Ram-Nami National Film Award: छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा को राष्ट्रीय पहचान, ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री सम्मान
रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी एक कहानी अब राष्ट्रीय सिनेमा के सबसे बड़े मंचों में अपनी जगह बना चुकी है। रामनामी समाज पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिला है। फिल्म का निर्देशन भारतबाला गणपति ने किया है और इसका निर्माण BBP Studio Virtual Bharat Pvt. Ltd. ने किया है।
यह सम्मान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर किसी क्षेत्रीय समुदाय की जीवनशैली, आस्था और सांस्कृतिक पहचान को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से पहचान मिली है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताते हुए फिल्म के निर्देशक और पूरी टीम को बधाई दी है।
पुरस्कार से आगे की कहानी क्या है?
‘राम-नामी’ की उपलब्धि को केवल फिल्म पुरस्कार के रूप में देखना इसकी व्यापकता को सीमित कर देगा। डॉक्यूमेंट्री सिनेमा की खासियत यह है कि वह उन समुदायों और परंपराओं को भी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचा सकता है, जिनकी चर्चा मुख्यधारा के मनोरंजन माध्यमों में अपेक्षाकृत कम होती है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की ज्यूरी ने वर्ष 2024 के लिए ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री चुना। आधिकारिक सूची में इसे Best Documentary श्रेणी में शामिल किया गया है और फिल्म को रजत कमल तथा ₹2 लाख का पुरस्कार निर्धारित है।
यानी छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा अब राष्ट्रीय सिनेमा के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुकी है।
रामनामी समाज की परंपरा क्यों खास है?
रामनामी समाज छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इस समुदाय की पहचान राम नाम के प्रति गहरी आस्था और उससे जुड़े विशिष्ट धार्मिक-सामाजिक आचरण से होती है।
ऐसी परंपराओं की खासियत यह है कि इन्हें केवल धार्मिक पहचान के रूप में समझना पर्याप्त नहीं होता। इनके भीतर सामाजिक इतिहास, सामुदायिक जीवन, लोक-अभिव्यक्ति और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृति भी जुड़ी होती है।
यही वह क्षेत्र है जहां डॉक्यूमेंट्री सिनेमा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कैमरा जब किसी समुदाय की रोजमर्रा की जिंदगी, मान्यताओं और परंपराओं को दर्ज करता है तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक तरह का दृश्य दस्तावेज तैयार करता है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण?
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों को सम्मान मिला है। ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिलना इसी व्यापक क्षेत्रीय विविधता का हिस्सा है। इस संस्करण में मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु और अन्य भाषाई-सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों की फिल्मों को भी विभिन्न श्रेणियों में पहचान मिली।
इसका एक बड़ा संकेत यह है कि राष्ट्रीय सिनेमा केवल बड़े बजट की फीचर फिल्मों तक सीमित नहीं है। किसी समुदाय की कहानी, उसका इतिहास और उसकी सांस्कृतिक यात्रा भी राष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों और निर्णायक मंडल का ध्यान आकर्षित कर सकती है।
ओपी चौधरी ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने ‘राम-नामी’ को सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि फिल्म के जरिए प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा, आस्था और रामनामी समाज की जीवनशैली को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
उन्होंने निर्देशक भारतबाला गणपति सहित पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि प्रदेश की संस्कृति तथा सामाजिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाली रचनात्मक पहलें छत्तीसगढ़ की पहचान को व्यापक बनाने में मदद करती हैं।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ की उपलब्धि को लेकर छत्तीसगढ़ में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
फिल्म से पर्यटन और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण को भी मिल सकता है अवसर
किसी लोक-संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का प्रभाव केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहता। यदि ऐसी फिल्मों को व्यापक दर्शक वर्ग मिलता है तो संबंधित क्षेत्र की संस्कृति, लोककला और परंपराओं में लोगों की रुचि बढ़ सकती है।
छत्तीसगढ़ के लिए इसका एक संभावित महत्व सांस्कृतिक पर्यटन से भी जुड़ता है। हालांकि किसी फिल्म को पुरस्कार मिलना अपने आप पर्यटन बढ़ने की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे किसी कम चर्चित सांस्कृतिक विरासत के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर जिज्ञासा पैदा हो सकती है।
इसके साथ ही ऐसे सम्मान स्थानीय परंपराओं के दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित कर सकते हैं। मौखिक परंपराओं, लोकगीतों, रीति-रिवाजों और समुदायों की जीवनशैली को रिकॉर्ड करने का काम आने वाले समय में सांस्कृतिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
पुरस्कार की आधिकारिक जानकारी
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए वर्ष 2024 की फिल्मों पर विचार किया गया था। पुरस्कारों की घोषणा 18 जुलाई 2026 को की गई थी। आधिकारिक सूची में ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में दर्ज किया गया है। फिल्म के निर्माता BBP Studio Virtual Bharat Pvt. Ltd. और निर्देशक भारतबाला गणपति हैं।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर 2026 को विजेताओं को सम्मानित किया। इस बार समारोह नई दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर में आयोजित किया गया।
अब आगे क्या?
‘राम-नामी’ की सफलता के बाद सबसे बड़ा अवसर यह है कि छत्तीसगढ़ की अन्य लोक परंपराओं और समुदायों की कहानियां भी व्यवस्थित तरीके से दर्ज और प्रस्तुत की जाएं।
राज्य में लोककला, जनजातीय परंपराओं, लोकगीतों, हस्तशिल्प और सामाजिक इतिहास से जुड़े कई ऐसे विषय हैं जिन्हें बेहतर डॉक्यूमेंटेशन और सिनेमाई प्रस्तुति की जरूरत है।



