असम की ‘आयरन लेडी’ संजुक्ता परासर
नई दिल्ली। असम के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में फील्ड पुलिसिंग और काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों के लिए पहचानी जाने वाली IPS अधिकारी डॉ. संजुक्ता परासर अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF के CoBRA सेक्टर की इंस्पेक्टर जनरल (IG) हैं। गृह मंत्रालय के भारतीय पुलिस सेवा पोर्टल पर 17 अगस्त 2026 को उनकी नियुक्ति 2006 बैच, Assam-Meghalaya cadre की अधिकारी के रूप में CRPF में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दर्ज की गई है। CRPF की अपनी वेबसाइट भी उन्हें वर्तमान में IG, CoBRA Sector के रूप में सूचीबद्ध करती है।
यह नियुक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह CoBRA की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनी हैं। यह सिर्फ महिला नेतृत्व से जुड़ी उपलब्धि नहीं है, बल्कि ऐसे ऑपरेशनल ढांचे में नेतृत्व का विस्तार भी है, जहां जंगल युद्ध, खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक तैयारी और कठिन इलाकों में लंबे अभियानों का अनुभव बेहद अहम होता है।
क्यों कहलाती हैं ‘आयरन लेडी ऑफ असम’?
संजुक्ता परासर के करियर की पहचान काफी हद तक असम की संवेदनशील फील्ड पोस्टिंग से बनी। 2008 में उनकी शुरुआती नियुक्ति माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने उदालगुड़ी और अन्य इलाकों में कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में सोनितपुर में SP रहते हुए उन्होंने उग्रवाद प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के साथ अभियानों में काम किया। उनकी फील्ड भूमिका की तस्वीरें उस दौर में व्यापक रूप से सामने आईं और यहीं से मीडिया में उन्हें “आयरन लेडी ऑफ असम” कहा जाने लगा।
यह उपनाम कोई आधिकारिक पदवी नहीं है, बल्कि उनके लंबे फील्ड रिकॉर्ड के कारण मीडिया में प्रचलित पहचान है। उनके करियर में केवल ऑपरेशन नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ पुलिसिंग और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक समन्वय का अनुभव भी शामिल रहा है।
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NIA का अनुभव नई भूमिका को और व्यापक बनाता है
परासर की नई जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका National Investigation Agency (NIA) अनुभव भी है। वह वहां Deputy Inspector General के पद पर काम कर चुकी हैं। इससे उनके करियर में फील्ड ऑपरेशन के साथ आतंकवाद, उग्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच का अनुभव भी जुड़ता है।
CoBRA जैसी विशेष इकाई के लिए यही मिश्रित अनुभव उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसका काम केवल हथियारबंद अभियान चलाना नहीं है। ऑपरेशन की योजना, सूचना का विश्लेषण, प्रशिक्षण, संसाधन और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
आखिर CoBRA है क्या?
CRPF के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार CoBRA यानी Commando Battalion for Resolute Action विशेष रूप से गुरिल्ला और जंगल युद्ध के लिए बनाई गई इकाई है। CRPF ने 2008 से 2011 के बीच कुल 10 CoBRA यूनिट तैयार कीं। इनका इस्तेमाल वामपंथी उग्रवाद और अन्य insurgency-affected क्षेत्रों में किया जाता है।
CRPF के अनुसार CoBRA Sector इन 10 यूनिटों के प्रशासनिक नियंत्रण के साथ उनके चयन, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सपोर्ट में भी भूमिका निभाता है, ताकि जवान ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए तैयार रहें।
नई जिम्मेदारी की असली चुनौती
अब परासर के सामने चुनौती व्यक्तिगत फील्ड ऑपरेशन से कहीं बड़ी है। उन्हें एक ऐसी पूरी विशेषीकृत व्यवस्था का नेतृत्व करना है, जिसकी यूनिटें कई राज्यों में तैनात हैं। CRPF के आधिकारिक संदेश के अनुसार CoBRA की यूनिटें छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में तैनात हैं।
इसलिए उनकी नई भूमिका में ऑपरेशनल अनुभव के साथ कमांड, प्रशिक्षण, संसाधन प्रबंधन और अंतर-एजेंसी समन्वय की भी बड़ी परीक्षा होगी। करीब दो दशक की पुलिस सेवा में असम की फील्ड पुलिसिंग से लेकर NIA की राष्ट्रीय सुरक्षा जांच और अब CoBRA के नेतृत्व तक का उनका सफर इसी व्यापक अनुभव को दर्शाता है।



