गुवाहाटी हत्याकांड में बड़ा मोड़
गुवाहाटी। असम के गुवाहाटी में पत्नी की हत्या के सनसनीखेज मामले ने अब एक और गंभीर मोड़ ले लिया है। आरोपी पति रामानुज गोस्वामी की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मी पर हमला कर चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। गंभीर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी की मौत ने मूल हत्या की जांच के साथ-साथ पुलिस हिरासत में सुरक्षा व्यवस्था और आरोपी की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से घटना का विस्तृत क्रम सामने रखा गया है।
टायर बदलते समय नहीं भागा आरोपी, DCP ने साफ किया घटनाक्रम
गुवाहाटी के DCP (East) तब्बू राम पेगु ने घटना को लेकर सामने आई जानकारी स्पष्ट करते हुए बताया कि आरोपी ने पुलिस वाहन का टायर बदले जाने के दौरान भागने की कोशिश नहीं की थी।
पुलिस के अनुसार, उस समय आरोपी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। बाद में जब पुलिस वाहन नरसिंह कॉलेज के पास पहुंचा, तब उसने अचानक उस कॉन्स्टेबल पर हमला कर दिया जो उसकी हथकड़ी पकड़े हुए था।
पुलिस का आरोप है कि गोस्वामी ने कॉन्स्टेबल को लात मारी। अचानक हुए हमले से पुलिसकर्मी कुछ क्षण के लिए असहाय हो गया। इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस वाहन यानी महिंद्रा बोलेरो का पिछला दरवाजा खोला और चलती गाड़ी से बाहर कूद गया।
सड़क पर गिरने से आई गंभीर चोट
चलती SUV से कूदने के बाद आरोपी सड़क पर गिर पड़ा और उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिसकर्मी उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। उसे गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपी की मौत पुलिस हिरासत से बाहर भागने के दौरान लगी चोटों के बाद हुई बताई जा रही है। इसलिए घटना की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वाहन की गति, सुरक्षा व्यवस्था, आरोपी की निगरानी और भागने की परिस्थितियां वास्तव में क्या थीं।
पत्नी की हत्या के आरोप के कारण मामला पहले से था बेहद गंभीर
रामानुज गोस्वामी पर अपनी पत्नी की हत्या करने और शव के सिर को काटकर फ्रिज में रखने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। इसी आरोप के चलते उसकी गिरफ्तारी के बाद मामला पहले ही बेहद संवेदनशील बना हुआ था।
अब आरोपी की मौत के बाद मूल आपराधिक मामले की जांच का स्वरूप भी बदल जाएगा। किसी आरोपी की मृत्यु होने का अर्थ यह नहीं होता कि उस पर लगे आरोप स्वतः सिद्ध हो गए। हत्या से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों, घटनास्थल, फोरेंसिक सामग्री और अन्य जांच के आधार पर पुलिस को मामले की परिस्थितियों का रिकॉर्ड तैयार करना होगा।
हिरासत में आरोपी की मौत क्यों गंभीर मामला है?
पुलिस कस्टडी में किसी आरोपी की मौत होने पर केवल उसकी मौत का कारण ही महत्वपूर्ण नहीं रहता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि हिरासत में सुरक्षा के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे मामलों में आम तौर पर कई सवाल जांच के दायरे में आते हैं—आरोपी को किस स्तर की निगरानी में रखा गया था, हथकड़ी कैसे नियंत्रित की जा रही थी, वाहन के दरवाजे की सुरक्षा व्यवस्था क्या थी और अचानक हुए हमले के बाद पुलिसकर्मियों की प्रतिक्रिया कैसी रही।
इन सवालों के जवाब केवल पुलिस के प्रारंभिक बयान से नहीं, बल्कि उपलब्ध भौतिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से स्पष्ट होने चाहिए।
आगे जांच में किन बातों पर रहेगी नजर?
आरोपी की मौत के बाद इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का महत्व बढ़ जाता है। पुलिस वाहन से बाहर निकलने की पूरी परिस्थितियां, आरोपी को लगी चोटों की प्रकृति और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य आगे की जांच में अहम हो सकते हैं।
साथ ही, मूल पत्नी हत्या मामले में मौजूद साक्ष्यों को भी अलग से देखा जाना जरूरी है। आरोपी अब जीवित नहीं है, इसलिए उससे आगे पूछताछ संभव नहीं होगी। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए फोरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य का महत्व और बढ़ जाता है।
फिलहाल पुलिस के अनुसार आरोपी ने हिरासत से भागने के प्रयास में चलती गाड़ी से छलांग लगाई, जिसके बाद गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई। घटना के अंतिम निष्कर्ष के लिए जांच और उपलब्ध आधिकारिक साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी होगा।
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