SIR विवाद के बीच केजरीवाल का बड़ा बयान, CEC ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल; 2 अक्टूबर के आंदोलन को लेकर कही ये बात
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग का मुद्दा उठाया है।
एक टीवी इंटरव्यू में केजरीवाल ने कहा कि यदि विरोध का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करना है, तो केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तक आंदोलन को सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी इस्तीफे की मांग उठाने की बात कही।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन ने पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया था।
केजरीवाल ने SIR को लोकतांत्रिक बहस का मुद्दा बताया
केजरीवाल ने बातचीत के दौरान SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, जिनसे स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त दिल्ली में बैठकर पूरे देश की मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों को केजरीवाल के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की आधिकारिक मतदाता सेवा प्रणाली में SIR-2026 के लिए मतदाताओं को अपना नाम खोजने, पुराने SIR रिकॉर्ड देखने, ड्राफ्ट मतदाता सूची डाउनलोड करने और आवेदन की स्थिति जांचने जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
CJP के आंदोलन से जुड़ा विवाद भी बढ़ा
SIR को लेकर विरोध करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बनाया है। संगठन ने 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है और बाद में देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन की बात कही है।
केजरीवाल ने इसी आंदोलन के संदर्भ में कहा कि बार-बार किसी अधिकारी के इस्तीफे की मांग करने के बजाय राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही पर सवाल उठाए जाने चाहिए। उनके बयान का मुख्य राजनीतिक संदेश यह रहा कि SIR से जुड़े विवाद को केवल चुनाव आयोग बनाम विरोध करने वाले संगठनों के बीच का मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए।
असली बहस मतदाता सूची की पारदर्शिता पर
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजनीतिक बयानबाजी से अलग मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता है। भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव की शुरुआत मतदान के दिन से नहीं, बल्कि मतदाता सूची तैयार होने की प्रक्रिया से होती है।
चुनाव आयोग के अनुसार SIR-2026 के तहत मतदाताओं को अपनी जानकारी खोजने और मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड देखने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के पोर्टल पर नाम खोजने, आवेदन करने, सुधार कराने और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं।
इसलिए मौजूदा राजनीतिक विवाद में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी मतदाता का नाम हटता है या शामिल नहीं होता, तो उसके पास आपत्ति, सुधार और अपील के कितने प्रभावी रास्ते हैं और इन प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड किस तरह सार्वजनिक रूप से जांचा जा सकता है।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने फरवरी 2025 में 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
ऐसे में उनके खिलाफ लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद सीधे देश की चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा संवैधानिक पद है। हालांकि किसी राजनीतिक दल या नेता का आरोप अपने आप में आरोप की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
पंजाब पर भी नजर, AAP ने बनाई टीम
पंजाब से जुड़े सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने एक टीम तैयार की है, जो वहां SIR और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित गतिविधियों पर नजर रख रही है।
पंजाब की राजनीति के लिहाज से यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक दलों के अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब इस विवाद की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी—SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची से जुड़े शिकायतों का निपटारा और राजनीतिक दलों द्वारा सामने रखे जाने वाले ठोस दस्तावेज।
सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी साबित नहीं होती। इसके लिए नाम हटाने या जोड़ने के आंकड़े, संबंधित आवेदन, आपत्तियों का रिकॉर्ड और सक्षम चुनावी अधिकारियों के निर्णय जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग की ओर से उपलब्ध ऑनलाइन सेवाएं मतदाताओं को अपनी जानकारी स्वयं जांचने का रास्ता देती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस के साथ-साथ मतदाताओं के स्तर पर भी यह महत्वपूर्ण होगा कि वे अपनी प्रविष्टि की जांच करें और किसी गलती की स्थिति में उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करें।



