Recruitment Cancelled: छत्तीसगढ़ में टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने रद्द करने का फैसला रखा बरकरार
छत्तीसगढ़ में सरकारी पदोन्नति की तैयारी कर रहे कर्मचारियों के लिए स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर भर्ती से जुड़ा हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण है। विभागीय परीक्षा पास करके चयनित हुए कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है, जबकि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे पक्षों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2021 और 2022 में आयोजित स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर की सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षाओं को निरस्त करने के राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया है। अदालत ने परीक्षा के आधार पर जारी नियुक्तियों को भी रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। साथ ही शासन को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया आयोजित कर उसे जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्होंने विभागीय परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, जांच में सामने आईं गंभीर खामियां
यह परीक्षा वाणिज्यिक कर विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य विभाग के भीतर योग्य कर्मचारियों को सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से उच्च पद पर पहुंचने का अवसर देना था।
लेकिन परीक्षा के बाद अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने लगीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की, जिसमें कई ऐसी कमियां सामने आईं जिन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए।
जांच में उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया और अनुमोदन के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। कुछ उत्तरपुस्तिकाओं के पन्नों पर क्रमांक नहीं थे और वे व्यवस्थित तरीके से बंधे हुए भी नहीं पाए गए।
इसके अलावा खरीदी गई उत्तरपुस्तिकाओं और परीक्षा में उपयोग के बाद बची कॉपियों की संख्या के बीच भी अंतर दर्ज किया गया। कुछ अभ्यर्थियों के उत्तर मॉडल उत्तरों से शब्दशः मेल खाते पाए गए। इन तथ्यों ने परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह पैदा किया।
500 से अधिक अभ्यर्थियों पर पड़ा असर, कोर्ट ने क्यों माना पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि क्या अनियमितताओं के लिए केवल कुछ अभ्यर्थियों या परीक्षा प्रक्रिया के किसी विशेष हिस्से को जिम्मेदार ठहराया जा सकता था?
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि परीक्षा में 500 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे और जांच में सामने आई गड़बड़ियां व्यापक प्रकृति की थीं। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित करना संभव नहीं था कि किन अभ्यर्थियों को अनियमितताओं का लाभ मिला और किनका चयन पूरी तरह निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत हुआ।
अदालत ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा और उसके आधार पर जारी नियुक्तियों को रद्द करने के शासन के फैसले को उचित माना।
इसका एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहलू भी है। यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा और मूल्यांकन की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल हों, तो केवल चयनित उम्मीदवारों के परिणामों को देखकर पूरी प्रक्रिया की वैधता तय करना मुश्किल हो जाता है।
चयनित कर्मचारियों को क्यों नहीं मिली राहत?
सरकार के आदेश से प्रभावित कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर भर्ती रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि परीक्षा में सफल होने के बाद नियुक्ति प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं और सरकार का निर्णय उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने जांच में सामने आए तथ्यों और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की स्थिति को देखते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी भर्ती में केवल परीक्षा पास करना और नियुक्ति प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। चयन प्रक्रिया का नियमों के अनुरूप होना, मूल्यांकन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहना और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है।
अब आगे क्या होगा? नई परीक्षा से तय होगा कर्मचारियों का भविष्य
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब वाणिज्यिक कर विभाग और राज्य सरकार के सामने नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने की जिम्मेदारी है। प्रभावित कर्मचारियों के लिए यह विषय केवल पदोन्नति का नहीं, बल्कि उनके भविष्य और वर्षों की तैयारी से जुड़ा हुआ है।
नई परीक्षा आयोजित करते समय शासन को पुराने मामले से सबक लेते हुए उत्तरपुस्तिकाओं के रखरखाव, मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन और अनुमोदन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा।
डिजिटल रिकॉर्डिंग, उत्तरपुस्तिकाओं की उचित सीलिंग, मूल्यांकन की निगरानी और शिकायतों के निपटारे की स्पष्ट व्यवस्था भविष्य में ऐसी विवादित परिस्थितियों को रोकने में मदद कर सकती है।
इस मामले का प्रभाव केवल वाणिज्यिक कर विभाग तक सीमित नहीं है। प्रदेश की अन्य विभागीय भर्ती और पदोन्नति परीक्षाओं के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक संदेश है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य हैं।
अंततः सरकारी भर्ती की विश्वसनीयता केवल परिणाम घोषित करने से नहीं बनती, बल्कि इस भरोसे से बनती है कि हर अभ्यर्थी को समान अवसर मिला और चयन नियमों के अनुसार हुआ। अब निगाहें नई परीक्षा की समय-सीमा और उसके आयोजन पर रहेंगी, क्योंकि प्रभावित कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता का इंतजार है।




