रायपुर में 25 करोड़ की धमकी से खुली नई कड़ी? शोएब ढेबर हिरासत में, पुलिस खंगाल रही कॉल और होटल कनेक्शन
रायपुर। लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले ने रायपुर पुलिस की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेता अजीत कुकरेजा के पिता आनंद कुकरेजा को मिली धमकी की पड़ताल के दौरान पुलिस ने शोएब ढेबर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि धमकी देने वालों और शोएब के बीच कोई संपर्क था या नहीं और इस पूरे मामले में वास्तव में कितने लोग शामिल हैं।
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि जांच के दौरान कथित तौर पर एक ऐसे युवक का नाम सामने आया, जिससे धमकी भरे फोन करवाए जाने की बात कही जा रही है। पुलिस अब मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट कनेक्शन और पैसों के लेन-देन जैसे डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ी समझने की कोशिश कर रही है।
लॉरेंस बिश्नोई का नाम इस्तेमाल हुआ या कोई वास्तविक कनेक्शन?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा था या केवल डर पैदा करने और रंगदारी वसूलने के लिए चर्चित गैंग का नाम इस्तेमाल किया गया।
ऐसे मामलों में किसी गैंग का नाम फोन पर लिया जाना अपने आप में उस संगठन से वास्तविक संबंध साबित नहीं करता। पुलिस को कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान, उसके संपर्कों, पैसों के लेन-देन और निर्देश देने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों की पुष्टि करनी होगी।
यही जांच इस पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है।
होटल और Wi-Fi कनेक्शन की जांच क्यों महत्वपूर्ण?
पुलिस की जांच में कथित तौर पर हरियाणा के एक युवक का नाम सामने आया है, जिसके जरिए धमकी भरे फोन किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कॉल के लिए होटल के Wi-Fi नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है, तो होटल के डिजिटल रिकॉर्ड इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। पुलिस संबंधित समय के Wi-Fi लॉग, CCTV फुटेज, होटल में आने-जाने वालों का रिकॉर्ड और मोबाइल डिवाइस से जुड़े तकनीकी डेटा को आपस में मिलाकर देख सकती है।
जांच का मकसद केवल फोन करने वाले व्यक्ति तक पहुंचना नहीं होगा, बल्कि यह पता लगाना भी होगा कि उसे निर्देश किसने दिए और इसके पीछे आर्थिक लाभ किसे मिलना था।
जांजगीर के युवक से पूछताछ के बाद सामने आया नाम
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जांजगीर-चांपा के एक युवक को पकड़ा था। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि उसने लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर धमकी भरा फोन किया था और इसके बदले उसे करीब पांच हजार रुपये दिए गए।
इसी पूछताछ में शोएब ढेबर का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। हालांकि, किसी आरोपी या संदिग्ध के बारे में पूछताछ में नाम सामने आना अंतिम रूप से अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। इस कड़ी की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से होना जरूरी है।
क्या सात धमकी मामलों के पीछे एक ही नेटवर्क है?
पुलिस अब कथित तौर पर ऐसे करीब सात मामलों की जानकारी भी खंगाल रही है, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को धमकी दिए जाने की बात सामने आई है।
अगर अलग-अलग मामलों में इस्तेमाल किए गए नंबर, इंटरनेट कॉलिंग के तरीके, बैंक लेन-देन, मध्यस्थ और संपर्कों में समानता मिलती है, तो जांच को एक बड़े नेटवर्क की दिशा मिल सकती है। इसके उलट अगर हर मामले में अलग-अलग पैटर्न सामने आते हैं, तो यह भी संभव है कि एक ही नाम का इस्तेमाल अलग-अलग लोगों ने किया हो।
इसलिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल फॉरेंसिक जांच इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
50 करोड़ की धमकी वाले मामले से भी जुड़ रही जांच
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर को कथित तौर पर 50 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाला धमकी भरा कॉल आने का मामला भी सामने आया था। उस मामले में कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गैंग से जुड़ा बताया था और पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की थी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि दोनों मामलों में इस्तेमाल की गई भाषा, फोनिंग पैटर्न, तकनीकी माध्यम या संदिग्धों के संपर्कों में कोई समानता है या नहीं।
फिलहाल दोनों मामलों को सीधे तौर पर एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानना जल्दबाजी होगी। इसके लिए पुलिस को ठोस डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य जुटाने होंगे।
पुलिस के सामने अब सबसे अहम सवाल
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं—धमकी देने वाले फोन किस डिवाइस या इंटरनेट कनेक्शन से किए गए, कॉल करने वाले को निर्देश कौन देता था, कथित भुगतान किसे हुआ, होटल और अन्य स्थानों पर संदिग्धों की मुलाकात हुई या नहीं और अलग-अलग धमकी मामलों में कोई साझा संपर्क मौजूद है या नहीं।



