इंदौर में सड़क निर्माण का बड़ा रास्ता साफ: 269 बाधक निर्माण हटेंगे, आरई-2 से ट्रैफिक को मिलेगी राहत
इंदौर। शहर की महत्वपूर्ण आरई-2 सड़क परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन ने बाधक निर्माण हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मूसाखेड़ी और पिपल्याहाना क्षेत्र में सड़क के रास्ते में आने वाले कुल 269 निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन हिस्सों को हटाने के बाद सड़क निर्माण के रुके हुए काम को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
मौके के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रभावित रहवासियों से चर्चा की। प्रशासन के अनुसार, कई लोगों को नगर निगम की मल्टियों में वैकल्पिक आवास आवंटित किए जा चुके हैं। ऐसे परिवारों से स्थानांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है। जिन लोगों का आवंटन अभी पूरा नहीं हुआ है, उन्हें संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन इलाकों में अटका है सड़क का महत्वपूर्ण हिस्सा
आरई-2 परियोजना के लिए चिह्नित बाधक निर्माण तीन प्रमुख हिस्सों में हैं। मूसाखेड़ी के शिव नगर में 115, शिवनंदन नगर में 72 और पिपल्याहाना क्षेत्र में 82 निर्माण सड़क के प्रस्तावित मार्ग को प्रभावित कर रहे हैं।
पिपल्याहाना का हिस्सा पुलिस लाइन क्षेत्र से भी जुड़ा है। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति का जायजा लेकर यह समझने की कोशिश की कि निर्माण हटाने और वैकल्पिक आवास की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरई-2 के कई हिस्सों में निर्माण कार्य पहले ही हो चुका है, लेकिन कुछ स्थानों पर जमीन संबंधी बाधाओं के कारण पूरी सड़क को एक सतत मार्ग के रूप में विकसित करना मुश्किल हो रहा है।
45 मीटर चौड़ी सड़क से बदलेगा कनेक्टिविटी का पैटर्न
आरई-2 का प्रस्तावित मार्ग कनाड़िया रोड स्थित भूरी टेकरी से शुरू होकर स्कीम-140, नेमावर रोड होते हुए नायता मुंडला स्थित आईएसबीटी तक जाता है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा।
इस सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई 45 मीटर है। इसका महत्व केवल एक नई सड़क बनने तक सीमित नहीं है। इंदौर में लगातार बढ़ते वाहन दबाव के बीच वैकल्पिक मार्ग तैयार करना ट्रैफिक प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आरई-2 के पूरा होने से कनाड़िया रोड, पिपल्याहाना, नेमावर रोड, बिचौली हप्सी और बिचौली मर्दाना की कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इसके अलावा बायपास और पूर्वी रिंग रोड पर निर्भरता वाले कुछ यातायात को वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है।
सड़क बनने से सिर्फ दूरी नहीं, ट्रैफिक दबाव भी घट सकता है
शहरी परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े शहर में नई चौड़ी सड़क का प्रभाव तभी अधिक होता है जब वह मौजूदा मार्गों को आपस में प्रभावी तरीके से जोड़ती हो। आरई-2 की उपयोगिता भी इसी कनेक्टिविटी में है।
अगर सड़क का पूरा कॉरिडोर लगातार और बिना बड़े अवरोध के तैयार होता है, तो अलग-अलग इलाकों के बीच यात्रा के लिए लोगों को मौजूदा व्यस्त मार्गों पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे कुछ प्रमुख सड़कों पर पीक ऑवर के दौरान यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक असर सड़क पूरी तरह शुरू होने और वाहन यातायात के नए मार्ग पर स्थानांतरित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास और समयबद्ध काम
269 बाधक निर्माण हटाना केवल सड़क निर्माण का तकनीकी विषय नहीं है। इससे जुड़े परिवारों का पुनर्वास और उन्हें आवंटित वैकल्पिक आवास में स्थानांतरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जिन परिवारों को आवास आवंटित हो चुका है, उनका समय पर स्थानांतरण होने से निर्माण एजेंसियों के लिए काम का मोर्चा खुल सकता है। वहीं जिन मामलों में आवंटन या दस्तावेजी प्रक्रिया बाकी है, उन्हें तेजी से पूरा करना जरूरी होगा।
यही वजह है कि प्रशासन का मौजूदा निरीक्षण केवल जमीन खाली कराने की कार्रवाई नहीं, बल्कि सड़क परियोजना और पुनर्वास प्रक्रिया को एक साथ आगे बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है।
आरई-2 पूरी होने के बाद क्या बदलेगा?
परियोजना पूरी होने पर इंदौर के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों के बीच सड़क संपर्क को मजबूती मिल सकती है। कनाड़िया रोड से लेकर नेमावर रोड और आगे नायता मुंडला तक कनेक्टिविटी का नया विकल्प तैयार होगा।
आईएसबीटी तक पहुंचने वाले यातायात के लिए भी यह मार्ग उपयोगी हो सकता है। भविष्य में शहर का विस्तार नए क्षेत्रों की ओर बढ़ने के साथ ऐसी कनेक्टिविटी का महत्व और बढ़ सकता है।



