Raigarh News: संबलपुरी में पेड़ कटाई पर बड़ा एक्शन, जमीन के दस्तावेजों को लेकर 5 लोगों से जवाब तलब
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के संबलपुरी क्षेत्र में पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला अब राजस्व जांच के दायरे में आ गया है। मामले में प्रशासन ने केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित रहने के बजाय जमीन के स्वामित्व, सरकारी पट्टे से हुए आवंटन और उसके बाद हुए भूमि अंतरण के दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की है। एसडीएम की ओर से पांच लोगों को नोटिस जारी कर संबंधित अभिलेखों के साथ स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
यह मामला इसलिए अहम है, क्योंकि जांच में सामने आए राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि का मूल दर्जा सरकारी भूमि और छोटे-बड़े झाड़ के जंगल की श्रेणी से जुड़ा बताया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि भूमि का आवंटन, बाद में हुए विक्रय और उसके उपखंडों के अंतरण की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हुई या नहीं।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन पर उठे सवाल
प्रशासन की कार्रवाई संबलपुरी गांव के खसरा नंबर 251 से संबंधित है। उपलब्ध जांच विवरण के मुताबिक, अधिकार अभिलेख में इस खसरे का कुल रकबा 8.79 एकड़ दर्ज है और भूमि को छोटे-बड़े झाड़ के जंगल मद की शासकीय भूमि के रूप में उल्लेखित किया गया है।
राजस्व अभिलेखों में यह भी उल्लेख है कि इस जमीन के एक हिस्से, खसरा नंबर 251-2, का रकबा 2.023 हेक्टेयर था। इसे 8 फरवरी 1982 को पारित राजस्व आदेश के तहत मंगल सिंह को शासकीय पट्टे के माध्यम से दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद जमीन के अलग-अलग हिस्सों के विक्रय और अंतरण का विवरण रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। नोटिस में 1995 के पंजीकृत विक्रय विलेख और 14 नवंबर 2022 को निष्पादित भूमि अंतरण दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है। अब प्रशासन इन लेन-देन की वैधानिक स्थिति और आवश्यक अनुमतियों की जांच कर रहा है।
बालाजी बिल्डकान से जुड़े भूमि रिकॉर्ड की जांच
नोटिस में दिए गए विवरण के अनुसार, संबंधित भूमि के कुछ हिस्से वर्तमान राजस्व अभिलेखों में बालाजी बिल्डकान के भागीदार दीपक कुमार अग्रवाल के नाम दर्ज बताए गए हैं। जांच रिपोर्ट में खसरा नंबर 251-2 और उसके उपखंडों 251-3 तथा 251-4 के भूमि रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है।
एसडीएम ने मंगल सिंह, पार्वती देवी, लेखा लाठ, प्रद्युम कुमार लाठ और संबंधित पक्षों से भूमि के अंतरण तथा पेड़ों की कटाई के संबंध में दस्तावेजों सहित अपना पक्ष रखने को कहा है। प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होना जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नोटिस पाने वाले सभी लोग किसी गैरकानूनी गतिविधि में दोषी पाए गए हैं।
मामले में अंतिम स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब, मूल राजस्व अभिलेखों और सक्षम अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
भू-राजस्व कानून के तहत अनुमति क्यों है महत्वपूर्ण?
नोटिस में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165(7-ख) के प्रावधान का उल्लेख किया गया है। नोटिस के अनुसार, सरकारी पट्टे या प्रशासनिक आवंटन के जरिए प्राप्त कुछ श्रेणियों की भूमि का अंतरण निर्धारित शर्तों और सक्षम राजस्व प्राधिकारी की लिखित अनुमति के अधीन हो सकता है।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी शर्तों पर आवंटित जमीन का उपयोग और उसका हस्तांतरण नियमों के अनुरूप हो। इसलिए केवल पंजीकृत विक्रय विलेख का होना ही हर परिस्थिति में पर्याप्त नहीं माना जा सकता; संबंधित भूमि पर लागू कानूनी प्रतिबंधों और आवश्यक अनुमतियों की भी जांच जरूरी होती है।
इस मामले में प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि जमीन किस शर्त पर आवंटित हुई थी, बाद के विक्रय के समय कौन-से नियम लागू थे और आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही, पेड़ों की कटाई के लिए किसी अलग अनुमति की आवश्यकता थी या नहीं, इसकी स्थिति भी जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होनी चाहिए।
पेड़ों की कटाई का मामला पर्यावरण के लिहाज से भी अहम
भूमि के दस्तावेजों की जांच के साथ पेड़ों की कथित अवैध कटाई का पहलू भी महत्वपूर्ण है। पेड़ों की कटाई का असर केवल किसी भूखंड की हरियाली तक सीमित नहीं रहता। इससे मिट्टी का संरक्षण, स्थानीय जैव विविधता, वर्षा जल का जमीन में समावेश और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, इस मामले में कितने पेड़ काटे गए, कटाई के लिए अनुमति थी या नहीं और इससे कितना पर्यावरणीय नुकसान हुआ—इन सवालों का उत्तर उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इन बिंदुओं पर निष्कर्ष निकालने के लिए मौके की जांच, संबंधित अनुमति-पत्रों और अन्य साक्ष्यों की जरूरत होगी।
यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। दूसरी ओर, यदि दस्तावेजों से प्रक्रिया वैध साबित होती है, तो प्रशासन को उसी आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
अब आगे क्या होगा?
नोटिस पाने वाले पक्षों को दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देना होगा। इसके बाद प्रशासन भूमि के मूल आवंटन, बिक्री और अंतरण की कड़ियों का मिलान कर सकता है। जरूरत पड़ने पर मूल बंदोबस्त अभिलेखों, पट्टा आदेशों, पंजीकृत दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के निष्कर्षों का परीक्षण भी महत्वपूर्ण होगा।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसमें दो अलग लेकिन आपस में जुड़े प्रश्न हैं—क्या भूमि का अंतरण नियमों के अनुरूप हुआ और क्या पेड़ों की कटाई वैध अनुमति के तहत की गई? दोनों का जवाब दस्तावेजों और जांच के आधार पर सामने आना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांगा है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।




