बेमेतरा में बड़ा पुलिस एक्शन: 13 मामलों के आरोपी की फिर गिरफ्तारी, फर्जी दस्तावेजों की जांच तेज
बेमेतरा। लंबे समय से अलग-अलग इलाकों में पहचान और ठिकाने बदलकर रहने वाले संदिग्ध व्यक्ति पर बेमेतरा पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, मो. मोकसादूल आलम कालू उर्फ मो. मोकसेद अली उर्फ कालू को अवैध रूप से भारत में रहने और कई आपराधिक मामलों में संलिप्तता की जांच के दौरान पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ बेमेतरा, कबीरधाम और राजनांदगांव जिलों में चोरी, नकबजनी, आर्म्स एक्ट और आबकारी कानून से जुड़े करीब 13 मामले दर्ज हैं।
पुलिस की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरोपी को 23 सितंबर को जेल से रिहा होने के कुछ ही दिन बाद फिर पकड़ा गया। दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे 28 सितंबर को रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
2007 में भारत आने का पुलिस का दावा
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर वर्ष 2007 में भारत आया था। इसके बाद ओडिशा के संबलपुर में पहचान से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस का दावा है कि आरोपी के पास भारत में रहने के लिए वैध वीजा और पासपोर्ट नहीं था। दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच इसी कार्रवाई का अहम हिस्सा है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक किसी व्यक्ति की पहचान और निवास स्थिति की पुष्टि नहीं होने पर स्थानीय स्तर पर उसकी गतिविधियों की निगरानी मुश्किल हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला और उन्हें तैयार कराने में मदद करने वाले संभावित नेटवर्क की जांच भी अहम हो जाती है।
फेरी का काम बना पुलिस जांच का अहम बिंदु
बेमेतरा पुलिस के अनुसार, आरोपी कपड़े और बर्तन बेचने के लिए गांवों तथा अलग-अलग मोहल्लों में घूमता था। वह कथित तौर पर किराए के मकानों में रहता और जिस इलाके में ठहरता, वहां चोरी की घटनाओं को अंजाम देने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस ने यह भी बताया कि उसके किराए के ठिकानों पर दूसरे लोग आते-जाते थे। जांच में वर्ष 2019 के दौरान बेमेतरा और कवर्धा इलाके में एक अन्य आरोपी सूमोन खान के साथ मिलकर कई चोरी की घटनाओं में शामिल होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
13 मामलों का रिकॉर्ड, कई बार जा चुका है जेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ बेमेतरा, कबीरधाम और राजनांदगांव के अलग-अलग थानों में लगभग 13 प्रकरण दर्ज हैं। इनमें चोरी और नकबजनी के साथ आर्म्स एक्ट तथा आबकारी अधिनियम से जुड़े मामले भी शामिल बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2019 में बेमेतरा-कवर्धा क्षेत्र और बाद के वर्षों में 2021, 2024 तथा 2026 में राजनांदगांव जिले से जुड़े मामलों में आरोपी जेल जा चुका है।
यही रिकॉर्ड पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में महत्वपूर्ण बना। पुलिस के अनुसार, जेल से निकलने के बाद उसके दोबारा बेमेतरा क्षेत्र में घूमने की सूचना मिली थी। इसके बाद निगरानी और जांच के आधार पर उसे पकड़ा गया।
फर्जी पहचान की जांच क्यों बन रही है बड़ा मुद्दा?
इस मामले का दूसरा पहलू सिर्फ चोरी के मामलों तक सीमित नहीं है। पुलिस की जांच में फर्जी पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आने से यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि ऐसे दस्तावेज कहां और किस माध्यम से तैयार हुए।
बेमेतरा पुलिस ने इससे पहले भी एक अन्य मामले की जांच के दौरान बांग्लादेशी नागरिक होने की पहचान वाले आरोपी तक पहुंचने की जानकारी दी थी। उस मामले में पुलिस ने फर्जी आधार और पैन कार्ड बनाए जाने तथा कई राज्यों में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की जांच की थी।
जांच के दौरान पुलिस द्वारा विभिन्न राज्यों के कई जिलों से संपर्क किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि पुलिस सिर्फ स्थानीय स्तर पर आरोपियों की पहचान तक सीमित रहने के बजाय संभावित अंतरराज्यीय कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है।
मकान मालिकों के लिए पुलिस की अहम अपील
पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद मकान मालिकों से किरायेदारों के दस्तावेजों का सत्यापन करने की अपील की है। किसी बाहरी व्यक्ति को किराए पर मकान देने से पहले पहचान और पते से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने तथा आवश्यक जानकारी स्थानीय थाने को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पुलिस ने संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देने के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-233-1905 भी जारी किया है और सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने की बात कही है।
आगे की जांच में किन बिंदुओं पर रहेगी नजर?
इस मामले में आगे की जांच के दौरान तीन पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं—पहला, भारत में आरोपी की वास्तविक पहचान और प्रवेश से जुड़ी जानकारी; दूसरा, कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया; और तीसरा, अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों के बीच संभावित आपसी संबंध।
यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क या दस्तावेज तैयार कराने वाले अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। वहीं, पहले से दर्ज आपराधिक मामलों में भी पुलिस को प्रत्येक मामले के साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया करनी होगी।



