बैंक खाते से 5 लाख की चौंकाने वाली निकासी: सहायक प्रबंधक पर फर्जी अंगूठे से रकम निकालने का गंभीर आरोप
अंबिकापुर के धौरपुर स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में सामने आया कथित वित्तीय फर्जीवाड़ा बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहक के भरोसे और आंतरिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक खाताधारक के खाते से करीब तीन महीनों के भीतर पांच लाख रुपये अलग-अलग तारीखों में निकाले गए और उसे इसकी जानकारी तक नहीं थी।
मामले में बैंक के सहायक प्रबंधक राजाबाबू सेमरिया के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि ग्राहक के आहरण फॉर्म पर फर्जी अंगूठा निशान लगाकर रकम निकाली गई। जांच शुरू होने के बाद पूरी पांच लाख रुपये की राशि ग्राहक के खाते में वापस जमा कराए जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि रकम लौटाने से कथित अनधिकृत निकासी का कानूनी पक्ष खत्म नहीं होता। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पैसे किसने निकाले, दस्तावेज कैसे तैयार हुए और बैंक की आंतरिक प्रक्रिया में इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे दर्ज होती रही।
तीन महीनों में चार निकासी, ग्राहक को पता तक नहीं चला
ग्राहक अशोक यादव के अनुसार, उसके बचत खाते से जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुल पांच लाख रुपये निकाले गए।
रिकॉर्ड के मुताबिक सात जनवरी को दो लाख रुपये, 20 जनवरी को 50 हजार रुपये, चार फरवरी को दो लाख रुपये और मार्च में 50 हजार रुपये की निकासी हुई।
ग्राहक को जब खाते से रकम गायब होने की जानकारी मिली तो उसने बैंक शाखा में शिकायत की और सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की।
यहीं से जांच को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। बैंक और ग्राहक द्वारा फुटेज खंगालने पर कथित तौर पर दो बड़ी निकासी में सहायक प्रबंधक की मौजूदगी सामने आई।
बाकी एक लाख रुपये की निकासी को लेकर भी जांच आगे बढ़ी। बैंक की शिकायत के अनुसार, आरोपित ने बाद में पूरी पांच लाख रुपये की रकम ग्राहक के खाते में वापस जमा कर दी।
फर्जी अंगूठे का आरोप क्यों गंभीर है?
इस मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा केवल रकम की निकासी नहीं, बल्कि कथित तौर पर दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ है।
आरोप है कि ग्राहक के आहरण फॉर्म पर फर्जी अंगूठा निशान लगाया गया और उस दस्तावेज का इस्तेमाल वास्तविक दस्तावेज की तरह करके बैंक से पैसा निकाला गया।
बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहक की पहचान और निकासी की अनुमति से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण सुरक्षा कड़ी होते हैं। यदि किसी कर्मचारी पर ही इन दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप लगे, तो मामला व्यक्तिगत धोखाधड़ी से आगे बढ़कर संस्थागत नियंत्रण की मजबूती का सवाल बन जाता है।
जांच में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित फॉर्म पर अंगूठे के निशान का सत्यापन किस स्तर पर हुआ, निकासी की अनुमति किस प्रक्रिया से मिली और रिकॉर्ड में इसे किस तरह दर्ज किया गया।
रकम वापस करने के बाद भी खत्म नहीं होता मामला
जांच शुरू होने के बाद पांच लाख रुपये ग्राहक के खाते में वापस जमा किए जाने की बात सामने आई है। इससे ग्राहक को आर्थिक नुकसान की तत्काल स्थिति से राहत मिल सकती है, लेकिन पुलिस की जांच का दायरा इससे समाप्त नहीं होता।
किसी खाते से बिना खाताधारक की जानकारी रकम निकाली गई या नहीं, दस्तावेजों में जालसाजी हुई या नहीं और इसके पीछे किसकी भूमिका थी—ये सभी अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।
इसी वजह से पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
आगे की स्थिति जांच, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों पर निर्भर करेगी।
बैंकिंग सिस्टम के लिए यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है?
बैंक में ग्राहक अपना पैसा केवल इसलिए जमा नहीं करता कि उसे सुरक्षित जगह मिल जाए। वह यह भरोसा भी करता है कि उसके खाते से कोई भी निकासी उसकी अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना नहीं हो सकती।
इस मामले में अगर जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि सुरक्षा की एक से अधिक परतों के बावजूद अनधिकृत निकासी कैसे संभव हुई।
बैंकों में आम तौर पर कर्मचारी स्तर पर लेनदेन की निगरानी, दस्तावेजों का सत्यापन और रिकॉर्ड का ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं होती हैं। किसी एक कर्मचारी की भूमिका पर सवाल उठना इन नियंत्रणों की प्रभावशीलता की समीक्षा की जरूरत पैदा करता है।
ग्राहकों को भी किन संकेतों पर सतर्क होना चाहिए?
यह मामला बैंक ग्राहकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक सामने लाता है। खाते में लंबे समय तक लेनदेन की निगरानी न करने पर अनधिकृत निकासी देर से सामने आ सकती है।
ग्राहकों को नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट और खाते में होने वाले लेनदेन की जांच करनी चाहिए। किसी अनजान निकासी, संदिग्ध एंट्री या दस्तावेज से जुड़े लेनदेन की जानकारी मिलते ही बैंक को तत्काल सूचित करना महत्वपूर्ण है।
विशेषकर ऐसे खातों में जहां लंबे समय तक कोई लेनदेन नहीं होता, नियमित निगरानी और अलर्ट सुविधा का इस्तेमाल अतिरिक्त सुरक्षा दे सकता है।
अब जांच के सामने सबसे अहम सवाल
धौरपुर मामले में आगे की जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित हो सकती है—कथित फर्जी अंगूठा किसने लगाया, आहरण फॉर्म कैसे तैयार हुआ, निकासी के समय बैंक की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, सीसीटीवी फुटेज में क्या सामने आया और रकम वापस जमा करने की परिस्थितियां क्या थीं।
इन सवालों के जवाब ही यह तय करने में मदद करेंगे कि यह व्यक्तिगत स्तर पर किया गया कथित कृत्य था या बैंक की प्रक्रिया में भी कोई गंभीर चूक हुई।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।



