रायगढ़ में कबाड़ के अवैध नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, 130 टन स्क्रैप और 6 वाहन जब्त; 1.21 करोड़ की संपत्ति
रायगढ़। औद्योगिक क्षेत्र रायगढ़ में स्क्रैप के संदिग्ध परिवहन को लेकर पूंजीपथरा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर जांच और नाकेबंदी के दौरान छह वाहनों से करीब 129.840 टन लोहे, टीन और अन्य स्क्रैप जब्त किया है। पुलिस के अनुसार जब्त स्क्रैप की कीमत लगभग 53.60 लाख रुपये, जबकि छह वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 68 लाख रुपये है। इस तरह कुल जब्ती का मूल्य लगभग 1.21 करोड़ रुपये बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए वाहनों के चालकों से स्क्रैप के स्रोत, परिवहन और संबंधित प्लांट में प्रवेश से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे। आवश्यक दस्तावेज संतोषजनक रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद पुलिस ने सामग्री और वाहनों को जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू की। हालांकि, स्क्रैप चोरी का है या किसी अन्य अवैध तरीके से हासिल किया गया, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
एक सूचना से शुरू हुई कार्रवाई, फिर सामने आया बड़ा पैमाना
पूंजीपथरा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक भारी वाहन में स्क्रैप लेकर औद्योगिक क्षेत्र के एक प्लांट की ओर ले जाया जा रहा है। पुलिस ने रायगढ़ रोड स्थित स्केनिया प्लांट के पास वाहन को रोककर जांच की।
तलाशी में टीन, लोहे के टुकड़े, राड और वाहनों के पार्ट्स सहित करीब 23.990 टन स्क्रैप मिला। इसकी अनुमानित कीमत करीब 8.49 लाख रुपये बताई गई है। वाहन की कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई।
पुलिस के अनुसार चालक स्क्रैप को सरगुजा क्षेत्र से लाए जाने की बात कह रहा था, लेकिन परिवहन और सामग्री से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। संबंधित प्लांट से भी प्रवेश आदेश और अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात पुलिस ने कही है।
इसके बाद पुलिस ने स्क्रैप और वाहन को जब्त कर चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की।
नाकेबंदी में एक के बाद एक पांच वाहन पकड़े गए
पहली कार्रवाई के बाद पूंजीपथरा-तमनार चौक क्षेत्र में भी पुलिस ने नाकेबंदी की। पुलिस को सूचना मिली थी कि कई वाहनों में बड़ी मात्रा में स्क्रैप लेकर औद्योगिक इकाइयों की ओर आवाजाही हो रही है।
जांच के दौरान पांच और वाहनों को रोका गया। इनमें अलग-अलग मात्रा में टीन, लोहे के टुकड़े, राड, वाहन पार्ट्स और अन्य स्क्रैप मिला। पुलिस के मुताबिक इन पांच वाहनों से कुल 105.850 टन स्क्रैप बरामद हुआ।
इनमें एक वाहन से करीब 18.350 टन, दूसरे से 24.830 टन, तीसरे से 13.040 टन, चौथे से 25.510 टन और पांचवें वाहन से करीब 24.120 टन स्क्रैप जब्त किया गया।
इन पांच कार्रवाइयों को पहली जब्ती के साथ जोड़ने पर कुल मात्रा करीब 129.840 टन तक पहुंचती है।
सरगुजा से ओडिशा तक की आवाजाही की भी होगी जांच
इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण पहलू स्क्रैप की स्रोत से लेकर अंतिम खपत तक की पूरी श्रृंखला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जब्त सामग्री कहां से आई, किसके स्वामित्व में थी, किन माध्यमों से इसका परिवहन किया गया और इसे किस औद्योगिक इकाई में खपाया जाना था।
पकड़े गए वाहनों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा से जुड़े वाहन एवं चालक भी सामने आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह सकती। हालांकि, अलग-अलग राज्यों से वाहन या चालक जुड़े होने मात्र से किसी संगठित नेटवर्क की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए पुलिस को सामग्री के दस्तावेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और परिवहन से जुड़े साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई
रायगढ़ जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में स्क्रैप केवल कबाड़ नहीं है। लोहा, टीन और औद्योगिक धातु दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण सामग्री हैं। इसलिए इनके अवैध कारोबार का असर चोरी की घटनाओं से आगे जाकर औद्योगिक सप्लाई चेन और वैध व्यापार पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञ दृष्टि से देखें तो ऐसे मामलों में केवल वाहन पकड़ना पर्याप्त नहीं होता। यदि किसी अवैध सप्लाई चेन की आशंका हो, तो यह भी देखना जरूरी होता है कि सामग्री किस स्रोत से निकली, किसने खरीदी, किसने परिवहन कराया और किस अंतिम खरीदार तक पहुंचाई जानी थी।
इसी वजह से जब्त सामग्री के दस्तावेज और औद्योगिक इकाइयों के रिकॉर्ड की जांच आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आगे की जांच से खुलेगा असली मामला
पूंजीपथरा पुलिस ने छह वाहनों और करीब 130 टन स्क्रैप को अपने कब्जे में लेकर जांच आगे बढ़ा दी है। अब जांच का अगला चरण जब्त सामग्री के स्रोत और उसके संभावित खरीदारों तक पहुंचने का होगा।
यदि जांच में चोरी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि से संबंध के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। वहीं यदि सामग्री के वैध स्रोत से जुड़े दस्तावेज बाद में सामने आते हैं, तो मामले की कानूनी स्थिति उसी आधार पर तय होगी।



