छत्तीसगढ़ में बड़ा स्वास्थ्य ऑडिट: 100 से ज्यादा अस्पतालों में आयुष्मान इलाज के रिकॉर्ड की कड़ी जांच
रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मरीजों को दिए जा रहे इलाज और उसके बदले अस्पतालों की ओर से किए गए दावों की व्यापक जांच शुरू हुई है। स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमें रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पहुंचीं और मरीजों के उपचार से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की।
एक साथ 100 से ज्यादा अस्पतालों में शुरू हुई यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आयुष्मान जैसी योजनाओं में सरकार मरीज से सीधे भुगतान लेने के बजाय निर्धारित पैकेज और नियमों के आधार पर अस्पतालों को भुगतान करती है। ऐसे में इलाज का वास्तविक रिकॉर्ड, मरीज की पात्रता और अस्पताल द्वारा प्रस्तुत क्लेम—तीनों का आपस में मेल खाना जरूरी है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आधार पर किसी अस्पताल को दोषी घोषित नहीं किया है। कथित फर्जी इलाज या गलत क्लेम से जुड़ी शिकायतों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
जांच सिर्फ फाइलों की नहीं, इलाज के रिकॉर्ड की है
अस्पतालों में पहुंची टीमों का फोकस उन दस्तावेजों पर है जिनके आधार पर स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज और भुगतान का दावा किया गया।
जांच में मरीज की जानकारी, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, किए गए उपचार, योजना के तहत दर्ज क्लेम और उससे जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि कागज पर दर्ज उपचार और वास्तविक चिकित्सा रिकॉर्ड के बीच कोई असंगति तो नहीं है।
ऐसी जांच में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होता कि अस्पताल के पास बिल मौजूद है। महत्वपूर्ण यह भी है कि जिस मरीज के नाम पर उपचार दर्ज है, उसके मेडिकल रिकॉर्ड में संबंधित बीमारी, जांच, भर्ती और उपचार की जानकारी भी मौजूद हो।
यही क्रॉस-वेरिफिकेशन सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में वित्तीय निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिकायतों ने क्यों बढ़ाई विभाग की चिंता?
जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में योजनाओं के तहत कथित अनियमितता और फर्जी इलाज से संबंधित शिकायतें हैं। लेकिन शिकायत और दोष सिद्ध होने के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।
किसी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां गलत क्लेम किया गया है। जांच का उद्देश्य ही यह पता लगाना है कि शिकायतों में कितनी वास्तविकता है।
इसलिए आने वाले समय में विभाग की जांच रिपोर्ट ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। अगर रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलती हैं तो संबंधित मामलों में नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है। वहीं, रिकॉर्ड सही पाए जाने पर अस्पतालों को भी जांच के बाद स्पष्टता मिलेगी।
आयुष्मान योजना में रिकॉर्ड क्यों है सबसे अहम कड़ी?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार के लिए कैशलेस सुविधा मिलती है। इस व्यवस्था में सरकार और मरीज के बीच अस्पताल एक महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है।
यही वजह है कि अस्पताल द्वारा दर्ज की गई जानकारी का महत्व बढ़ जाता है। इलाज हुआ या नहीं, किस मरीज का हुआ, कौन-सी प्रक्रिया की गई और उसके आधार पर कितना क्लेम किया गया—इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड में होने चाहिए।
स्वास्थ्य योजनाओं का पैसा मूल रूप से मरीज तक उपचार के रूप में पहुंचना चाहिए। इसलिए रिकॉर्ड की जांच सिर्फ सरकारी फंड की सुरक्षा का मामला नहीं है; इसका सीधा संबंध मरीज के अधिकार और योजना की विश्वसनीयता से भी है।
पुराने स्मार्ट कार्ड रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का स्वरूप समय के साथ बदला है। राज्य में पहले स्मार्ट कार्ड आधारित स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था और बाद में केंद्र की आयुष्मान व्यवस्था से इसे जोड़ा गया।
ऐसे में पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड की जांच प्रशासन के लिए एक बड़ा डेटा-वेरिफिकेशन अभ्यास भी बन जाती है। अलग-अलग समय की योजनाओं, अस्पतालों और मरीजों के रिकॉर्ड में जानकारी का मिलान करना किसी भी संभावित गड़बड़ी की पहचान में मदद कर सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दायरे में ओडिशा की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना से संबंधित रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। इस पहलू पर भी विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार रहेगा, क्योंकि योजना और उसके प्रशासनिक दायरे की सटीक स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
अगर गड़बड़ी मिलती है तो आगे क्या?
जांच में यदि दस्तावेज और वास्तविक उपचार के बीच गंभीर अंतर सामने आता है, तो मामला केवल अस्पताल के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। संबंधित क्लेम की समीक्षा, भुगतान की जांच और योजना के नियमों के तहत संभावित कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
दूसरी ओर, यदि बड़ी संख्या में रिकॉर्ड सही मिलते हैं, तो यह भी एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष होगा। इससे यह पता चलेगा कि व्यापक जांच के बावजूद कितने अस्पताल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिकॉर्ड बनाए हुए हैं।
यानी इस कार्रवाई का परिणाम केवल “कितने अस्पताल पकड़े गए” से नहीं मापा जाना चाहिए। असली महत्व इस बात का होगा कि कितने रिकॉर्ड सत्यापित हुए, कितने क्लेम में अंतर मिला और उन मामलों में विभाग ने क्या कार्रवाई की।
मरीजों के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने वाले मरीजों के लिए ऐसी जांच का सीधा महत्व है। अगर योजना के तहत दर्ज उपचार का रिकॉर्ड व्यवस्थित और सत्यापित रहता है, तो सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ती है और गलत दावों की गुंजाइश कम होती है।
मरीजों और उनके परिवारों के लिए भी अस्पताल से उपचार से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखना उपयोगी है। भर्ती, डिस्चार्ज, जांच और उपचार से संबंधित रिकॉर्ड भविष्य में किसी विवाद या सत्यापन की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब नजर जांच रिपोर्ट पर
100 से ज्यादा अस्पतालों में एक साथ शुरू हुई कार्रवाई अपने आप में व्यापक है, लेकिन इसका वास्तविक असर जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट यह तय करेगी कि शिकायतों में कितनी सच्चाई थी, किन रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलीं और क्या किसी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत बनती है।



