सीआरपीएफ के शौर्य और बलिदान को समर्पित ‘सीआरपीएफ वीरता दिवस’ हर साल देशभर में गर्व के साथ मनाया जाता है। यह दिन उन बहादुर जवानों की याद दिलाता है जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मनों के बड़े हमले को नाकाम किया। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कच्छ के रण में CRPF के मात्र 150 जवानों ने जबरदस्त साहस दिखाते हुए Pakistan Army के करीब 3500 सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। यह लड़ाई भारतीय सुरक्षा बलों के इतिहास में अद्वितीय वीरता का प्रतीक मानी जाती है।
गुजरात के Kutch क्षेत्र में सरदार पोस्ट पर हुए इस मुकाबले में दुश्मन सेना ने भारी हथियारों और संख्या बल के साथ हमला किया था। इसके बावजूद सीआरपीएफ के जवानों ने अदम्य साहस, रणनीति और देशभक्ति का परिचय देते हुए मोर्चा संभाले रखा और दुश्मनों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस ऐतिहासिक जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय जवानों का हौसला किसी भी चुनौती से बड़ा है।
सीआरपीएफ वीरता दिवस न केवल इस गौरवशाली जीत की याद दिलाता है, बल्कि देशवासियों को सुरक्षा बलों के बलिदान और समर्पण का सम्मान करने की प्रेरणा भी देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए हमारे जवान हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं।


