PRSU के कॉलेजों में पढ़ाई का संकट: सितंबर तक एडमिशन, दिसंबर में परीक्षा, BA-BSc के रिजल्ट पर पड़ा असर
रायपुर। कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद छात्र को जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वह है पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय। लेकिन छत्तीसगढ़ के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) से संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया देर तक चलने और सेमेस्टर परीक्षा अपेक्षाकृत जल्दी होने के बीच यही समय सबसे बड़ा सवाल बनता दिखाई दे रहा है।
मामला केवल परीक्षा परिणाम कम आने तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद यदि प्रवेश सितंबर तक खिंचता है और प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा कुछ ही महीनों बाद आयोजित होती है, तो विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने पाठ्यक्रम पूरा कराने की चुनौती बढ़ जाती है। हाल में PRSU के प्रवेश पोर्टल को भी बीए, बीएससी और बीकॉम सहित स्नातक पाठ्यक्रमों में रिक्त सीटों के लिए दोबारा खोला गया था।
दो-तीन महीने का कैलेंडर, लेकिन पूरा सेमेस्टर
सेमेस्टर प्रणाली का उद्देश्य सालभर की पढ़ाई को छोटे अकादमिक हिस्सों में बांटकर नियमित मूल्यांकन करना है। लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा जब कक्षाएं समय पर शुरू हों और छात्रों को पूरे पाठ्यक्रम के लिए पर्याप्त शिक्षण दिवस मिलें।
देर से प्रवेश होने पर प्रथम वर्ष के छात्रों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। स्कूल से कॉलेज में आने वाले विद्यार्थी पहले ही नए विषयों, क्रेडिट सिस्टम, आंतरिक मूल्यांकन और विश्वविद्यालय परीक्षा की प्रक्रिया से परिचित हो रहे होते हैं। ऐसे में कम समय में कई विषयों की तैयारी करना उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।
यही वजह है कि शिक्षण विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रवेश कैलेंडर को परीक्षा कैलेंडर के साथ इस तरह बनाया जा रहा है कि छात्रों को वास्तविक पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिले?
आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
उपलब्ध PRSU परिणाम आंकड़ों में प्रथम सेमेस्टर के प्रदर्शन में सुधार और चुनौती, दोनों दिखाई देते हैं। 2024-25 में बीए के 16,516 परीक्षार्थियों में 5,888 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए, यानी लगभग 35 प्रतिशत। बीएससी में 9,853 परीक्षार्थियों में 3,388 विद्यार्थी पास हुए और उत्तीर्ण प्रतिशत 34.39 प्रतिशत रहा। बीकॉम का प्रदर्शन इससे बेहतर रहा और लगभग 60 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।
2025-26 के आंकड़ों में बीए का उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़कर 48.55 और बीएससी का 44.72 प्रतिशत हुआ। बीकॉम में यह 57.68 प्रतिशत रहा। यानी एक साल में बीए और बीएससी के परिणामों में सुधार दिखाई देता है, लेकिन आधे से अधिक विद्यार्थी इन दोनों पाठ्यक्रमों में अभी भी प्रथम प्रयास में उत्तीर्ण नहीं हुए।
इन आंकड़ों को केवल प्रवेश में देरी का प्रत्यक्ष परिणाम मानना सावधानी के बिना सही नहीं होगा। विद्यार्थियों की तैयारी, कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता, उपस्थिति, विषयों की कठिनाई, आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा पैटर्न जैसे कई कारण भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अकादमिक कैलेंडर निश्चित रूप से उन कारकों में से एक है, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।
पहले वर्ष के छात्रों पर असर ज्यादा
प्रथम सेमेस्टर कॉलेज जीवन की शुरुआत होता है। यहां विद्यार्थी को केवल विषय नहीं पढ़ने होते, बल्कि नई शिक्षा व्यवस्था को समझना भी होता है।
स्कूल में बोर्ड परीक्षा तक पहुंचने वाला विद्यार्थी कॉलेज में आने के बाद स्व-अध्ययन, असाइनमेंट, प्रेजेंटेशन, प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन जैसी अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरता है। अगर इन सभी के बीच परीक्षा की तैयारी के लिए समय सीमित हो जाए, तो कमजोर आधार वाले विद्यार्थियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
इसीलिए विशेषज्ञों की ओर से प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कुछ देर से कराने और प्रवेश प्रक्रिया को पहले पूरा करने की मांग सामने आई है।
12वीं का रिजल्ट आते ही शुरू हो प्रवेश प्रक्रिया
कॉलेज प्रवेश की समय-सीमा को सुधारने का एक व्यावहारिक रास्ता यह हो सकता है कि 12वीं के परिणाम आने के तुरंत बाद स्नातक प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इससे कॉलेजों को कक्षाएं शुरू करने और पाठ्यक्रम के लिए अधिक शिक्षण दिवस मिल सकते हैं।
PRSU की अपनी 2024 की अकादमिक समय-सारणी में प्रथम सेमेस्टर के लिए कक्षाएं जुलाई से शुरू करने और आंतरिक परीक्षाओं को अगस्त-सितंबर में रखने का कार्यक्रम दर्ज था। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर अकादमिक गतिविधियां शुरू करना विश्वविद्यालय स्तर पर कैलेंडर का हिस्सा रहा है।
मुद्दा अब इस व्यवस्था को वास्तविक प्रवेश प्रक्रिया से बेहतर तरीके से जोड़ने का है।
सिर्फ रिजल्ट सुधारना समाधान नहीं
यदि किसी विश्वविद्यालय में लगातार बड़ी संख्या में विद्यार्थी ATKT या अनुत्तीर्ण स्थिति में पहुंच रहे हैं, तो केवल अतिरिक्त परीक्षा आयोजित करना दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जा सकता। असली सुधार उस प्रक्रिया में होना चाहिए जो विद्यार्थी को परीक्षा तक पहुंचाती है।
इसके लिए प्रवेश की अंतिम तारीख, कक्षाओं की शुरुआत, शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम पूरा होने की स्थिति, आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा की तारीख—इन सभी को एक ही अकादमिक कैलेंडर के हिस्से के रूप में देखना होगा।
PRSU के आधिकारिक परीक्षा पोर्टल पर सेमेस्टर परिणाम और पुनर्मूल्यांकन/रीटोटलिंग से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे परीक्षा परिणाम की प्रक्रिया का एक औपचारिक ढांचा स्पष्ट होता है।
आगे चुनौती यह है कि NEP की सेमेस्टर व्यवस्था केवल परीक्षा लेने तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को उस व्यवस्था के अनुरूप पर्याप्त कक्षा समय, नियमित मूल्यांकन और गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर भी मिले।



