Sub-headline: SIR की प्रारूप मतदाता सूची में नाम छूटने पर पुराने मतदाताओं को राहत। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि पहले नाम दर्ज होने के बावजूद पात्र नागरिक Form-6 के जरिए दोबारा नाम शामिल कराने का दावा कर सकते हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने वाले पुराने मतदाताओं के लिए राहत की खबर है। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन SIR के दौरान जारी प्रारूप सूची में उनका नाम शामिल नहीं हो पाया, वे अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए Form-6 जमा कर सकते हैं।
आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन मतदाताओं की आशंका दूर हो गई है, जो पहले से मतदाता होने के बावजूद Form-6 भरने में इसलिए संकोच कर रहे थे क्योंकि इसमें पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से संबंधित घोषणा होती है।
पुराने मतदाता भी भर सकते हैं Form-6
SIR के दौरान कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं, जिनका नाम पिछली मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन नई प्रारूप सूची में उनका नाम नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे मतदाताओं को अब नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 जमा करने का रास्ता उपलब्ध है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, केवल इस वजह से कि किसी व्यक्ति का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था, उसे Form-6 भरने से रोकने या उसके खिलाफ कार्रवाई करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि संबंधित व्यक्ति का नाम किसी अन्य विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो।
ECI के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी SIR-2026 के तहत Form-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की सुविधा उपलब्ध है।
धारा 31 को लेकर क्यों पैदा हुआ था भ्रम?
Form-6 में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम किसी अन्य विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है। गलत घोषणा या झूठी जानकारी देने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। Form-6 में इस कानूनी प्रावधान का स्पष्ट उल्लेख भी किया गया है।
इसी प्रावधान को लेकर उन पुराने मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनी थी, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में था, लेकिन SIR की प्रारूप सूची में नहीं आया। उन्हें आशंका थी कि Form-6 भरने पर पहली बार पंजीकरण से जुड़ी घोषणा करने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
आयोग ने इस आशंका को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 जमा कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदन में दी गई जानकारी सही हो और संबंधित व्यक्ति का नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज न हो।
दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर के आदेश का भी हवाला
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के आदेश का भी उल्लेख किया गया है। W.P.(C) No. 14955/2026, Nilotpal Datta एवं अन्य बनाम Election Commission of India एवं अन्य मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से यह आशंका जताई गई थी कि Form-6 भरने पर गलत घोषणा का आरोप लग सकता है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस आशंका को निराधार माना। आदेश में कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं तो वे Form-6 भर सकते हैं और आवेदन को कानून के अनुसार प्रक्रिया में लिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने याचिका की कार्यवाही समाप्त कर दी।
ERO को भी दी गई है जरूरी हिदायत
निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के खिलाफ धारा 31 के तहत कार्रवाई न हो कि उसका नाम पिछली मतदाता सूची में पहले से दर्ज था।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि Form-6 में दी गई किसी भी गलत जानकारी को नजरअंदाज किया जाएगा। आवेदक को सभी जरूरी जानकारियां सही देनी होंगी और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी दूसरी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज न हो। एक से अधिक स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकरण की अनुमति नहीं है।
मतदाताओं से नाम जांचने की अपील
छत्तीसगढ़ में SIR की प्रक्रिया के दौरान जिन नागरिकों को प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिल रहा है, उन्हें समय रहते अपनी स्थिति जांचने की सलाह दी गई है। नाम नहीं होने की स्थिति में पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 जमा कर सकते हैं।
मतदाता सूची में नाम होना मतदान के लिए जरूरी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है तो वह केवल पहचान पत्र दिखाकर मतदान नहीं कर सकता। ऐसे मामले में नाम शामिल कराने के लिए Form-6 के माध्यम से दावा करना होता है।
वर्तमान स्थिति
SIR की प्रारूप मतदाता सूची में नाम छूट जाने से परेशान पुराने मतदाताओं के लिए अब Form-6 के जरिए नाम शामिल कराने का रास्ता खुला है। पहले से मतदाता सूची में नाम दर्ज होना अपने आप में Form-6 भरने से रोकने का आधार नहीं है।
हालांकि, प्रत्येक आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह निर्धारित पात्रता पूरी करता हो और उसका नाम किसी अन्य विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में दर्ज न हो। आवेदन में गलत या असत्य जानकारी देने पर कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
इसलिए जिन पात्र मतदाताओं का नाम SIR की प्रारूप सूची में नहीं है, उन्हें भ्रम या डर के कारण आवेदन रोकने के बजाय निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना दावा प्रस्तुत करना चाहिए।




