फतेहपुर में गैस सिलिंडर विस्फोट से दो मंजिला मकान ढहा, परिवार के 8 लोग मलबे में दबे
फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार शाम खाना बनाते समय हुए गैस सिलिंडर विस्फोट ने एक परिवार को भारी संकट में डाल दिया। मलवां थाना क्षेत्र के कस्बे में तेज धमाके के बाद दो मंजिला मकान भरभराकर गिर गया। हादसे के समय घर में मौजूद परिवार के आठ सदस्य मलबे में दब गए।
विस्फोट इतना तेज बताया जा रहा है कि आसपास के कुछ मकान भी इसकी चपेट में आए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर तत्काल बचाव अभियान शुरू किया।
खाना बनाते समय हुआ अचानक धमाका
जानकारी के मुताबिक, कस्बा निवासी सुरेश गुप्ता उर्फ धुन्नर सब्जी और फल बेचने का काम करते हैं। सोमवार शाम परिवार के लोग घर में खाना बनाने की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान गैस सिलिंडर में विस्फोट हो गया।
धमाके के बाद मकान का ढांचा संभल नहीं सका और दो मंजिला इमारत ढह गई। घर के भीतर मौजूद आठ लोग मलबे के नीचे फंस गए। अचानक हुई इस घटना से परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई।
स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई। पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई।
ऐसे हादसों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। भारी मलबे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए एक साथ कई स्तरों पर काम करना पड़ता है—मलबे को सावधानी से हटाना, गैस या आग के दोबारा खतरे को नियंत्रित करना और घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
आसपास के मकानों को भी नुकसान
विस्फोट के प्रभाव से आसपास स्थित कई मकान भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इससे राहत और बचाव अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच काम करते समय दोबारा मलबा गिरने का खतरा बना रहता है।
प्रशासन के सामने अब केवल परिवार को बाहर निकालने की चुनौती नहीं है, बल्कि आसपास की इमारतों की सुरक्षा का आकलन करना भी जरूरी होगा।
घरेलू गैस सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
फतेहपुर की यह घटना एक बार फिर घरेलू एलपीजी इस्तेमाल करते समय सावधानी की जरूरत को सामने लाती है। गैस सिलिंडर से जुड़ी दुर्घटनाओं में केवल सिलिंडर ही जिम्मेदार हो, यह जरूरी नहीं है। गैस पाइप, रेगुलेटर, चूल्हे की स्थिति, गैस रिसाव और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन जैसे कई कारक दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
परिवारों को समय-समय पर गैस कनेक्शन की पाइप और रेगुलेटर की स्थिति जांचनी चाहिए। गैस की गंध आने पर बिजली के स्विच ऑन या ऑफ करने से बचना, दरवाजे-खिड़कियां खोलना और गैस की सप्लाई बंद करना जरूरी सावधानियों में शामिल है।
फिलहाल फतेहपुर हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए गैस सिलिंडर में विस्फोट के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
हादसे के बाद सबसे जरूरी सवाल
इस दुर्घटना में आठ लोगों का मलबे में दबना बताता है कि घरेलू हादसा कितनी तेजी से बड़े स्तर की आपदा में बदल सकता है। आगे प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि विस्फोट किस कारण हुआ, मकान की संरचना पर उसका कितना प्रभाव पड़ा और आसपास के भवनों को कितना नुकसान पहुंचा है।



