नोबेल शांति पुरस्कार 2026: चौंकाने वाला ट्विस्ट, ISS से ट्रंप-कार्नी तक बड़े नामों पर नजर
दुनिया जब युद्ध, व्यापारिक तनाव और कमजोर पड़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दौर से गुजर रही है, तब इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार सिर्फ किसी एक व्यक्ति या संगठन के सम्मान का सवाल नहीं रह गया है। चर्चा इस बात की भी है कि शांति की बदलती परिभाषा को समिति किस तरह देखती है—क्या शांति का मतलब युद्ध रोकना है, अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा करना है या फिर अलग-अलग देशों को किसी साझा उद्देश्य पर साथ बनाए रखना?
इसी वजह से इस बार संभावित नामों में International Space Station (ISS) का सामने आना खासा दिलचस्प है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, 2026 के पुरस्कार के लिए 287 उम्मीदवार हैं, जिनमें 208 व्यक्ति और 79 संगठन शामिल हैं। विजेता की घोषणा 9 अक्टूबर को ओस्लो में की जाएगी। हालांकि, नोबेल समिति व्यक्तिगत नामांकन की पुष्टि नहीं करती और संभावित विजेताओं को लेकर लगने वाले अनुमान स्वभावतः अटकलों पर आधारित हैं।
अंतरिक्ष स्टेशन क्यों बना चर्चा का केंद्र?
ISS को संभावित दावेदार के तौर पर देखना पहली नजर में असामान्य लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक व्यापक विचार है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन लंबे समय से अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा से जुड़े अंतरिक्ष सहयोग का उदाहरण रहा है।
विशेष रूप से मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच ISS का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि पृथ्वी पर प्रतिद्वंद्वी देशों के संबंध खराब होने के बावजूद अंतरिक्ष में साझा वैज्ञानिक परियोजनाओं का ढांचा लंबे समय तक कायम रहा है। PRIO से जुड़े शोधकर्ता हाकोन गेरलोव ने AP से बातचीत में इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को संभावित कारणों में गिना।
यहां पुरस्कार का संभावित संदेश किसी एक अंतरिक्ष उपलब्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है—जब राष्ट्रों के बीच मतभेद बढ़ें, तब भी साझा संस्थाएं सहयोग का रास्ता खुला रख सकती हैं।
ट्रंप और कार्नी की चर्चा ने बढ़ाया राजनीतिक आयाम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी इस चर्चा में है। ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर करते रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने उनके नामांकन की बात कही है। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के नामांकन की जानकारी अपने आप में समिति की पसंद या अंतिम सूची का संकेत नहीं होती।
वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है, खासकर अमेरिका के साथ व्यापार और व्यापक वैश्विक व्यवस्था को लेकर कनाडा के रुख के कारण। AP ने उनके बढ़े अंतरराष्ट्रीय प्रोफाइल और ट्रंप के साथ मतभेदों को इस साल की चर्चा का हिस्सा बताया है।
इसलिए इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसे पुरस्कार मिल सकता है। बड़ा सवाल यह है कि समिति मौजूदा वैश्विक तनाव में सहयोग, संस्थागत व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय नियमों में से किस पहलू को सबसे अधिक महत्व देती है।
अदालतों से लेकर युद्धग्रस्त इलाकों तक कई विकल्प
संभावित नामों की सूची केवल राष्ट्राध्यक्षों तक सीमित नहीं है। AP की रिपोर्ट में यूक्रेन में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं, सूडान के Emergency Response Rooms, Save the Children और Committee to Protect Journalists जैसे संगठनों का भी उल्लेख है।
इसी तरह International Court of Justice और International Criminal Court भी चर्चा में हैं। इन संस्थाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में समर्थन और आलोचना दोनों मौजूद हैं, विशेष रूप से युद्ध अपराधों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मामलों को लेकर।
यह विविधता एक महत्वपूर्ण बात दिखाती है—शांति पुरस्कार की संभावित तस्वीर इस साल किसी एक पारंपरिक श्रेणी में सीमित नहीं है। इसमें मानवीय राहत, पत्रकारिता की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों के बीच सहयोग, सभी अलग-अलग रास्तों से शांति की अवधारणा से जुड़े हुए हैं।
इस साल का वैश्विक माहौल क्यों महत्वपूर्ण है?
2026 का पुरस्कार ऐसे समय में सामने आ रहा है जब सूडान, यूक्रेन, यमन और पश्चिम एशिया समेत कई क्षेत्रों में गंभीर संघर्ष जारी हैं। AP से बातचीत में संघर्ष-अध्ययन विशेषज्ञ शॉन डेविस ने मौजूदा परिस्थितियों को वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव से जोड़ा है।
ऐसे माहौल में किसी पुरस्कार का प्रतीकात्मक महत्व भी बढ़ जाता है। यदि सम्मान किसी मानवीय संगठन को मिलता है, तो संदेश जमीनी स्तर पर राहत और नागरिकों की सुरक्षा की ओर जा सकता है। यदि किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था को चुना जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं की भूमिका पर जोर दिखाई दे सकता है। और यदि ISS जैसे सहयोग के प्रतीक को चुना जाता है, तो संदेश यह हो सकता है कि राजनीतिक संघर्षों के बावजूद साझा उद्देश्य संभव हैं।
हालांकि, इन संभावित अर्थों को समिति के निर्णय के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। नोबेल समिति का अंतिम निर्णय ही वास्तविक संकेत देगा।
9 अक्टूबर को साफ होगी तस्वीर
नोबेल पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। नोबेल की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नामांकन प्रक्रिया के बाद फरवरी से अक्टूबर की शुरुआत तक संबंधित संस्थाएं उम्मीदवारों के मूल्यांकन पर काम करती हैं और अक्टूबर में विजेताओं की घोषणा की जाती है।
इसलिए फिलहाल ISS, ट्रंप, कार्नी, अंतरराष्ट्रीय अदालतों या मानवीय संगठनों में से किसी को संभावित विजेता बताना सिर्फ अनुमान होगा। 9 अक्टूबर की घोषणा ही बताएगी कि समिति ने मौजूदा दौर की सबसे बड़ी चुनौती को किस नजरिए से देखा।



