NEET PG काउंसलिंग का बड़ा अपडेट: 12 अक्टूबर से रजिस्ट्रेशन, 24 को सीट अलॉटमेंट रिजल्ट
नई दिल्ली। मेडिकल पीजी में दाखिले का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET PG 2026 काउंसलिंग का राउंड-1 शेड्यूल जारी कर दिया है। उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान की प्रक्रिया 12 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर तक चलेगी।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उम्मीदवारों को केवल रजिस्ट्रेशन की तारीख याद रखना पर्याप्त नहीं होगा। रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग, चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग—हर चरण की अलग समयसीमा है। किसी एक चरण में देरी आगे की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
10 अक्टूबर से शुरू होगी सीट मैट्रिक्स की प्रक्रिया
राउंड-1 की शुरुआत संस्थानों की ओर से सीट मैट्रिक्स के वेरिफिकेशन से होगी। यह प्रक्रिया 10 से 12 अक्टूबर तक चलेगी।
सीट मैट्रिक्स में उपलब्ध सीटों की जानकारी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उम्मीदवार इसी आधार पर कॉलेज और पाठ्यक्रम के विकल्प तय करते हैं। इसलिए चॉइस भरने से पहले उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध सीटों और अपनी पात्रता की जानकारी ध्यान से देखना जरूरी होगा।
12 अक्टूबर से रजिस्ट्रेशन, 13 अक्टूबर से चॉइस फिलिंग
उम्मीदवार 12 से 21 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान कर सकेंगे। इसके बाद 13 से 22 अक्टूबर तक कॉलेज और कोर्स के विकल्प भरने की प्रक्रिया चलेगी।
यही चरण उम्मीदवारों के लिए सबसे रणनीतिक माना जा सकता है। केवल अधिक कॉलेजों के नाम जोड़ना पर्याप्त नहीं है। रैंक, श्रेणी, उपलब्ध सीटें, पाठ्यक्रम की पसंद और भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर विकल्पों का क्रम तय करना महत्वपूर्ण होगा।
चॉइस लॉकिंग 21 और 22 अक्टूबर को होगी। इसका अर्थ है कि उम्मीदवारों को निर्धारित समय के भीतर अपने अंतिम विकल्प लॉक करने होंगे।
24 अक्टूबर को आएगा सीट अलॉटमेंट रिजल्ट
चॉइस लॉकिंग के बाद MCC सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके लिए 22 से 23 अक्टूबर तक सीट अलॉटमेंट प्रोसेसिंग होगी और 24 अक्टूबर को राउंड-1 का परिणाम जारी किया जाएगा।
सीट मिलने के बाद उम्मीदवारों के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण कॉलेज रिपोर्टिंग का होगा। चयनित उम्मीदवारों को 26 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच आवंटित संस्थान में रिपोर्ट करना होगा।
इसके बाद 3 नवंबर को ज्वाइन किए गए उम्मीदवारों के डेटा का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
पूरा शेड्यूल एक नजर में
प्रक्रिया
तारीख
सीट मैट्रिक्स वेरिफिकेशन
10–12 अक्टूबर
रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान
12–21 अक्टूबर
चॉइस फिलिंग
13–22 अक्टूबर
चॉइस लॉकिंग
21–22 अक्टूबर
सीट अलॉटमेंट प्रोसेसिंग
22–23 अक्टूबर
राउंड-1 रिजल्ट
24 अक्टूबर
कॉलेज रिपोर्टिंग
26 अक्टूबर–2 नवंबर
ज्वाइन उम्मीदवारों के डेटा का वेरिफिकेशन
3 नवंबर
किन सीटों पर लागू होगी MCC की काउंसलिंग?
MCC की काउंसलिंग के जरिए 50 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के तहत आने वाली पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया होती है। इसमें MD और MS के अलावा काउंसलिंग के दायरे में आने वाली अन्य पीजी मेडिकल सीटें भी शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त केंद्रीय विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटीज और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विस से संबंधित सीटों के लिए भी MCC की काउंसलिंग आयोजित की जाती है।
इसका मतलब है कि अलग-अलग संस्थानों और सीट श्रेणियों के नियमों को समझना उम्मीदवारों के लिए बेहद जरूरी है। किसी कॉलेज को केवल नाम देखकर विकल्प में शामिल करने के बजाय उसकी सीट कैटेगरी और पात्रता शर्तों की जांच करनी चाहिए।
फीस कितनी होगी?
