Korba News: अवैध महुआ शराब पर बड़ा प्रहार, 3 आरोपी गिरफ्तार; 45 किलो लाहन जब्त
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अवैध महुआ शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग ने दीपका और हरदीबाजार क्षेत्र में कार्रवाई की है। तीन अलग-अलग मामलों में तीन लोगों को पकड़कर कुल 26.7 लीटर महुआ शराब और 45 किलो महुआ लाहन जब्त किया गया। कार्रवाई आबकारी वृत्त दीपका की टीम ने की। हालांकि, अवैध शराब की समस्या का स्थायी समाधान केवल छापेमारी से नहीं, बल्कि नियमित निगरानी और स्थानीय स्तर पर शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई से ही संभव होगा।
तीन ठिकानों पर छापेमारी, शराब और लाहन बरामद
आबकारी विभाग के अनुसार, पहली कार्रवाई दीपका के ज्योतिनगर में की गई। यहां 26 वर्षीय सोमनाथ यादव के कब्जे से 9 लीटर महुआ शराब मिलने की जानकारी दी गई है। विभाग का कहना है कि संबंधित ठिकाना शासकीय मदिरा दुकान से लगभग 500 मीटर की दूरी पर था और वहां कथित रूप से अवैध बिक्री की जा रही थी।
दूसरी कार्रवाई हरदीबाजार थाना क्षेत्र के मुड़ापार में हुई। विभाग के मुताबिक, 37 वर्षीय जन सिंह धनवार के पास से 9.2 लीटर महुआ शराब और 45 किलो महुआ लाहन बरामद किया गया। इसी इलाके में की गई तीसरी कार्रवाई में 23 वर्षीय गणेश धनवार के कब्जे से 8.5 लीटर महुआ शराब जब्त की गई।
तीनों मामलों में विभाग ने आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत कार्रवाई की है। आरोपों से संबंधित अंतिम कानूनी स्थिति आगे की प्रक्रिया और साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
45 किलो महुआ लाहन की बरामदगी क्यों अहम?
इस कार्रवाई में शराब के साथ महुआ लाहन का मिलना भी महत्वपूर्ण है। लाहन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से महुआ शराब बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है। इसकी बरामदगी से यह जांचने में मदद मिल सकती है कि संबंधित स्थानों पर केवल शराब का भंडारण या बिक्री हो रही थी, अथवा शराब बनाने की गतिविधि भी जुड़ी हुई थी।
हालांकि, केवल लाहन की बरामदगी के आधार पर उत्पादन की पूरी प्रक्रिया या उसके पैमाने के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए जांच में मिले अन्य साक्ष्यों और विभागीय विवरण का महत्व रहेगा।
महुआ छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पारंपरिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। लेकिन पारंपरिक उपयोग और नियमों के विरुद्ध शराब का निर्माण या कारोबार अलग-अलग विषय हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कानून का पालन सुनिश्चित हो और कार्रवाई स्पष्ट साक्ष्यों के आधार पर की जाए।
अवैध शराब से परिवारों पर पड़ने वाला असर
अवैध शराब की बिक्री का मुद्दा केवल आबकारी कानून तक सीमित नहीं रहता। कई परिवारों में शराब की लत, घरेलू खर्च पर दबाव, विवाद और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं। जिले की महिलाओं द्वारा समूह में कलेक्ट्रेट पहुंचकर अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ शिकायत किए जाने की जानकारी बताती है कि यह विषय स्थानीय समुदाय के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई का मूल्यांकन केवल गिरफ्तारियों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि शिकायत वाले क्षेत्रों में बिक्री के ठिकाने दोबारा तो सक्रिय नहीं हो रहे, स्थानीय लोगों को शिकायत दर्ज कराने में कितनी आसानी है और कार्रवाई के बाद समस्या में वास्तविक कमी आई या नहीं।
आबकारी टीम की कार्रवाई
दीपमाला लक्षवानी, आबकारी उपनिरीक्षक, वृत्त दीपका के नेतृत्व में छापेमारी की गई। टीम में आबकारी मुख्य आरक्षक दसराम सिदार और आबकारी आरक्षक अभिषेक चौहान शामिल थे।
विभाग का कहना है कि जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध महुआ शराब की बिक्री के खिलाफ अभियान जारी है। आगे इस अभियान का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमित गश्त, स्थानीय सूचनाओं पर कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को कितनी निरंतरता से आगे बढ़ाया जाता है।
स्थायी समाधान के लिए क्या जरूरी?
अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण के लिए छापेमारी जरूरी है, लेकिन इसके साथ कुछ अन्य कदम भी प्रभावी हो सकते हैं। संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी, नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और बार-बार सामने आने वाले ठिकानों की समीक्षा से प्रवर्तन मजबूत हो सकता है। परिवारों में शराब से जुड़ी समस्याओं के लिए जागरूकता और सहायता के विकल्प भी महत्वपूर्ण हैं।
कोरबा में हुई यह कार्रवाई अवैध शराब के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। अब यह देखना अहम होगा कि ऐसे कदमों से संबंधित इलाकों में अवैध बिक्री पर कितना प्रभाव पड़ता है और स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान किस हद तक हो पाता है।




