कोरबा में जमीन सौदे का बड़ा फर्जीवाड़ा: 7 लाख लेकर दूसरे को बेच दी जमीन, आरोपी गिरफ्तार
कोरबा के रजगामार इलाके में जमीन के सौदे से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस के अनुसार एक व्यक्ति ने मकान, जमीन और मलबा बेचने का समझौता कर पहले 7 लाख रुपये लिए और बाद में उसी संपत्ति को किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ बेच दिया। शिकायत के बाद लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने रतनपुर बस स्टैंड से गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई के साथ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पहले से लंबित तीन स्थायी वारंटों में भी कार्रवाई की है। ये वारंट चेक बाउंस से जुड़े मामलों में अदालत की ओर से जारी किए गए थे।
सात लाख देने के बाद भी न जमीन मिली, न रजिस्ट्री
पुलिस के मुताबिक रजगामार निवासी सिकंदर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 22 नवंबर 2023 को हनुमान प्रसाद यादव और उसकी पत्नी अनीता यादव के साथ मकान, जमीन और वहां मौजूद मलबा खरीदने का इकरारनामा हुआ था।
समझौते के तहत सिकंदर ने 7 लाख रुपये का भुगतान किया। शिकायत के अनुसार इसके बाद न तो संपत्ति की रजिस्ट्री सिकंदर के नाम कराई गई और न ही तय किया गया मलबा उसे सौंपा गया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोप है कि इकरारनामा होने के बावजूद उसी जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया।
यही वह बिंदु है जहां किसी सामान्य संपत्ति विवाद और कथित धोखाधड़ी के बीच कानूनी जांच का सवाल खड़ा होता है। मामले में आरोपी के खिलाफ दर्ज धाराओं और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
फरारी के बाद बस स्टैंड पर गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद रजगामार चौकी पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार आरोपी घटना के बाद से फरार था और उसकी तलाश के लिए स्थानीय सूचना तंत्र के साथ अन्य सुरागों पर भी काम किया जा रहा था।
इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि हनुमान प्रसाद उत्तर प्रदेश से लौट रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने रतनपुर बस स्टैंड पर निगरानी बढ़ाई। जैसे ही आरोपी बस से उतरा, पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुराने चेक बाउंस मामलों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत चेक बाउंस से जुड़े तीन मामले लंबित थे। इन मामलों में अदालत की ओर से 2022 और 2024 में स्थायी वारंट जारी किए गए थे।
इसका अर्थ यह नहीं है कि पुराने मामलों के आधार पर मौजूदा जमीन विवाद में आरोप स्वतः साबित हो जाते हैं। हालांकि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन लंबित वारंटों में भी कानूनी कार्रवाई की है।
अब आरोपी के खिलाफ अलग-अलग मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अपने-अपने तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
जमीन खरीदने वालों के लिए इस मामले में बड़ा सबक
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम संपत्ति खरीदारों से जुड़ा है। जमीन या मकान खरीदते समय केवल विक्रेता की बात या इकरारनामा देखकर बड़ी रकम देना जोखिम पैदा कर सकता है।
किसी भी संपत्ति सौदे में भुगतान से पहले टाइटल की जांच, पिछले स्वामित्व का रिकॉर्ड, जमीन पर किसी अन्य दावे की स्थिति, बंधक या विवाद की जानकारी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
इकरारनामा भविष्य के सौदे की शर्तों को दर्ज कर सकता है, लेकिन खरीदार के लिए यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि जिस व्यक्ति से सौदा हो रहा है, उसके पास संपत्ति बेचने का वैध अधिकार है और संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को पहले से हस्तांतरित नहीं की गई है।
बड़ी रकम के भुगतान में बैंकिंग रिकॉर्ड और लिखित दस्तावेज भी आगे चलकर विवाद की स्थिति में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
आगे की जांच में क्या होगा अहम?
अब पुलिस के सामने लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, इकरारनामा, भुगतान का रिकॉर्ड और संपत्ति के दूसरे खरीदार से संबंधित जानकारी की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कथित दूसरे सौदे की तारीख क्या थी और वह पहले हुए इकरारनामे के बाद किस परिस्थितियों में हुआ।
मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।
रजगामार का यह मामला बताता है कि संपत्ति खरीदने में जल्दबाजी से किया गया भुगतान भविष्य में लंबी कानूनी लड़ाई का कारण बन सकता है। खरीदार के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि दस्तावेजों की स्वतंत्र कानूनी जांच और संपत्ति के स्वामित्व की पुष्टि के बाद ही बड़ी रकम का लेन-देन किया जाए।



