एशियन गेम्स से पहले बड़ा झटका:
नई दिल्ली। एशियन गेम्स शुरू होने से ठीक पहले भारतीय एथलेटिक्स टीम की तैयारियों के बीच वीजा से जुड़ी परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 4-5 भारतीय एथलीटों को जापान का वीजा अब तक नहीं मिल पाया है, जबकि टीम के दूसरे खिलाड़ी टोक्यो के पास आयोजित किए जा रहे अक्लिमेटाइजेशन कैंप में प्रशिक्षण शुरू कर चुके हैं।
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पहली नजर में यह प्रशासनिक देरी लग सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कुछ दिनों का अंतर भी खिलाड़ी की तैयारी को प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब एथलीटों को मौसम, समय क्षेत्र, यात्रा और प्रतियोगिता स्थल के वातावरण के अनुसार खुद को ढालने के लिए पहले से योजना बनाई गई हो।
वीजा की देरी से सिर्फ यात्रा नहीं, तैयारी भी प्रभावित होगी
भारतीय एथलेटिक्स टीम के लिए जापान में आयोजित अक्लिमेटाइजेशन कैंप का उद्देश्य प्रतियोगिता से पहले खिलाड़ियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना है। ऐसे कैंप में खिलाड़ी केवल ट्रेनिंग नहीं करते, बल्कि नींद का पैटर्न, भोजन, मौसम, वातावरण और यात्रा से होने वाली थकान को भी व्यवस्थित करते हैं।
यही वजह है कि जिन खिलाड़ियों का वीजा अटका है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इस तैयारी का कितना हिस्सा हासिल कर पाएंगे।
यदि मंजूरी में और समय लगता है तो उन्हें कैंप में देर से पहुंचना पड़ सकता है। दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि वे सीधे नागोया जाकर बाकी टीम के साथ जुड़ें। ऐसी स्थिति में उन्हें प्रतियोगिता से पहले अतिरिक्त समय निकालकर परिस्थितियों के अनुकूल होना पड़ेगा।
VFS के नियम से क्यों उलझा मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार वीजा और पासपोर्ट प्रशासन से जुड़ी आउटसोर्सिंग कंपनी VFS ने इस बात पर जोर दिया कि आवेदन उसी स्थान पर किए जाने चाहिए जहां संबंधित पासपोर्ट जारी हुए हैं। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण कुछ खिलाड़ियों के आवेदन में देरी होने की बात सामने आई है।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि समस्या जल्द सुलझ जाएगी। जरूरत पड़ने पर फेडरेशन इस मामले में सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग कर सकता है।
यहां एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों के लिए यात्रा दस्तावेज केवल औपचारिकता नहीं होते। एक छोटी प्रशासनिक अड़चन भी पूरे तैयारी कार्यक्रम को बदल सकती है।
20 सितंबर तक सुकुबा यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग
भारतीय एथलीटों का एक समूह सुकुबा यूनिवर्सिटी में 20 सितंबर तक अभ्यास करेगा। इसके बाद खिलाड़ी एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के लिए टोक्यो से नागोया जाएंगे।
एथलेटिक्स स्पर्धाएं 23 सितंबर से शुरू होनी हैं। यानी तैयारी और प्रतियोगिता के बीच उपलब्ध समय पहले से ही सीमित है। इसलिए वीजा में देरी होने वाले खिलाड़ियों के लिए हर अतिरिक्त दिन महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत का 207 सदस्यीय दल, एथलेटिक्स पर बड़ी उम्मीद
भारत इस बार 207 सदस्यीय दल के साथ एशियन गेम्स में उतरने की तैयारी कर रहा है। लक्ष्य पिछले संस्करण के प्रदर्शन को बेहतर करना है और एथलेटिक्स भारतीय अभियान के प्रमुख आधारों में शामिल है।
एथलेटिक्स के बाद हॉकी भारत के बड़े दलों में है, जिसमें करीब 40 सदस्य शामिल हैं। क्रिकेट में भी भारत समेत चार टीमों को आईसीसी रैंकिंग के आधार पर सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला है। भारतीय क्रिकेट टीम का पहला मुकाबला 28 सितंबर को निर्धारित है।
इसलिए एथलेटिक्स दल से जुड़ी वीजा समस्या को मामूली प्रशासनिक मामला मानना उचित नहीं होगा। भारत के पदक अभियान में एथलेटिक्स की भूमिका बड़ी है और यहां खिलाड़ियों की तैयारी में किसी तरह की बाधा का असर सीधे प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
असली चिंता पदक से पहले ‘तैयारी का समय’ है
खेल विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो एथलीट के प्रदर्शन में केवल उसकी फिटनेस और तकनीक ही भूमिका नहीं निभाती। प्रतियोगिता के देश में पहले पहुंचना शरीर को नए वातावरण के अनुरूप ढालने में मदद करता है।
विशेष रूप से लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बाद जेट लैग, नींद का बदलाव और वातावरण के अनुरूप ढलना प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीमें अक्लिमेटाइजेशन को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाती हैं।
ऐसे में जिन भारतीय खिलाड़ियों को देर से वीजा मिलेगा, उनके कोचिंग और रिकवरी प्लान में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर खिलाड़ी की व्यक्तिगत स्पर्धा, यात्रा के समय और जापान पहुंचने की तारीख पर निर्भर करेगा।
अब आगे क्या?
सबसे बड़ी प्राथमिकता लंबित वीजा मामलों को जल्द से जल्द सुलझाना होगी, ताकि प्रभावित एथलीट भी टीम की निर्धारित तैयारी योजना का अधिकतम लाभ उठा सकें।
फेडरेशन और संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय इस स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण होगा। भविष्य के बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए यह घटना एक सबक भी है कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ पासपोर्ट, वीजा और यात्रा दस्तावेजों की तैयारी को भी प्रतियोगिता से काफी पहले अंतिम रूप देना जरूरी है।



