जशपुर में 1000 रुपये का खौफनाक अंत: दोस्त ने जंगल में उतारा मौत के घाट, सबूत मिटाने की भी रची साजिश
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से सामने आया जशपुर हत्या मामला मामूली आर्थिक विवाद के किस तरह जानलेवा रूप लेने का गंभीर उदाहरण है। पुलिस के मुताबिक, सेकंड हैंड मोबाइल के सौदे में बचे महज 1 हजार रुपये को लेकर दो दोस्तों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि एक युवक की जान चली गई।
पुलिस जांच के अनुसार, मृतक राजेश दास ने मोबाइल के बदले 6 हजार रुपये में से 5 हजार रुपये चुका दिए थे। बाकी रकम को लेकर आरोपी कैलाश यादव और राजेश के बीच विवाद चल रहा था। आरोप है कि 23 सितंबर को कैलाश राजेश को कार में बैठाकर जुरगुम-तुर्रापानी जंगल की ओर ले गया। वहां पैसों को लेकर कहासुनी हुई और इसके बाद लकड़ी के फाड़े से सिर पर वार किया गया। गंभीर चोट के कारण राजेश की मौत हो गई।
जंगल में मिला शव, शुरुआत में नहीं हो सकी पहचान
घटना के बाद मामला तब सामने आया जब 23 सितंबर को जुरगुम-तुर्रापानी जंगल में रपटा पुलिया के पास एक युवक का शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। शव की हालत और सिर पर चोट के निशान ने शुरुआत से ही इसे संदिग्ध मौत का मामला बना दिया।
मृतक की पहचान तत्काल नहीं हो पाई। पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराया और अज्ञात आरोपी के खिलाफ जांच शुरू की। आसपास के गांवों में पूछताछ और मृतक से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने के बाद पुलिस राजेश दास तक पहुंची।
इसके बाद उसके परिचितों और दोस्तों से पूछताछ की गई। जांच की दिशा कैलाश यादव तक पहुंची, जिसके साथ मृतक का पैसों को लेकर विवाद सामने आया।
हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी ने कथित तौर पर घटना के निशान मिटाने की कोशिश की। हत्या में इस्तेमाल लकड़ी के फाड़े और मृतक के मोबाइल को नदी में फेंकने की बात सामने आई है। इसके अलावा आरोपी ने घटना के समय पहने कपड़ों को भी नदी में फेंक दिया।
पुलिस का कहना है कि कार पर लगे खून के निशान हटाने के लिए उसे नदी के पानी से धोया गया। बाद में पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसकी लाल रंग की स्विफ्ट कार बरामद की।
यानी जांच में केवल हत्या का आरोप ही नहीं, बल्कि कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने की कोशिश का पहलू भी सामने आया। इसी वजह से पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के साथ धारा 238 के तहत भी कार्रवाई की है।
असली चिंता सिर्फ 1000 रुपये नहीं
इस घटना को केवल रकम के विवाद के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में आपसी लेन-देन, उधार और पुराने हिसाब को लेकर होने वाले विवाद कई बार लंबे समय तक चलते हैं। जब ऐसे विवादों में गुस्सा, शराब या हथियारनुमा वस्तु और सुनसान स्थान जैसे कारक जुड़ जाते हैं, तो मामूली आर्थिक झगड़ा भी गंभीर अपराध में बदल सकता है।
इस मामले में भी कथित तौर पर विवाद की शुरुआत बकाया रकम से हुई, लेकिन इसका परिणाम एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के जेल पहुंचने के रूप में सामने आया।
पुलिस की जांच में अहम कड़ी बने पुराने संबंध
ऐसे मामलों में मृतक की पहचान होने के बाद उसके संपर्कों की पड़ताल जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बनती है। यहां भी मृतक के परिचितों और उसके आर्थिक लेन-देन की जानकारी जुटाने से पुलिस को संदिग्ध तक पहुंचने में मदद मिली।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की और उसकी निशानदेही पर वाहन समेत कुछ अहम चीजें बरामद की गईं। हालांकि अदालत में आरोपों और साक्ष्यों का परीक्षण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
आगे क्या होगा?
आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। अब मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बरामद वाहन और अन्य कथित साक्ष्यों के साथ पुलिस की केस डायरी महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी को यह भी स्थापित करना होगा कि घटना की परिस्थितियां क्या थीं और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य किस स्तर तक आरोपों की पुष्टि करते हैं।
इस घटना का सबसे बड़ा सबक यही है कि छोटी रकम को लेकर शुरू हुआ विवाद भी अगर समय रहते शांत नहीं किया जाए तो उसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। एक हजार रुपये की कथित देनदारी ने जिस विवाद को जन्म दिया, उसने अंततः एक परिवार से उसका सदस्य छीन लिया और दूसरे व्यक्ति को आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है।



