Chhattisgarh Drug Smuggling: नशे के कारोबार पर बड़ा प्रहार, 2 दिन में 5.92 करोड़ का गांजा जब्त; तीन जिलों में खुला तस्करी नेटवर्क
छत्तीसगढ़ में गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई ने एक बार फिर राज्य के अंतरराज्यीय रास्तों पर सक्रिय नशे के कारोबार की गंभीरता उजागर की है। महज दो दिनों के भीतर कांकेर, केशकाल और जगदलपुर में हुई तीन अलग-अलग कार्रवाइयों में 884 किलो 410 ग्राम गांजा जब्त किया गया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ 92 लाख रुपये बताई गई है।
इन कार्रवाइयों में सबसे बड़ी बरामदगी जगदलपुर के बोधघाट थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक पिकअप वाहन से भारी मात्रा में गांजा मिला। पुलिस के मुताबिक, तस्कर ओडिशा से गांजा लेकर छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंचाने की तैयारी में थे। इस दौरान बाइक से पिकअप की निगरानी और रास्ते की जानकारी देने वाले लोग भी साथ चल रहे थे।
यह मामला केवल मादक पदार्थों की बड़ी खेप पकड़े जाने का नहीं है, बल्कि तस्करी के लिए अपनाए जा रहे संगठित तरीकों की ओर भी इशारा करता है।
जगदलपुर में पिकअप के साथ बाइक से चल रहा था सुरक्षा घेरा
5 नवंबर की सुबह बोधघाट थाना पुलिस को सूचना मिली कि ओडिशा की ओर से एक सफेद पिकअप में गांजा भरकर जगदलपुर की तरफ लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने अड़ावाल गांव के रेलवे फाटक के पास जांच और घेराबंदी शुरू की।
कुछ समय बाद एक लाल रंग की बाइक पर सवार दो युवक दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार, ये युवक आगे चलकर पिकअप के लिए रास्ते की निगरानी कर रहे थे। उनके पीछे संदिग्ध पिकअप भी पहुंची।
पुलिस ने दोनों वाहनों को रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने भागने की कोशिश की। हालांकि, घेराबंदी के बाद सभी को पकड़ लिया गया।
पिकअप की तलाशी में 15 बोरियों से 476 किलो 500 ग्राम गांजा बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत 2 करोड़ 38 लाख 25 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस का कहना है कि गांजे को छोटे पैकेटों में व्यवस्थित तरीके से बांधकर बोरियों में रखा गया था।
इस कार्रवाई में कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तीन नाबालिग भी शामिल हैं।
ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक फैला था कथित परिवहन मार्ग
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांच वयस्क आरोपियों में भगवान पांगी (25), घासी खिलो (21), चित्रसेन गल्लोरी (22) और रोहणी गल्लोरी (27) शामिल हैं। इनके साथ तीन नाबालिगों को भी पकड़ा गया है। सभी आरोपी ओडिशा के मलकानगिरी जिले के कोरकोंडा थाना क्षेत्र के ग्राम कोंटामाड़ी के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस ने गांजे के अलावा पिकअप, बाइक, छह मोबाइल फोन और 1,500 रुपये नकद जब्त किए हैं। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्हें न्यायिक रिमांड पर विशेष एनडीपीएस न्यायालय, जगदलपुर में पेश किया गया।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तस्करी में एक से अधिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। बाइक से आगे चलने वाले लोगों की भूमिका यह संकेत देती है कि परिवहन के दौरान पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित जांच से बचने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इस भूमिका से जुड़े सभी तथ्यों का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
कांकेर और केशकाल में भी पकड़ी गई बड़ी खेप
जगदलपुर की कार्रवाई अकेली नहीं थी। इससे पहले कांकेर और केशकाल में भी पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की थी।
- कांकेर: गढ़िया पहाड़ के पास पुलिस को गांजे की 70 बोरियां मिलीं। बताया गया कि तस्कर मौके से गांजा छोड़कर फरार हो गए।
- केशकाल: एक कार से 407 किलो 910 ग्राम गांजा बरामद किया गया। इस मामले में राजस्थान के एक युवक की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।
- जगदलपुर: पिकअप में 476 किलो 500 ग्राम गांजा मिला और बाइक से कथित पायलेटिंग कर रहे लोगों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
तीनों मामलों में कुल 884 किलो 410 ग्राम गांजा जब्त हुआ है। इसकी संयुक्त अनुमानित कीमत करीब 5.92 करोड़ रुपये बताई गई है।
छत्तीसगढ़ के रास्ते क्यों महत्वपूर्ण हैं नशा तस्करी की जांच?
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति इसे कई राज्यों के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग बनाती है। ओडिशा से आने वाले वाहनों के लिए बस्तर क्षेत्र और आसपास के मार्ग परिवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसी वजह से इन रास्तों पर मादक पदार्थों की आवाजाही रोकना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
तस्करी के संगठित मामलों में केवल वाहन और उसमें रखे गांजे को जब्त करना पर्याप्त नहीं होता। जांच में यह भी पता लगाना जरूरी है कि माल किसने भेजा, परिवहन का इंतजाम किसने किया, इसे कहां पहुंचाया जाना था और बिक्री से मिलने वाली रकम किन लोगों तक पहुंचनी थी।
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक किसी एक खेप की बरामदगी को पूरे नेटवर्क के समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
तीन नाबालिगों की गिरफ्तारी ने बढ़ाई चिंता
जगदलपुर मामले में तीन नाबालिगों की गिरफ्तारी भी गंभीर सामाजिक सवाल खड़े करती है। संगठित अपराध में बच्चों और किशोरों की कथित भागीदारी यह समझने की जरूरत पैदा करती है कि उन्हें किन परिस्थितियों में ऐसे कामों में शामिल किया जा रहा है।
नाबालिगों के मामलों में कानून के तहत अलग प्रक्रिया और संरक्षण के प्रावधान लागू होते हैं। ऐसे मामलों की जांच में उनकी भूमिका के साथ यह भी समझना जरूरी है कि कहीं उन्हें लालच, दबाव या किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
यह पहलू केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। परिवार, स्कूल और स्थानीय प्रशासन को भी युवाओं को नशे तथा आपराधिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए जागरूकता और सहयोग बढ़ाना होगा।
अब पुलिस के सामने असली चुनौती क्या है?
दो दिनों में तीन जिलों में हुई बरामदगी पुलिस के अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन भविष्य में ऐसी तस्करी रोकने के लिए जांच को जब्ती से आगे ले जाना होगा।
सबसे जरूरी है कि जब्त मोबाइल फोन से मिलने वाली जानकारियों, वाहनों के संपर्कों और संभावित आर्थिक लेनदेन की जांच की जाए। इसके साथ ही अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय मजबूत करना होगा, ताकि एक राज्य में सक्रिय तस्करी से जुड़े लोगों की जानकारी दूसरे राज्यों तक समय पर पहुंच सके।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन सिंह के अनुसार, नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
अब इस अभियान की सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि पुलिस केवल नशीले पदार्थों की खेप पकड़ने तक सीमित रहती है या उनके पीछे सक्रिय आपूर्ति और वितरण व्यवस्था तक भी पहुंचती है। छत्तीसगढ़ को नशा तस्करी के रास्ते के रूप में इस्तेमाल होने से रोकने के लिए लगातार और समन्वित कार्रवाई जरूरी होगी।




