NEET-UG पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच आखिरकार आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. बता दें कि साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी, तब से लेकर अब तक चार प्रमुख नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी- संभाली स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल निशंक और फिर धर्मेंद्र प्रधान ने. ऐसे में आइए इस घटनाक्रम के बाद जानते हैं किस शिक्षा मंत्री कब से कब तक इसकी कमान संभाली.
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मोदी सरकार 1.0 की शुरुआत में इस मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति ईरानी को सौंपी गई. उस समय स्मृति ईरानी सबसे युवा महिला चेहरों में से एक थीं. इनका कार्यकाल करीब 2 साल 1 महीने का रहा. इस दौरान स्मृति ईरानी अपनी पढ़ाई को लेकर हमेशा विपक्ष के निशाने पर बनी रहीं. ऐसे में 5 जुलाई को कैबिनेट में बड़ी फेरबदल के बाद इन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई.
इस बड़े फेरबदल के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अनुभवी नेता प्रकाश जावड़ेकर को सौंपी गई. इन्होंने करीब 2 साल 11 महीने इसकी कमान संभाली. बता दें कि इनके कार्यकाल में ही नई शिक्षा नीति पर प्रमुखता से काम किया गया और खाका तैयार हुआ. फिर जब 2019 में यानी मोदी सरकार 2.0 में इन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई. मोदी सरकार 2.0 के गठन के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को देश का शिक्षा मंत्री बनाया गया. इन्होंने लगभग 2 साल 1 महीना तक इसकी जिम्मेदारी संभाली. बता दें कि निशंक के कार्यकाल में ही राष्टीय शिक्षा नीति एनईपी को मंजूरी मिली थी. साथ ही इनके ही कार्यकाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया.
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान जुलाई 2021 में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई. इन्होंने 5 साल तक इस पद को संभाला. इनके समय में ही नई शिक्षा नीति को लागू किया गया. लेकिन नीट पेपर लीक विवाद के मुद्दे को लेकर 1 महीने से सड़कों पर उतरे छात्रों के प्रदर्शन के आगे आखिरकार आज धर्मेंद्र को झुकना पड़ा और इस्तीफा देना पड़ा.



