग-थलग घटना नहीं है। इस वर्ष जून में विशाखापत्तनम के पास परवाड़ा इंडस्ट्रियल पार्क में बॉयलर विस्फोट में दो श्रमिकों की मौत हुई थी। उस मामले में कचरे से पाइरोलिसिस ऑयल बनाने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट की जानकारी सामने आई थी।
दो अलग-अलग औद्योगिक घटनाओं को सीधे एक जैसा मानना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों संयंत्रों की तकनीकी प्रक्रियाएं और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। फिर भी, लगातार होने वाली ऐसी घटनाएं औद्योगिक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम प्रबंधन की प्रभावशीलता पर व्यापक सवाल जरूर खड़े करती हैं।
अब सबसे अहम सवाल सुरक्षा ऑडिट का
इस हादसे के बाद केवल यह पता लगाना पर्याप्त नहीं होगा कि बॉयलर क्यों फटा। उससे आगे यह देखना भी जरूरी होगा कि संयंत्र में संभावित खतरे की पहचान कितनी नियमितता से की जाती थी और क्या सुरक्षा संबंधी कमियों को समय रहते दूर किया गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च जोखिम वाले औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन केवल हादसे के बाद नहीं बल्कि लगातार होना चाहिए। उपकरणों की जांच, प्रशिक्षित ऑपरेटर, आपातकालीन ड्रिल, स्पष्ट निकासी मार्ग और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट ऐसी व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस हादसे की जांच से निकलने वाली रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि उसका असर सिर्फ एक कंपनी की जवाबदेही तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि किसी प्रणालीगत कमी की पहचान होती है, तो उसे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सुधार के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल प्राथमिकता घायलों के इलाज, मृतकों के परिवारों को सहायता और घटना की निष्पक्ष तकनीकी जांच है। हादसे का वास्तविक कारण आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



