कमर दर्द की शुरुआत सिर्फ उम्र से नहीं, आपकी बैठने-उठने की आदतों से भी हो सकती है
कमर दर्द अब केवल उम्र बढ़ने से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहना, मोबाइल देखते समय गर्दन झुकाए रखना, गलत तरीके से वजन उठाना और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी रोजमर्रा की आदतें रीढ़ और कमर की मांसपेशियों पर लगातार दबाव डाल सकती हैं। यही वजह है कि ऑफिस कर्मचारियों से लेकर छात्रों और घर से काम करने वाले लोगों तक में पीठ और कमर से जुड़ी शिकायतें देखने को मिल रही हैं।
दरअसल, कमर की सेहत पर किसी एक आदत का असर नहीं पड़ता। समस्या तब बढ़ती है जब गलत पोस्चर, लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक निष्क्रियता एक साथ दिनचर्या का हिस्सा बन जाते हैं।
गलत पोस्चर से रीढ़ पर क्यों बढ़ता है दबाव?
रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देने के साथ-साथ चलने-फिरने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब व्यक्ति लंबे समय तक झुककर या टेढ़े होकर बैठता है, तो शरीर का भार समान रूप से वितरित नहीं हो पाता। इससे कमर और आसपास की मांसपेशियों को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।
शुरुआत में इसका असर हल्के दर्द, थकान या अकड़न के रूप में दिखाई दे सकता है। लगातार यही स्थिति बनी रहने पर परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि हर कमर दर्द का कारण खराब पोस्चर ही हो, यह जरूरी नहीं है। चोट, मांसपेशियों में खिंचाव, उम्र से जुड़े बदलाव और अन्य स्वास्थ्य कारण भी इसके पीछे हो सकते हैं।
कमर दर्द बढ़ाने वाली रोजमर्रा की आदतें
1. कुर्सी पर झुककर बैठना
कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते समय आगे की ओर झुकना, कुर्सी पर एक तरफ झुककर बैठना या पीठ को पर्याप्त सहारा न देना कमर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
विशेष रूप से लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से मांसपेशियों में जकड़न और थकान महसूस हो सकती है।
2. बिना सही तकनीक के वजन उठाना
फर्श से कोई भारी सामान उठाते समय केवल कमर से झुकना जोखिम बढ़ा सकता है। अचानक वजन उठाना या वजन उठाते हुए शरीर को मोड़ना भी कमर की मांसपेशियों पर जोर डाल सकता है।
भारी वस्तु उठाते समय शरीर को स्थिर रखना, घुटनों को मोड़कर नीचे जाना और वजन को शरीर के करीब रखना अपेक्षाकृत सुरक्षित तकनीक मानी जाती है।
3. घंटों लगातार बैठे रहना
वर्क फ्रॉम होम और डेस्क जॉब ने इस समस्या को और प्रासंगिक बना दिया है। कई लोग कई घंटे तक कुर्सी से उठे बिना काम करते रहते हैं।
यहां समस्या केवल कुर्सी की नहीं है, बल्कि लगातार निष्क्रिय रहने की आदत भी महत्वपूर्ण है। बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलना, स्थिति बदलना और हल्की गतिविधि करना शरीर को लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने से बचा सकता है।
4. मोबाइल और लैपटॉप का गलत इस्तेमाल
मोबाइल को लगातार नीचे रखकर देखने से गर्दन आगे की ओर झुकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है।
लैपटॉप को बहुत नीचे रखकर काम करना भी शरीर को आगे झुकने के लिए मजबूर कर सकता है। इसलिए स्क्रीन को यथासंभव आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखना और पीठ को सहारा देना उपयोगी हो सकता है।
5. कमजोर कोर मसल्स और कम शारीरिक गतिविधि
पेट, कमर और शरीर के आसपास की मांसपेशियां शरीर को स्थिर रखने में मदद करती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि न होने पर मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन प्रभावित हो सकता है।
यही कारण है कि केवल बैठने की मुद्रा सुधारना पर्याप्त नहीं है। दिनचर्या में पैदल चलना, हल्की स्ट्रेचिंग और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम शामिल करना भी जरूरी है।
6. बढ़ा हुआ वजन
अधिक शरीर का वजन कमर और रीढ़ पर पड़ने वाले यांत्रिक दबाव को प्रभावित कर सकता है। यदि इसके साथ शारीरिक गतिविधि भी कम हो, तो कमर से जुड़ी परेशानी की संभावना और बढ़ सकती है।
इसलिए वजन प्रबंधन को केवल दिखावट से जोड़कर देखने के बजाय शरीर की गतिशीलता और मांसपेशियों की सेहत के संदर्भ में भी समझना चाहिए।
7. सोने की गलत स्थिति
सुबह उठते ही कमर में दर्द या अकड़न महसूस होने के पीछे सोने की मुद्रा भी एक कारण हो सकती है। हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का गद्दा या सोने की स्थिति सही हो, ऐसा नहीं है। आरामदायक स्थिति वह होनी चाहिए जिसमें शरीर को पर्याप्त सहारा मिले और दर्द या दबाव महसूस न हो।
कमर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
कमर दर्द से बचाव के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत हमेशा नहीं होती। रोजमर्रा की कुछ आदतों में सुधार किया जा सकता है।
- लंबे समय तक लगातार न बैठें और समय-समय पर उठकर चलें।
- बैठते समय पीठ को उचित सहारा दें और पैरों को आरामदायक स्थिति में रखें।
- कंप्यूटर स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें जिससे लगातार नीचे झुकना न पड़े।
- मोबाइल इस्तेमाल करते समय गर्दन को लंबे समय तक नीचे झुकाए रखने से बचें।
- भारी सामान उठाते समय कमर की बजाय पैरों और घुटनों की मदद लें।
- अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलना और हल्की शारीरिक गतिविधि करें।
- लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बजाय दिनभर में छोटी-छोटी गतिविधियां बढ़ाएं।
- पर्याप्त नींद लें और ऐसी सोने की स्थिति अपनाएं जिसमें कमर पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
- किसी व्यायाम या स्ट्रेचिंग से दर्द बढ़ता है तो उसे जबरदस्ती जारी न रखें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
सामान्य मांसपेशियों का दर्द कई बार आराम और दिनचर्या में सुधार से कम हो सकता है, लेकिन लगातार या बढ़ते हुए कमर दर्द को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
यदि दर्द कई दिनों तक बना रहे, बार-बार लौटे, पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, चोट के बाद तेज दर्द हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। कुछ विशेष लक्षणों में तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है।
कमर दर्द से बचाव का सबसे बड़ा उपाय क्या है?
कमर की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात केवल सही कुर्सी या गद्दा खरीदना नहीं, बल्कि पूरे दिन शरीर को सक्रिय रखना और लंबे समय तक गलत मुद्रा में रहने से बचना है।



