विशेषज्ञों के मुताबिक कॉइल के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, सूक्ष्म कण और अन्य रसायन मौजूद हो सकते हैं; कम हवादार कमरे में लंबे समय तक संपर्क से खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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नई दिल्ली। मच्छरों से बचने के लिए घरों में कॉइल जलाना आम बात है। खासकर बारिश और उमस के मौसम में लोग मच्छरों को दूर रखने के लिए सोने से पहले कॉइल जला देते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मच्छर भगाने वाली कॉइल का धुआं केवल मच्छरों को प्रभावित नहीं करता, बल्कि बंद या कम हवादार जगहों में इंसानों की सेहत पर भी असर डाल सकता है।
फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉ. शाज़ली मंजूर के मुताबिक, कॉइल को बंद कमरे में जलाने से निकलने वाले रसायन और धुआं हवा में जमा हो सकते हैं। इससे खांसी, गले में परेशानी, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों में इसका असर अधिक महसूस हो सकता है।
कॉइल के धुएं में कौन-कौन से प्रदूषक?
कॉइल जलने के दौरान अलग-अलग उत्पादों के अनुसार रासायनिक पदार्थ और सूक्ष्म कण हवा में फैल सकते हैं। उपलब्ध शोध में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, टीवीओसी और PM2.5 जैसे प्रदूषकों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है।
कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। वहीं सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक नाक, गले और श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों ने कॉइल के धुएं की तुलना सिगरेट के धुएं से भी की है। हालांकि, 60–100 सिगरेट या उससे अधिक के बराबर धुआं जैसी तुलना कॉइल के प्रकार, कमरे के आकार, वेंटिलेशन और इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसे हर स्थिति में एक निश्चित संख्या के रूप में नहीं समझना चाहिए।
बंद कमरे में कॉइल जलाना क्यों चिंता का विषय?
कम वेंटिलेशन वाले कमरे में धुआं और प्रदूषक बाहर नहीं निकल पाते। इससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है और लंबे समय तक संपर्क से सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। विशेष रूप से अस्थमा या एलर्जी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
एक अध्ययन में भी मच्छर भगाने वाली कॉइल के इस्तेमाल के बाद घर के अंदर विभिन्न वायु प्रदूषकों और बेहद छोटे कणों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। शोध में यह भी संकेत मिला कि कम हवादार जगहों में कॉइल के प्रभाव और प्रदूषण का स्तर अधिक हो सकता है।
मच्छरों से बचने के लिए क्या विकल्प अपनाएं?
मच्छरों से बचाव के लिए केवल कॉइल पर निर्भर रहने के बजाय अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं। विशेषज्ञों ने मच्छरदानी लगाने, खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाने और मच्छरों की एंट्री कम करने जैसे उपायों पर जोर दिया है।
कॉइल का इस्तेमाल करना ही हो तो उत्पाद के पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करना और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना महत्वपूर्ण है। धुएं को सीधे सांस में लेने से बचना चाहिए।
बच्चों और सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए सावधानी
बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्या वाले लोगों के आसपास किसी भी धुएं का अनावश्यक संपर्क कम रखना बेहतर है। यदि कॉइल या किसी अन्य रिपेलेंट के इस्तेमाल के बाद सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, आंखों में तेज जलन या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो उसका इस्तेमाल बंद कर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
निष्कर्ष: मच्छरों से बचाव जरूरी है, लेकिन इसके लिए घर के अंदर धुआं पैदा करने वाले उपायों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। खासकर बंद कमरे में कॉइल जलाने से बचना और मच्छरदानी व अन्य गैर-धुआं आधारित उपायों को प्राथमिकता देना अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।



