जयशंकर का बड़ा संदेश: आतंकवाद पर भारत की चिंता समझना होगा, तभी मजबूत होंगे अमेरिका से रिश्ते
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्ते व्यापार, तकनीक, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ संकेत दिया है कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करके इस साझेदारी को पूरी तरह मजबूत नहीं किया जा सकता। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश से आने वाला आतंकवाद भारत की प्रमुख चिंताओं में है और यदि कोई साझेदार इस संवेदनशीलता को पर्याप्त रूप से नहीं समझता, तो उसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
जयशंकर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच संपर्क बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। भारत की चिंता का केंद्र केवल पाकिस्तान के साथ किसी दूसरे देश के संबंध नहीं हैं, बल्कि यह है कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसके सुरक्षा अनुभव और प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय साझेदार किस नजरिए से देखते हैं।
भारत के लिए आतंकवाद सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं
भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौती के रूप में उठाता रहा है। 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने उस कार्रवाई को लक्षित और सीमित सैन्य अभियान बताया था।
यही पृष्ठभूमि भारत की मौजूदा कूटनीतिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली के लिए आतंकवाद पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का अर्थ केवल बयान जारी करना नहीं, बल्कि आतंकी नेटवर्क, उसके ढांचे और उसे समर्थन देने वाले तंत्र के प्रति स्पष्ट रुख भी है।
अमेरिका के साथ रिश्तों में कई परतें
भारत-अमेरिका संबंध अब केवल सुरक्षा साझेदारी तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, टैरिफ, तकनीक, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के मुद्दे भी समानांतर चल रहे हैं। सितंबर 2026 में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा भी इसी प्रक्रिया से जुड़ी है।
ऐसे में जयशंकर का संदेश यह बताता है कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलताओं को भी समान महत्व देना होगा। किसी एक क्षेत्र में सहयोग बढ़ना दूसरे क्षेत्र की असहमति को अपने आप खत्म नहीं करता।
पहलगाम के बाद बदला सुरक्षा नजरिया
पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कार्रवाई और जवाबदेही पर जोर दिया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
इसके बाद भारत का जोर इस बात पर रहा कि आतंकवाद को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क और समर्थन तंत्र के संदर्भ में समझा जाए। यही कारण है कि विदेश नीति के मंचों पर आतंकवाद भारत की बातचीत का लगातार प्रमुख विषय बना हुआ है।
आगे क्या असर पड़ सकता है?
भारत-अमेरिका संबंधों का अगला चरण कई मुद्दों के संतुलन पर निर्भर करेगा। व्यापार वार्ता, टैरिफ, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ पाकिस्तान को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं भी चर्चा का हिस्सा रहेंगी।
जयशंकर ने भी यह संकेत दिया कि भारत रिश्तों को आगे बढ़ाने की अपेक्षा रखता है, लेकिन इसके लिए मौजूदा मतभेदों और संवेदनशील मुद्दों को वास्तविकता के साथ संबोधित करना जरूरी होगा।



