ईरान के बीच बढ़ा इजरायल-UAE संपर्क, नेतन्याहू की गुप्त अबू धाबी यात्रा ने खड़े किए बड़े सवाल
तेल अवीव/अबू धाबी। मध्य पूर्व में जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अचानक और गोपनीय अबू धाबी यात्रा ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू ने 27 सितंबर को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। Reuters ने भी एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से इस मुलाकात की पुष्टि की है, हालांकि दोनों सरकारों की ओर से बैठक का विस्तृत आधिकारिक ब्यौरा तत्काल सामने नहीं आया।
इस मुलाकात की अहमियत केवल इजरायल-UAE संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही है। मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष और ईरान से जुड़े सुरक्षा सवालों के बीच दोनों देशों के बीच खुफिया तथा रणनीतिक समन्वय पहले से ही महत्वपूर्ण रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बैठक में ईरान प्रमुख मुद्दों में शामिल था। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस यात्रा में ईरान के खिलाफ किसी नई सैन्य कार्रवाई का फैसला हुआ है।
चार घंटे की मुलाकात, लेकिन एजेंडा पर बनी गोपनीयता
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नेतन्याहू निजी विमान से अबू धाबी पहुंचे और करीब चार घंटे UAE में रहे। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब इजरायल और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।
इस तरह की उच्चस्तरीय बैठक को केवल औपचारिक कूटनीतिक संपर्क मानना आसान नहीं है। UAE खाड़ी क्षेत्र की महत्वपूर्ण शक्ति है और ईरान के साथ उसके अपने सुरक्षा तथा आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। इसलिए इजरायल के साथ किसी भी रणनीतिक बातचीत में ईरान, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों और संभावित सैन्य जोखिम जैसे मुद्दे स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिर भी बैठक का वास्तविक एजेंडा क्या था, इस पर आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी है। यही वजह है कि ईरान को लेकर सामने आ रही खबरों को फिलहाल रिपोर्टों और सूत्रों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अक्टूबर 7 से जुड़ी पुरानी चेतावनियों का मुद्दा भी चर्चा में
नेतन्याहू की UAE यात्रा ऐसे समय हुई है जब इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले मिली कथित चेतावनियों को लेकर बहस फिर तेज है।
हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि UAE की खुफिया एजेंसी ने सितंबर 2023 में इजरायली सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को हमास की संभावित बड़ी कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी थी। इसके बाद UAE राष्ट्रपति की ओर से नेतन्याहू से संपर्क किए जाने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। हालांकि, इन दावों पर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आए हैं और नेतन्याहू के कार्यालय ने पहले ऐसी रिपोर्टों को खारिज किया है।
यही पृष्ठभूमि मौजूदा मुलाकात को और संवेदनशील बनाती है। Associated Press की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू और UAE राष्ट्रपति की बैठक में कथित तौर पर अक्टूबर 7 से पहले चेतावनी दिए जाने की रिपोर्टों पर भी चर्चा हुई और नेतन्याहू ने UAE नेता से ऐसी रिपोर्टों का खंडन करने का अनुरोध किया था। UAE के विदेश मंत्रालय ने बैठक पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन दोनों देशों के बीच खुले और सीधे संपर्क की बात कही है।
क्या ईरान के खिलाफ कोई नया मोर्चा तैयार हो रहा है?
नेतन्याहू की यात्रा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इजरायल और UAE ईरान को लेकर अपने सुरक्षा समन्वय को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। रणनीतिक समन्वय बढ़ना और किसी सैन्य अभियान की तैयारी होना एक ही बात नहीं है। खाड़ी देशों के लिए ईरान से जुड़ी किसी भी स्थिति में मिसाइल हमले, ड्रोन, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। दूसरी तरफ इजरायल की प्राथमिकता ईरान की सैन्य क्षमता और उससे जुड़े क्षेत्रीय नेटवर्क पर नजर बनाए रखना रही है।
इसलिए ऐसी बैठक का महत्व तत्काल सैन्य फैसले से ज्यादा व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा तालमेल के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।
आगे क्या बदल सकता है?
यदि इजरायल और UAE के बीच ईरान को लेकर सुरक्षा समन्वय वास्तव में बढ़ता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। खाड़ी क्षेत्र में सऊदी अरब, ओमान, कतर और अन्य देशों की कूटनीतिक गणनाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं।
दूसरी ओर, यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को सैन्य जोखिम से बचाना होगी। तेल और गैस आपूर्ति, समुद्री परिवहन तथा निवेश वातावरण पर भी क्षेत्रीय तनाव का असर पड़ सकता है।



