Sukma Naxal News: नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम, जंगल से 711 ग्रेनेड लॉन्चर शेल बरामद; IED का भी खतरा
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। सुकमा जिले के उसूर थाना क्षेत्र में तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपाकर रखे गए 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) शेल बरामद किए गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां आसपास के जंगलों में छिपे अन्य खतरों की तलाश में जुट गई हैं।
इस बरामदगी का महत्व केवल हथियारों और विस्फोटक सामग्री को जब्त करने तक सीमित नहीं है। दुर्गम जंगलों में छिपाकर रखे गए ऐसे सामान सुरक्षा बलों की आवाजाही और क्षेत्र में चलने वाले अभियानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि अब जांच का फोकस आसपास के इलाके में संभावित आईईडी और अन्य विस्फोटक सामग्री का पता लगाने पर है।
संयुक्त सर्च ऑपरेशन में मिला विस्फोटकों का बड़ा जखीरा
पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि उसूर थाना क्षेत्र के जंगलों में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी गई है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस बल, सीआरपीएफ की 196वीं वाहिनी और कोबरा 204 बटालियन की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया।
सुरक्षा बलों ने ताड़ापाला स्थित फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर केजी हिल्स के जंगलों में सर्चिंग की। इसी दौरान छिपाकर रखे गए 711 BGL शेल बरामद हुए।
सभी शेल को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत कब्जे में ले लिया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के बाद आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा और तलाशी व्यवस्था को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
IED की आशंका ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
BGL शेल मिलने के बाद सुरक्षा बलों के सामने अब दूसरी बड़ी चुनौती आसपास के जंगलों में संभावित आईईडी और अन्य विस्फोटक सामग्री की तलाश करना है।
जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जमीन के भीतर छिपाई गई विस्फोटक सामग्री का पता लगाना आसान नहीं होता। कई बार सामान्य तलाशी अभियान के बावजूद ऐसे खतरे सामने नहीं आ पाते। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को विशेष उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की मदद से व्यवस्थित जांच करनी पड़ती है।
सुरक्षा बलों ने इलाके में डी-माइनिंग अभियान चलाने की तैयारी की है। इसका उद्देश्य संभावित विस्फोटक खतरों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करना है।
फिलहाल आईईडी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। यह आशंका जांच और सघन तलाशी का विषय है।
ग्रामीणों को पहाड़ियों और जंगलों से दूर रहने की सलाह
सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों से कर्रेगुट्टा और आसपास की पहाड़ियों की ओर फिलहाल नहीं जाने की अपील की है।
इस तरह की अपील का सीधा संबंध आम नागरिकों की सुरक्षा से है। जंगलों में छिपे विस्फोटक केवल सुरक्षा बलों के लिए ही नहीं, बल्कि जंगल में लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता या अन्य वन उपज एकत्र करने जाने वाले ग्रामीणों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रामीणों की सतर्कता और प्रशासन के साथ सहयोग बेहद जरूरी है। किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की जानकारी मिलने पर उसे छूने या उसके करीब जाने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचित करना चाहिए।
बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के लिए क्यों अहम है यह बरामदगी?
बस्तर के जंगलों में सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक छिपाई गई विस्फोटक सामग्री और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों का खतरा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तलाशी अभियान में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
711 BGL शेल की बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाए जाने वाले संयुक्त अभियान सुरक्षा व्यवस्था के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि, किसी विस्फोटक सामग्री की बरामदगी को पूरे क्षेत्र में खतरा समाप्त होने का संकेत नहीं माना जा सकता। जब तक आसपास के संवेदनशील इलाकों की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।
आगे क्या होगी सुरक्षा बलों की रणनीति?
अब सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान केजी हिल्स और आसपास के जंगलों में संभावित विस्फोटक सामग्री की तलाश पर रहेगा। प्रस्तावित डी-माइनिंग अभियान के दौरान संदिग्ध स्थानों की जांच कर संभावित खतरों को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिश की जाएगी।
इसके साथ ही खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण होगा कि विस्फोटक सामग्री किसने छिपाई थी और क्या आसपास के क्षेत्र में अन्य ठिकाने भी मौजूद हैं।
इस पूरी कार्रवाई की सफलता का आकलन केवल बरामद किए गए 711 शेल की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि सुरक्षा बल आसपास के क्षेत्र को कितनी सुरक्षित तरीके से विस्फोटक मुक्त बना पाते हैं।
फिलहाल ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी है कि वे प्रशासन की सलाह का पालन करें और प्रतिबंधित या संवेदनशील इलाकों में जाने से बचें। सुरक्षा बलों के लिए यह बरामदगी बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आगे की सघन तलाशी ही वास्तविक खतरे का दायरा स्पष्ट करेगी।




