छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी राहत: 181.99 करोड़ की दूसरी किस्त से कृषि विकास को मिलेगा नया जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के लिए केंद्र से 181.99 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी होने से कृषि विकास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत 91.20 करोड़ रुपये और कृषोन्नति योजना के तहत 90.79 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इस राशि को महज सरकारी फंड जारी होने की खबर के तौर पर देखने के बजाय छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में निवेश के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है। असली असर इस बात से तय होगा कि धन का इस्तेमाल किन परियोजनाओं में, कितनी तेजी से और किसानों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाता है।
दूसरी किस्त से क्यों बढ़ी उम्मीद?
कृषि योजनाओं में स्वीकृत राशि और जमीन पर हुए काम के बीच सीधा संबंध तभी बनता है, जब राज्यों में परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन और धन का प्रभावी उपयोग हो। केंद्र सरकार भी RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत राज्यों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, खेती की लागत कम करने और कृषि से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में इसका महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी की आजीविका खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। इसलिए कृषि क्षेत्र में किया गया निवेश केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण रोजगार, कृषि आधारित कारोबार और किसानों की बाजार तक पहुंच पर भी असर डाल सकता है।
181.99 करोड़ का इस्तेमाल कहां मायने रखेगा?
RKVY और कृषोन्नति जैसी योजनाओं का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित रखना नहीं है। आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर इनपुट, उत्पादकता बढ़ाने वाले उपाय, कृषि बुनियादी ढांचा और किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्थाएं इसके व्यापक दायरे में आती हैं।
छत्तीसगढ़ में उपलब्ध राशि का प्रभाव तब अधिक दिखाई देगा, जब योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों के आधार पर हो। अलग-अलग क्षेत्रों में सिंचाई, मिट्टी, फसल पैटर्न, कृषि यंत्रीकरण और बाजार की परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में एक समान मॉडल के बजाय क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुसार निवेश करना महत्वपूर्ण होगा।
कृषि मंत्री की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान हुई चर्चा
नई दिल्ली में 28 और 29 सितंबर को रबी अभियान 2026 के तहत कृषि मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित हुआ। इसी दौरान छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इसी क्रम में राज्य के लिए दोनों योजनाओं की दूसरी किस्त जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि राशि का उपयोग कृषि विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में किया जाएगा।
अब चुनौती राशि खर्च करने की नहीं, सही जगह पहुंचाने की
कृषि क्षेत्र में किसी भी बड़े वित्तीय आवंटन की सफलता का अंतिम पैमाना किसानों को मिलने वाला वास्तविक लाभ है। यदि राशि से सिंचाई क्षमता, कृषि यंत्रीकरण, गुणवत्तापूर्ण इनपुट, तकनीकी सहायता, फसल विविधीकरण या बाजार से जुड़ी सुविधाओं में सुधार होता है, तो इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
दूसरी ओर, केवल राशि जारी हो जाने से कृषि आय में तत्काल बदलाव की गारंटी नहीं होती। परियोजनाओं की निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक सही तरीके से पहुंच इसके लिए उतने ही जरूरी हैं।
रबी सीजन से पहले फंडिंग का महत्व
रबी अभियान 2026 के दौरान यह वित्तीय सहायता ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में आगामी कृषि गतिविधियों की तैयारी महत्वपूर्ण है। रबी सीजन में गेहूं, चना, मटर, सरसों जैसी फसलों के साथ सिंचाई, बीज, उर्वरक और कृषि सलाह की जरूरत बढ़ती है।
ऐसे में यदि स्वीकृत राशि से संबंधित परियोजनाओं को समय पर जमीन पर उतारा जाता है, तो इसका फायदा केवल मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर कृषि ढांचा आने वाले वर्षों में भी उत्पादन क्षमता और खेती की दक्षता को प्रभावित कर सकता है।



