Durg Betting Racket: मंथली सैलरी पर चल रहा था ऑनलाइन सट्टे का खेल, पुलिस की बड़ी कार्रवाई में 2 गिरफ्तार
क्रिकेट मैच के दौरान लगने वाले दांव अब केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन या मैच के नतीजे तक सीमित नहीं रह गए हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टे का कारोबार संगठित नेटवर्क की तरह संचालित होने लगा है, जहां तकनीकी उपकरणों से लेकर बैंक खातों और कर्मचारियों तक का इस्तेमाल किया जाता है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आया एक मामला इसी तरह के नेटवर्क की कार्यप्रणाली की ओर इशारा करता है।
कोहका के राजा गार्डन इलाके में पुलिस ने कथित ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालन के ठिकाने पर छापा मारकर दो युवकों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि दोनों युवक इस गतिविधि में मासिक वेतन पर काम कर रहे थे। पुलिस ने मौके से 4.93 लाख रुपये नकद, 18 स्मार्टफोन, तीन लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक व बैंकिंग सामग्री जब्त की है।
WINBUZZ ऐप के जरिए संचालित हो रहा था कथित सट्टा नेटवर्क
पुलिस को सूचना मिली थी कि राजा गार्डन स्थित जी-9 टावर के पास एक मकान में WINBUZZ ऐप के माध्यम से क्रिकेट सट्टे का संचालन किया जा रहा है। सूचना के बाद स्मृतिनगर चौकी, सुपेला थाना और ACCU की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, मकान में मौजूद प्रकाश हरिनखेड़े (23) और डिकेश प्रसाद तिवारी (22) को हिरासत में लिया गया। दोनों वैशाली नगर के अर्जुन नगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि मुख्य आरोपी बताए जा रहे देवेंद्र कुमार साहू के नेतृत्व में यह गतिविधि संचालित की जा रही थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार युवक नेटवर्क में वेतन लेकर काम करते थे। इससे यह संकेत मिलता है कि कथित सट्टा कारोबार में काम का बंटवारा और संचालन के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका हो सकती थी।
18 मोबाइल और 3 लैपटॉप: जब्त सामान से सामने आया कारोबार का तकनीकी ढांचा
इस कार्रवाई में सबसे उल्लेखनीय बात जब्त किए गए उपकरणों की संख्या है। पुलिस ने 18 स्मार्टफोन, तीन लैपटॉप और एक आईपैड अपने कब्जे में लिया है। इसके अलावा 4.93 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए।
जांच के दौरान 22 ATM कार्ड, 10 बैंक पासबुक, एयरटेल बैंक के चार QR कोड स्कैनर, एक वाई-फाई डिवाइस और चार होंडा एक्टिवा स्कूटर भी जब्त किए गए हैं।
इतने बड़े पैमाने पर मोबाइल और बैंकिंग उपकरणों की मौजूदगी से पुलिस को डिजिटल लेन-देन और नेटवर्क में शामिल संभावित लोगों की भूमिका की जांच करने का आधार मिला है।
ऑनलाइन सट्टे के मामलों में केवल नकदी बरामद होना पूरे कारोबार की तस्वीर नहीं बताता। यह समझना भी जरूरी होता है कि रकम किन खातों में पहुंचती थी, भुगतान किस माध्यम से होता था और अलग-अलग मोबाइल नंबरों तथा डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
मासिक वेतन पर कर्मचारी रखने का खुलासा क्यों है अहम?
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि गिरफ्तार दोनों युवक कथित तौर पर मासिक वेतन लेकर काम कर रहे थे। आमतौर पर ऑनलाइन सट्टे को व्यक्तिगत गतिविधि समझ लिया जाता है, लेकिन कर्मचारियों की मौजूदगी और कई डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल इसके संगठित रूप की ओर संकेत कर सकता है।
ऐसे नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को मोबाइल संचालन, ग्राहकों से संपर्क, लेन-देन और तकनीकी प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। हालांकि, इस मामले में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही होगा।
इस तरह के मामलों में पुलिस के सामने चुनौती केवल मौके पर मौजूद लोगों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की आर्थिक और डिजिटल कड़ियों का पता लगाना भी होता है।
दूसरे लोगों के बैंक खातों के इस्तेमाल की भी जांच
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई है कि कुछ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कथित सट्टे के लेन-देन के लिए उनकी जानकारी के बिना किया गया हो सकता है।
यह पहलू आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते, ATM कार्ड या डिजिटल भुगतान सुविधाओं का दुरुपयोग होता है, तो उसे आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसीलिए बैंकिंग दस्तावेजों और QR कोड उपकरणों की जब्ती के बाद यह पता लगाना जरूरी होगा कि इनका वास्तविक इस्तेमाल किसने किया और संबंधित खाताधारकों की भूमिका क्या थी।
किसी खाते में संदिग्ध लेन-देन मिलने मात्र से खाताधारक की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती। इसके लिए उसकी जानकारी, सहमति और वास्तविक भूमिका की जांच आवश्यक है।
मुख्य आरोपी की तलाश, नेटवर्क की अन्य कड़ियां खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों युवकों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2), 317(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों की गिरफ्तारी 2 नवंबर को की गई।
फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी देवेंद्र कुमार साहू और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की तलाश कर रही है। जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरणों की जांच से नेटवर्क के संचालन तथा पैसों के लेन-देन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सामने आने की संभावना है।
दुर्ग पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच के नतीजों पर नजर
इस कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि कथित सट्टा नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके माध्यम से कितना वित्तीय लेन-देन हुआ। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि क्या गिरफ्तार युवकों के अलावा दूसरे कर्मचारी या बैंक खाताधारक भी इस व्यवस्था से जुड़े थे।
ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल गिरफ्तारी और जब्ती पर्याप्त नहीं होती। डिजिटल साक्ष्यों की जांच, पैसों के प्रवाह का पता लगाना और नेटवर्क के वास्तविक संचालकों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।
दुर्ग में सामने आया यह मामला एक बार फिर बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित कथित अवैध गतिविधियों में तकनीक और बैंकिंग व्यवस्था का दुरुपयोग किस तरह जांच का बड़ा विषय बन सकता है। अब पुलिस की अगली कार्रवाई से ही इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और पूरे कारोबार का आकार स्पष्ट हो सकेगा।




