दक्षिण चीन सागर में बड़ा टकराव: फिलीपींस ने चीनी रिसर्च जहाज को घेरा, अंडरसी केबल पर बढ़ी चिंता
मनीला: दक्षिण चीन सागर से एक बार फिर ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने समुद्री सुरक्षा और चीन-फिलीपींस तनाव को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। फिलीपीन कोस्ट गार्ड ने उत्तरी बटानेस के पास मौजूद चीनी रिसर्च वेसल JIA HAI KE 7 के खिलाफ अपना बड़ा समुद्री पोत और एक विमान तैनात किया। फिलीपींस का कहना है कि जहाज उसके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में बिना अनुमति समुद्री वैज्ञानिक गतिविधियां कर रहा था।
28 सितंबर से इटबायत द्वीप के उत्तर-पश्चिम में करीब 37-38 नॉटिकल मील की दूरी पर मौजूद इस जहाज की निगरानी के बाद 1 अक्टूबर को BRP Teresa Magbanua और एक कोस्ट गार्ड विमान को कार्रवाई के लिए भेजा गया। फिलीपीन कोस्ट गार्ड के अनुसार, उसके पोत ने चीनी जहाज के करीब पहुंचकर एक छोटी नाव उतारी और लगातार रेडियो संदेशों के जरिए उसे चुनौती दी। इसके बाद चीनी पोत क्षेत्र से उत्तर की ओर चला गया।
मामला सिर्फ एक जहाज तक सीमित क्यों नहीं है?
इस घटनाक्रम की गंभीरता जहाज को हटाने की कार्रवाई से ज्यादा उस इलाके की रणनीतिक स्थिति में छिपी है। बटानेस और लुजोन स्ट्रेट का क्षेत्र प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में आता है। यही कारण है कि यहां किसी रिसर्च या सर्वे जहाज की लंबे समय तक मौजूदगी पर फिलीपींस की नजर स्वाभाविक रूप से बढ़ी है।
फिलीपीन अधिकारियों ने यह भी चिंता जताई है कि इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंडरसी कम्युनिकेशन केबल कॉरिडोर मौजूद हैं। हालांकि, फिलहाल सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि JIA HAI KE 7 ने इन केबलों से संबंधित संवेदनशील डेटा वास्तव में एकत्र किया था। अधिकारियों ने मुख्य रूप से संभावित डेटा संग्रह को लेकर सवाल उठाए हैं।
AIS में गड़बड़ी ने बढ़ाया संदेह
फिलीपीन कोस्ट गार्ड ने इससे पहले दावा किया था कि JIA HAI KE 7 के Automatic Identification System यानी AIS डेटा में असामान्य गतिविधि दिखाई दी। PCG के अनुसार, जहाज की रिपोर्टेड लोकेशन उसके वास्तविक भौगोलिक मूवमेंट से मेल नहीं खा रही थी और इसे उसने संभावित AIS spoofing बताया।
AIS समुद्री जहाजों की पहचान और उनकी स्थिति की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर किसी जहाज की लोकेशन गलत दिखाई दे, तो समुद्री निगरानी एजेंसियों के लिए उसकी वास्तविक गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, AIS में कथित हेरफेर को लेकर उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से फिलीपीन अधिकारियों के आकलन पर आधारित है। इसलिए इसे अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के बजाय फिलीपींस का आरोप या आकलन मानना जरूरी है।
चीन का कोस्ट गार्ड जहाज भी पहुंचा
तनाव तब और बढ़ गया जब चीनी रिसर्च वेसल के आसपास China Coast Guard का एक जहाज भी पहुंच गया। फिलीपीन अधिकारियों के अनुसार, चीनी कोस्ट गार्ड पोत ने उसके जहाज को रेडियो के जरिए चुनौती दी।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि JIA HAI KE 7 को फिलीपीन अधिकारियों ने निजी स्वामित्व वाला रिसर्च वेसल बताया है। ऐसे में उसके साथ चीनी सरकारी जहाज की मौजूदगी ने फिलीपींस में यह सवाल खड़ा किया कि रिसर्च जहाज की गतिविधियों और चीनी सरकारी तंत्र के बीच किस स्तर का समन्वय था। फिलहाल इस संबंध का स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
समुद्री कानून बना विवाद का केंद्र
इस पूरे विवाद में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून भी महत्वपूर्ण है। फिलीपींस के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, UNCLOS के Article 246 के तहत किसी तटीय देश के EEZ और महाद्वीपीय शेल्फ में Marine Scientific Research के लिए संबंधित तटीय देश की सहमति आवश्यक होती है।
फिलीपींस का कहना है कि उसने JIA HAI KE 7 को ऐसी कोई अनुमति नहीं दी थी। दूसरी तरफ चीन का कहना है कि जहाज सामान्य गतिविधि कर रहा था और जिस समुद्री क्षेत्र में वह काम कर रहा था, उस पर चीन के अधिकार हैं। इस तरह विवाद केवल जहाज की गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के अलग-अलग समुद्री दावों से भी जुड़ जाता है।
चीन ने फिलीपींस पर लगाया उत्पीड़न का आरोप
चीनी पक्ष ने फिलीपींस की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया है। चीनी दूतावास ने कहा कि रिसर्च जहाज चीन के अधिकार क्षेत्र वाले पानी में सामान्य गतिविधियां कर रहा था और फिलीपींस ने उसे परेशान किया।
इसके जवाब में फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने बटानेस के आसपास चीन के संप्रभु अधिकार और अधिकार क्षेत्र के दावे को खारिज किया। मनीला का कहना है कि संबंधित क्षेत्र उसके EEZ में आता है और वहां बिना अनुमति समुद्री वैज्ञानिक शोध की अनुमति नहीं दी गई थी।
आगे क्या हो सकता है?
इस घटना का सबसे बड़ा असर समुद्र में सीधे सैन्य टकराव से ज्यादा निगरानी और समुद्री डोमेन अवेयरनेस के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है। फिलीपींस पहले ही हवाई निगरानी, तटीय मॉनिटरिंग और समुद्री गश्त के जरिए विदेशी जहाजों की गतिविधियों पर नजर बढ़ा रहा है।
दूसरी तरफ चीन भी अपने कोस्ट गार्ड और नौसैनिक संसाधनों के जरिए विवादित या संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में मौजूदगी बनाए रखता है। ऐसी परिस्थितियों में एक रिसर्च जहाज, कोस्ट गार्ड पोत और निगरानी विमान के बीच आमना-सामना तेजी से कूटनीतिक विवाद में बदल सकता है।
विशेषज्ञों के लिए सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि भविष्य में ऐसे जहाज केवल समुद्री वैज्ञानिक गतिविधियों तक सीमित रहते हैं या उनकी गतिविधियां समुद्र की गहराई, संचार नेटवर्क और रणनीतिक समुद्री मार्गों की मैपिंग से जुड़ती हैं। अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बटानेस के आसपास समुद्री गतिविधियों की निगरानी अब फिलीपींस की सुरक्षा नीति का और महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, जबकि चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री दावों का विवाद आगे भी ऐसे टकरावों को जन्म दे सकता है।



