प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत: चौथी मंजिल से गिरने की घटना में कई सवाल, जांच से खुलेगा पूरा सच
वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने वृंदावन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरु कृपा कुंज की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और फॉरेंसिक जांच शुरू की है। शुरुआती पुलिस जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होने की बात सामने आई है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर दूसरे पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
मौत से पहले क्या हुआ, यही जांच का सबसे बड़ा सवाल
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि मृतक के शरीर पर चोटों के निशान मिलने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में शरीर के निजी अंग पर गंभीर चोट और कमरे में खून से सना ग्राइंडर मिलने का भी उल्लेख है। हालांकि, इन परिस्थितियों का वास्तविक संबंध मौत से कैसे है, यह अभी जांच का विषय है। केवल इन तथ्यों के आधार पर हत्या या आत्महत्या का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि चोटें गिरने से पहले लगी थीं या गिरने के दौरान हुईं। फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और घटनास्थल से मिले साक्ष्य इस सवाल का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
CCTV फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा
घटना के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, CCTV में दीपक के इमारत से गिरने की गतिविधि रिकॉर्ड होने की बात कही गई है। हालांकि, फुटेज में किसी व्यक्ति के गिरने की घटना दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उससे पहले कमरे में क्या हुआ था।
जांच में घटनास्थल की टाइमलाइन, कमरे में मौजूद वस्तुएं, फोन की गतिविधियां, CCTV फुटेज और फॉरेंसिक नमूनों को एक साथ देखा जाना जरूरी होगा। यही कड़ियां यह स्पष्ट कर सकती हैं कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों ने दावा किया है कि दीक्षा लेने के बाद दीपक का परिवार से संपर्क काफी कम हो गया था। परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें कई मौकों पर दीपक से मिलने नहीं दिया गया। इन आरोपों को लेकर परिवार ने पुलिस से जांच की मांग की है।
लेकिन परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए, अंतिम तथ्य नहीं।
यही वजह है कि इस मामले में आश्रम प्रबंधन की भूमिका से जुड़े सवालों का जवाब भी दस्तावेजों, CCTV, कॉल रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।
पुलिस के सामने जांच की कई अहम कड़ियां
ऐसे मामले में जांच सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं रहती कि व्यक्ति इमारत से गिरा या नहीं। पुलिस को यह भी पता लगाना होता है कि घटना से पहले मृतक कहां था, उसके कमरे में कौन-कौन सी वस्तुएं थीं, उसके फोन पर आखिरी गतिविधियां क्या थीं और घटनास्थल पर किसी दूसरे व्यक्ति की मौजूदगी के संकेत मिलते हैं या नहीं।
मथुरा पुलिस की शुरुआती जानकारी में दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की पहचान जबलपुर निवासी के रूप में हुई है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और परिवार को सूचना देने की बात कही है।
कौन थे रसिक दुलारी शरण?
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दीपक लोधी मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और करीब दो साल पहले वृंदावन आए थे। बाद में उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और रसिक दुलारी शरण नाम से रहने लगे। रिपोर्टों में उनकी उम्र करीब 25-26 वर्ष बताई गई है।
वृंदावन में उनके रहने और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी अब पुलिस जांच के दौरान सामने आ सकती है। परिवार से संपर्क, आश्रम में उनकी दिनचर्या और घटना से पहले की परिस्थितियां जांच के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिलेगी दिशा
इस मामले में सोशल मीडिया और अलग-अलग रिपोर्टों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच का इंतजार करना महत्वपूर्ण है। शरीर पर मिली चोटों की प्रकृति, चोटों का समय, मौत का वास्तविक कारण और घटनास्थल के वैज्ञानिक साक्ष्य जांच की दिशा तय करेंगे।