दिए गए शेड्यूल के अनुसार ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए अनारक्षित और EWS उम्मीदवारों की नॉन-रिफंडेबल फीस 1,000 रुपये है। SC, ST, OBC और PwD उम्मीदवारों के लिए यह राशि 500 रुपये बताई गई है।
AIQ सीटों के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी फीस 25,000 रुपये से 10,000 रुपये तक बताई गई है, जबकि डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए नॉन-रिफंडेबल फीस 5,000 रुपये और रिफंडेबल सिक्योरिटी फीस 2 लाख रुपये है।
उम्मीदवारों को भुगतान से पहले अपने संबंधित वर्ग और सीट प्रकार के अनुसार MCC के आधिकारिक निर्देशों में लागू शुल्क की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
सीट मिलते ही दस्तावेजों की तैयारी में गलती न करें
सीट अलॉट होने के बाद कॉलेज में रिपोर्टिंग के समय दस्तावेजों की कमी परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को पहले से जरूरी प्रमाणपत्रों की फाइल तैयार रखनी चाहिए।
रिपोर्टिंग के लिए प्रमुख दस्तावेजों में शामिल हैं:
- NEET PG एडमिट कार्ड
- रिजल्ट/रैंक लेटर
- 10वीं की मार्कशीट या जन्म प्रमाण पत्र
- MBBS की मार्कशीट और डिग्री
- इंटर्नशिप सर्टिफिकेट
- वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र
- वैध फोटो आईडी
- लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र
- नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
- PwD प्रमाण पत्र, जहां लागू हो
मूल दस्तावेजों के साथ उनकी आवश्यक प्रतियां भी तैयार रखना व्यावहारिक रूप से बेहतर होगा। किसी प्रमाणपत्र की वैधता या फॉर्मेट को लेकर संदेह हो तो रिपोर्टिंग से पहले संबंधित संस्थान और MCC के निर्देश देखना चाहिए।
उम्मीदवारों के लिए सबसे अहम रणनीति
इस काउंसलिंग में सबसे बड़ी गलती केवल अंतिम तारीख पर निर्भर रहना हो सकती है। रजिस्ट्रेशन पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स की सूची पहले से तैयार करनी चाहिए।
चॉइस फिलिंग के दौरान विकल्पों का क्रम सोच-समझकर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीट अलॉटमेंट उपलब्ध सीटों और उम्मीदवार की प्राथमिकताओं समेत निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होता है।
एक और जरूरी बात यह है कि उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन के बाद अपने लॉगिन, भुगतान और चॉइस फिलिंग से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखें। अंतिम समय में वेबसाइट पर तकनीकी दबाव या दस्तावेज संबंधी कमी से बचने के लिए प्रक्रिया समय रहते पूरी करना बेहतर रहेगा।
अब उम्मीदवारों के सामने सिर्फ सीट पाने नहीं, सही विकल्प चुनने की चुनौती
पीजी मेडिकल सीट मिलना महत्वपूर्ण है, लेकिन सीट अलॉट होने के बाद भी उम्मीदवार को कॉलेज की रिपोर्टिंग, दस्तावेज सत्यापन और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया के नियमों का पालन करना होगा।
इसलिए इस बार उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज समय पर कार्रवाई और सही जानकारी है। 12 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रक्रिया में एक-एक तारीख का अपना महत्व है। खासकर चॉइस फिलिंग और लॉकिंग की समयसीमा को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
अब मेडिकल पीजी उम्मीदवारों के सामने अगले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण हैं। सही दस्तावेज, स्पष्ट प्राथमिकता सूची और निर्धारित तारीखों पर कार्रवाई—यही राउंड-1 में प्रक्रिया को सुचारु रखने की सबसे जरूरी तैयारी होगी।



