संजू देवी को 51 लाख का सम्मान: एशियन गेम्स गोल्ड के बाद CM साय ने बढ़ाया हौसला, छत्तीसगढ़ की बेटियों को मिला बड़ा संदेश
रायपुर। एशियन गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने के बाद छत्तीसगढ़ की कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी को राज्य सरकार की ओर से बड़ा सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में संजू देवी से मुलाकात कर उनकी उपलब्धि की सराहना की और 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनके खेल सफर, एशियन गेम्स के अनुभव और भारतीय महिला कबड्डी टीम के प्रदर्शन पर बातचीत भी की।
संजू देवी के सम्मान का महत्व सिर्फ पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने वाली खिलाड़ी को राज्य स्तर पर सार्वजनिक सम्मान मिलने से उन युवा खिलाड़ियों के लिए भी संदेश जाता है जो सीमित संसाधनों के बीच खेल को करियर बनाने का सपना देख रहे हैं।
फाइनल में दबाव के बीच संजू ने बदला मैच का रुख
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम का अभियान आसान नहीं रहा। फाइनल में भारत का सामना ईरान से हुआ, जहां मुकाबला आखिरी दौर तक कड़ा रहा। भारत ने 37-34 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम पूरे अभियान में अजेय रही।
फाइनल में भारत ने पहले हाफ में 22-16 की बढ़त बनाई, लेकिन दूसरे हाफ में ईरान ने जोरदार वापसी करते हुए अंतर कम कर दिया। जब मुकाबला 27-26 तक पहुंच गया, तब संजू देवी की सुपर रेड ने भारतीय टीम के पक्ष में फिर से momentum बनाया। इसके बाद भारत ने अपनी बढ़त संभाली और स्वर्ण पदक पर कब्जा किया।
यानी संजू का योगदान केवल टीम का हिस्सा बनने तक सीमित नहीं रहा। निर्णायक क्षण में उनके प्रदर्शन ने मुकाबले की दिशा बदलने में भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा- आपकी मेहनत ने प्रदेश का नाम रोशन किया
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संजू देवी को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, दूरदराज के इलाकों से आने वाली प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने के अवसर मिलना जरूरी है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खेलों में प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के सामने अक्सर प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं तक पहुंच और आर्थिक सहयोग जैसी व्यावहारिक चुनौतियां होती हैं।
संजू की कहानी से गांव-कस्बों के खिलाड़ियों को क्या संदेश?
किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय पदक के बाद मिलने वाला आर्थिक सम्मान तत्काल उपलब्धि का उत्सव होता है, लेकिन इसका दूसरा प्रभाव लंबे समय में दिखाई देता है। जब किसी राज्य की खिलाड़ी को एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर सफलता के बाद सम्मान मिलता है, तो परिवार और समाज के स्तर पर खेल को लेकर सोच बदलने की संभावना बढ़ती है।
विशेषकर महिला खिलाड़ियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है। कबड्डी जैसे खेल में लंबे समय तक अभ्यास, फिटनेस, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और लगातार प्रदर्शन के लिए परिवार तथा संस्थागत सहयोग की जरूरत होती है।
संजू देवी की उपलब्धि ऐसे युवाओं को यह भरोसा दे सकती है कि खेल में बेहतर प्रदर्शन करने पर पहचान के साथ आर्थिक और संस्थागत समर्थन के रास्ते भी खुल सकते हैं।
अब चुनौती सिर्फ सम्मान की नहीं, अगली प्रतिभाओं को तैयार करने की
किसी एक खिलाड़ी को पुरस्कार देना उपलब्धि का सम्मान है, लेकिन खेल व्यवस्था की असली परीक्षा इस बात से होती है कि ऐसी सफलता के बाद कितने नए खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।
छत्तीसगढ़ में अगर संजू देवी की सफलता को व्यापक खेल नीति से जोड़ा जाता है, तो स्कूल और जिला स्तर पर कबड्डी प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों की उपलब्धता, नियमित प्रतियोगिताएं, खेल मैदान, महिला खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित सुविधाएं और प्रतिभा पहचान कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एक एशियन गेम्स पदक एक खिलाड़ी की कहानी बदलता है; मजबूत खेल ढांचा आने वाली पूरी पीढ़ी की दिशा बदल सकता है।
51 लाख की घोषणा से आगे बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री निवास में संजू देवी का सम्मान और 51 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि राज्य की खेल प्रतिभाओं के लिए एक सार्वजनिक संदेश भी है कि अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को पहचान और आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
संजू देवी ने सम्मान के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह प्रोत्साहन उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।



