हड्डियां कमजोर होने से पहले शरीर देता है संकेत? जानिए बोन डेंसिटी घटने के कारण और बचाव के तरीके
नई दिल्ली। हड्डियों की कमजोरी को अक्सर उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समस्या यह है कि बोन डेंसिटी कम होने की प्रक्रिया लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के चल सकती है और कई लोगों को इसका पता तब चलता है, जब मामूली गिरने या चोट से फ्रैक्चर हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस को इसी वजह से “साइलेंट” बीमारी कहा जाता है।
हड्डियां स्थिर ढांचा नहीं हैं। शरीर में लगातार पुरानी हड्डी टूटने और नई हड्डी बनने की प्रक्रिया चलती रहती है। उम्र बढ़ने के साथ जब हड्डी का नुकसान बनने की तुलना में ज्यादा होने लगता है, तो बोन मिनरल डेंसिटी और हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। यही स्थिति आगे चलकर ऑस्टियोपीनिया या ऑस्टियोपोरोसिस का रूप ले सकती है।
सिर्फ उम्र नहीं, रोजमर्रा की आदतें भी तय करती हैं हड्डियों की ताकत
बोन डेंसिटी कम होने का कारण हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। बढ़ती उम्र और महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन में कमी महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं। इसके अलावा कम बॉडी वेट, परिवार में हिप फ्रैक्चर या ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास, धूम्रपान, ज्यादा शराब, लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता और कुछ बीमारियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी हड्डियों पर असर डाल सकता है। उदाहरण के तौर पर लंबे समय तक ग्लूकोकॉर्टिकोइड यानी स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल बोन लॉस से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी पुरानी बीमारी के लिए नियमित दवा लेने वाले व्यक्ति को अपनी दवा खुद से बंद करने के बजाय डॉक्टर से उसके संभावित प्रभाव के बारे में बात करनी चाहिए।
कैल्शियम जरूरी है, लेकिन पूरी कहानी सिर्फ कैल्शियम की नहीं
हड्डियों के स्वास्थ्य में कैल्शियम और विटामिन D की भूमिका महत्वपूर्ण है। शरीर को पर्याप्त कैल्शियम न मिलने पर वह हड्डियों से कैल्शियम लेना शुरू कर सकता है, जिससे समय के साथ हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। विटामिन D शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है।
दूध, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां और कैल्शियम से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ भी उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत समान नहीं होती। इसलिए बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के लगातार हाई-डोज कैल्शियम या विटामिन D सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं है।
NIH के अनुसार सामान्य वयस्कों में कैल्शियम की जरूरत उम्र और लिंग के अनुसार बदलती है; उदाहरण के लिए 19 से 50 वर्ष के वयस्कों के लिए 1,000 मिलीग्राम प्रतिदिन और 50 वर्ष से अधिक महिलाओं तथा 70 वर्ष से अधिक पुरुषों के लिए 1,200 मिलीग्राम प्रतिदिन की मात्रा दी गई है।
सिर्फ चलना नहीं, मांसपेशियों को मजबूत करना भी जरूरी
बोन हेल्थ की चर्चा में अक्सर खानपान पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग हड्डियों तथा मांसपेशियों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। नियमित व्यायाम संतुलन और मांसपेशियों की ताकत बेहतर करने में भी मदद करता है, जिससे गिरने और फ्रैक्चर का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को भारी वजन उठाना शुरू कर देना चाहिए। जिन लोगों की बोन डेंसिटी पहले से कम है, ऑस्टियोपोरोसिस है या फ्रैक्चर का इतिहास है, उनके लिए व्यायाम का प्रकार और तीव्रता डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से तय करना ज्यादा सुरक्षित है।
कमर दर्द या फ्रैक्चर को हमेशा सामान्य कमजोरी न समझें
ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं भी हो सकता। लेकिन बाद में रीढ़, कूल्हे या कलाई में फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्या सामने आ सकती है। कम ऊंचाई से गिरने जैसी मामूली चोट में फ्रैक्चर होना विशेष रूप से जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
लंबे समय में कद कम होना या पीठ में बदलाव भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, लक्षण, परिवार के इतिहास, दवाओं और अन्य जोखिम कारकों को देखते हुए आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
बोन डेंसिटी की जांच कब उपयोगी हो सकती है?
बोन मिनरल डेंसिटी मापने के लिए DXA या DEXA स्कैन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली जांच है। इसमें आम तौर पर कूल्हे और रीढ़ जैसे हिस्सों की बोन डेंसिटी मापी जाती है।
स्क्रीनिंग हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। उदाहरण के लिए USPSTF 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस स्क्रीनिंग की सिफारिश करता है। 65 वर्ष से कम उम्र की पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं में पहले जोखिम कारकों का आकलन करने और जरूरत होने पर DXA कराने की सलाह दी जाती है। पुरुषों में नियमित स्क्रीनिंग को लेकर मौजूदा प्रमाण पर्याप्त नहीं माने गए हैं, इसलिए चिकित्सकीय जोखिम आकलन महत्वपूर्ण रहता है।
असली बचाव बचपन और युवावस्था से शुरू होता है
हड्डियों की सेहत का मतलब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है। शरीर जीवन के शुरुआती वर्षों में मजबूत बोन मास बनाने की दिशा में काम करता है। इसलिए बचपन और युवावस्था में पर्याप्त पोषण, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D और नियमित शारीरिक गतिविधि भविष्य की हड्डियों के लिए आधार तैयार करते हैं।
बाद की उम्र में लक्ष्य केवल बोन डेंसिटी बढ़ाना नहीं, बल्कि हड्डियों के नुकसान को नियंत्रित करना, मांसपेशियों को मजबूत रखना और गिरने से बचाव करना भी है।



