CAFE-III के तहत 1 अप्रैल 2027 से नए मानक लागू होंगे; वाहन कंपनियों की पूरी फ्लीट की औसत ईंधन खपत और CO₂ प्रदर्शन पर नजर रहेगी, इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड वाहनों को मिलेगा सुपर-क्रेडिट
नई दिल्ली। वाहनों से होने वाले ईंधन खर्च और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भारत सरकार ने पैसेंजर वाहनों के लिए अगले चरण के Corporate Average Fuel Economy यानी CAFE-III मानकों की व्यवस्था की है। यह नया चरण 1 अप्रैल 2027 से शुरू होकर 31 मार्च 2032 तक लागू रहेगा। नियमों का उद्देश्य वाहन निर्माताओं की पूरी फ्लीट की औसत ईंधन दक्षता में सुधार करना और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है।
2027 से फ्लीट की औसत ईंधन खपत पर सख्ती
CAFE-III में वाहन निर्माता कंपनियों के लिए हर वित्त वर्ष के अनुसार औसत ईंधन खपत का मानक निर्धारित किया गया है। आधिकारिक प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को 1 अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले प्रत्येक वित्त वर्ष में अपनी वास्तविक वार्षिक औसत ईंधन खपत को निर्धारित मानक के बराबर या उससे कम रखना होगा।
नए नियमों में वाहनों के औसत अनलोडेड वजन (unladen mass) को भी गणना में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि कंपनी की फ्लीट के वजन और वाहनों के CO₂ प्रदर्शन के आधार पर अनुपालन की गणना की जाएगी।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को सुपर-क्रेडिट
कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए CAFE-III में Volume Derogation Factor यानी सुपर-क्रेडिट की व्यवस्था रखी गई है। आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) और रेंज-एक्सटेंडर हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन के लिए यह फैक्टर 3.0 है।
वहीं प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए फैक्टर 2.5, सामान्य स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए 2.0 और फ्लेक्स-फ्यूल एथेनॉल वाहनों के लिए 1.5 निर्धारित है। इसका इस्तेमाल कंपनी की कॉरपोरेट औसत CO₂ प्रदर्शन की गणना में किया जा सकता है।
कंपनियों को क्रेडिट और अनुपालन व्यवस्था का सामना करना होगा
CAFE-III व्यवस्था में वाहन निर्माताओं के लिए अनुपालन तंत्र भी निर्धारित किया गया है। नियमों के तहत कंपनियों को अपने वार्षिक औसत ईंधन खपत मानक को पूरा करना होगा। निर्धारित मानक का पालन न करने पर ऊर्जा संरक्षण कानून और संबंधित अनुपालन प्रावधानों के तहत कार्रवाई की व्यवस्था है।
इसके अलावा अधिकतम तीन वाहन निर्माता कंपनियां निर्धारित शर्तों के तहत एक पूल बनाकर औसत ईंधन खपत मानक पूरा कर सकती हैं। आधिकारिक दस्तावेज़ में छोटे उत्पादन वाली कुछ कंपनियों के लिए विशेष छूट का भी प्रावधान किया गया है।
कार खरीदारों पर क्या हो सकता है असर?
CAFE-III सीधे तौर पर आम वाहन मालिकों के लिए कोई नया टैक्स या अलग प्रदूषण शुल्क घोषित नहीं करता। इसका मुख्य फोकस वाहन निर्माता कंपनियों की फ्लीट की औसत ईंधन दक्षता और CO₂ प्रदर्शन पर है।
इन मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियां अधिक ईंधन-कुशल इंजन, हाइब्रिड तकनीक, इलेक्ट्रिफिकेशन और अन्य CO₂ कम करने वाली तकनीकों पर जोर दे सकती हैं। आधिकारिक व्यवस्था में विभिन्न CO₂-घटाने वाली तकनीकों के योगदान को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गणना में शामिल करने का प्रावधान है।
पाठकों के लिए जरूरी बात
CAFE-III का मतलब यह नहीं है कि 1 अप्रैल 2027 से हर पेट्रोल या डीजल कार पर अलग से प्रदूषण रोकने का कोई नया नियम सीधे लागू हो जाएगा। इसका प्रमुख अनुपालन वाहन निर्माता कंपनियों की पूरी फ्लीट के औसत प्रदर्शन से जुड़ा है। इसलिए इसका असर मुख्य रूप से कंपनियों की वाहन तकनीक, मॉडल मिश्रण और ईंधन दक्षता रणनीति पर पड़ेगा।



